गुमला: नक्सलमुक्त होने के बाद भी अटका विकास, हरिनाखाड़ गांव की कोरवा जनजाति आज भी सुविधाओं से दूर

Published by : Sweta Vaidya Updated At : 09 Jun 2026 1:03 PM

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हरिनाखाड़ गांव के ग्रामीण

Gumla News: झारखंड के गुमला जिले का हरिनाखाड़ गांव नक्सलमुक्त होने के बावजूद विकास की बुनियादी सुविधाओं से दूर है. यहां रहने वाले कोरवा जनजाति के लोग दूषित पानी पीते हैं. गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं बनी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें. 

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गुमला से जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: गुमला प्रखंड के आंजन पंचायत में हरिनाखाड़ गांव है. इस गांव में कोरवा जनजाति के लोग निवास करते हैं. गांव चारों तरफ से पहाड़ और जंगल से घिरा हुआ है. आज से पांच साल पहले तक यह पूरा इलाका नक्सल प्रभावित था. इसी गांव में नक्सलियों का डेरा रहता था. लेकिन पुलिस की दबिश के बाद ये क्षेत्र नक्सलमुक्त हो गया. पहले नक्सली थे तो अधिकारी और कर्मचारी गांव नहीं जाते थे और गांव के विकास से मुंह मोड़े हुए थे. अब गांव नक्सलमुक्त हुआ तो गांव के लोग विकास के लिए छटपटा रहे हैं. 

तीन पुल बने, लेकिन सड़क नहीं बनी

हालांकि, नक्सल खत्म होने के बाद इस गांव तक जाने के लिए तीन पुल का निर्माण हुआ है. लेकिन, सड़क का निर्माण नहीं किया गया. जिस कारण आज भी बरसात में इस गांव के लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है. वहीं गांव में जलमीनार लगाया गया था, जो भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया. जलमीनार बनने के कुछ दिनों बाद ही खराब हो गया. जिसकी अबतक मरम्मत नहीं हुई. पक्का आवास का सपना भी अधूरा है. जबकि सरकार आदिम जनजातियों के विकास और संरक्षण के लिए कई योजना चला रही है. इसके बाद भी इस गांव में रहने वाले कोरवा जनजाति के लोग सरकारी योजनाओं से महरूम हैं. आजादी के 77 साल बाद भी लोग दूषित पानी पी रहे हैं. गांव में बिजली तक नहीं है. जिस कारण अक्सर गांव में हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के घुसने का डर बना रहता है. 

पूर्व डीसी की पहल से बना पुल 

गुमला के पूर्व डीसी शशि रंजन बाइक से गांव तक गये थे. इसके बाद उनकी पहल से नदियों में तीन पुल बना. सड़क की भी स्वीकृति दी थी. लेकिन सड़क नहीं बनी. डीसी की पहल से जलमीनार भी लगा था. लेकिन पीएचइडी विभाग का जलमीनार भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई.

ग्रामीणों का दर्द 

ग्रामीण सोमरा कोरवा ने कहा कि हरिनाखाड़ में कोरवा जनजाति के लोग रहते हैं. सरकार हमारे लिए कई योजना चला रही है. लेकिन यह सब कागजों में है. इसलिए इसबार जब भी चुनाव होगा. गांव में नेताओं को घुसने नहीं देंगे. वोट का भी बहिष्कार करेंगे. अधिकारियों की भी नो इंट्री करेंगे.

ग्रामीण रामू कोरवा ने कहा कि हमारे गांव तक आने के लिए सड़क नहीं है. गर्मी के दिनों में तो किसी प्रकार आते जाते हैं. लेकिन बरसात के मौसम में सड़क फिसलन हो जाता है. क्योंकि, मिटटी की सड़क है. सरकार और प्रशासन से मांग है कि हमारे गांव की सड़क को बनवा दिया जाए. जिससे गांव का विकास हो.

पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण मंगनी कोरवा ने कहा कि हमारे गांव में शुद्ध पानी की समस्या है. जलमीनार बना था. लेकिन वह बेकार है. चापानल है तो उससे दूषित पानी निकलता है. मजबूरी में गांव के लोग इधर-उधर से पानी जुगाड़ कर प्यास बुझाते हैं. गांव के पास से बहने वाली नदी के पानी का उपयोग करते हैं.

ग्रामीण जवंती कोरवा ने कहा कि हमारा गांव गरीबी और लाचारी में जी रहा है. गांव के दो बच्चे जो अनाथ हैं. इनके माता पिता नहीं है. इसलिए सरकार और प्रशासन से मांग है कि अनाथ बच्चों की बेहतर शिक्षा और परवरिश की व्यवस्था की जाए नहीं तो ये बच्चे मानव तस्करी का शिकार हो सकते हैं.

ग्रामीण मंगरी कोरवा ने कहा कि गांव में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. बीमार पड़ने पर झाड़फूंक कराना पड़ता है या तो ग्रामीण चिकित्सक से इलाज कराते हैं. जिससे जान जाने का डर बना रहता है. कम से कम सप्ताह में एक दिन कोई नर्स या चिकित्सक गांव आये और लोगों की स्वास्थ्य जांच करे.

संजय कुमार भगत, संरक्षक, न्यू आछासं ने कहा कि हरिनाखाड़‍ गांव में दो अनाथ बच्चे हैं. उनका हालचाल लेने गांव गये तो गांव की भयावह समस्या सामने आया है. प्रशासन क्या कर रहा है. यहां के विधायक कहां हैं जो गांव की मामूली समस्याओं को भी दूर नहीं कर पा रहे हैं. गुमला डीसी गांव के विकास के लिए दौरा करें.

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लेखक के बारे में

By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में श्वेता झारखंड बीट को कवर कर रही हैं, जहां वह राज्य की ताजा खबरें, लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दे, सरकारी योजनाओं, स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विषयों पर आधारित स्टोरीज तैयार करती हैं. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो. झारखंड बीट से पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखे.

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