Gumla News : जिले में नहीं हो रही मिट्टी की जांच, प्रयोगशाला में कर्मियों की है कमी

Jharkhand news, Gumla news, गुमला (जगरनाथ) : गुमला में मिटटी की जांच कैसे हो? मिट्टी जांच प्रयोगशाला, गुमला (Soil Testing Laboratory, Gumla) में कर्मियों की कमी है. इसका प्रभाव सीधे प्रयोगशाला के कार्य पर पड़ रहा है. कर्मियों के कमी के कारण निर्धारित लक्ष्य के आधार पर प्रयोगशाला में मिट्टी नमूना का जांच नहीं हो पा रहा है.
Jharkhand news, Gumla news, गुमला (जगरनाथ) : गुमला में मिटटी की जांच कैसे हो? मिट्टी जांच प्रयोगशाला, गुमला (Soil Testing Laboratory, Gumla) में कर्मियों की कमी है. इसका प्रभाव सीधे प्रयोगशाला के कार्य पर पड़ रहा है. कर्मियों के कमी के कारण निर्धारित लक्ष्य के आधार पर प्रयोगशाला में मिट्टी नमूना का जांच नहीं हो पा रहा है.
मालूम हो कि मिट्टी जांच प्रयोगशाला में गुमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों के मिट्टियों की जांच की जाती है, ताकि मिट्टी की ऊर्वरता का पता लगाया जा सके. लेकिन, कर्मियों की कमी के कारण मिट्टी जांच का कार्य प्रभावित हो रहा है. प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में मिट्टी नमूना का जांच किये जाने का लक्ष्य रहता है, लेकिन लक्ष्य हजारों में होने के बावजूद महज 200 से 300 मिट्टी नमूना का ही जांच हो पाता है.
प्रयोगशाल से मिली जानकारी के अनुसार, प्रयोगशाला के लिए कुल 9 सृजित पद है. जिसमें एक प्रयोगशाला इंचार्ज, 4 सहायक अनुसंधान पदाधिकारी (Assistant research officer), 2 प्रयोगशाला सहायक (Lab assistant) एवं 2 चतुर्थ वर्गीय कर्मियों के लिए सृजित पद है. जिसके विरूद्ध महज 3 लोग ही कार्यरत हैं. जिसमें एक प्रयोगशाला इंचार्ज के रूप में सत्यप्रकाश, एक प्रयोगशाला सहायक के रूप में दिलीप प्रसाद एवं एक कार्यालय सहायक के रूप में रंजीत शर्मा कार्यरत हैं. उसमें भी प्रयोगशाला इंचार्ज एवं कार्यालय सहायक प्रभार में और एक प्रयोगशाला सहायक प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं. एक तरह से देखा जाये तो प्रयोगशाला में सृजित पदों के विरुद्ध नियुक्ति शून्य है क्योंकि वर्तमान में जो 3 कर्मी कार्यरत हैं. उनमें से दो प्रभार में और एक प्रतिनियुक्ति पर हैं.
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वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रयोगशाला में एक भी मिट्टी नमूना का जांच नहीं हुआ. मिट्टी नमूना का जांच नहीं हो पाने का मुख्य कारण यह है कि इस वित्तीय वर्ष मिट्टी नमूना का जांच के लिए न तो लक्ष्य निर्धारित हुआ और न ही जांच के लिए कहीं से भी मिट्टी का नमूना लिया गया. बताया जा रहा है कि इस वित्तीय वर्ष में सरकार से आवंटन प्राप्त नहीं होने के कारण मिट्टी का न तो नमूना लिया गया और न ही जांच किया गया. वहीं, गत वित्तीय वर्ष 2019-20 की बात करें, तो गत वर्ष कुल 798 मिट्टी का नमूना जांच के लिए लिया गया था. जिसके विरुद्ध 715 मिट्टी नमूना का जांच तो गत वर्ष ही कर लिया गया, जबकि बाकी के बचे हुए 83 मिट्टी नमूना का जांच इस वित्तीय वर्ष में किया गया.
प्रयोगशाला के भवन की स्थिति भी दयनीय है. प्रयोगशाला का भवन काफी पुराना है. जो अब जीर्णशीर्ण हो रहा है. छत का प्लास्टर कभी-कभी टूट-टूट कर गिरता रहा है. पानी भी सीपेज करता है. जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भवन को मरम्मती की जरूरत है. नहीं तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
मिट्टी जांच प्रयोगशाला, गुमला के प्रभारी इंचार्ज सत्य प्रकाश ने कहा कि प्रयोगशाला में कर्मियों की कमी है. पूर्व में सृजित पद के आधार पर कुल 9 लोग नियुक्त होने चाहिए, लेकिन एक भी नियुक्त नहीं है. वर्तमान में 2 लोग प्रभार में और एक प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं. ऐसे पूर्व में सृजित पदों की संख्या 9 है, लेकिन वर्तमान में कार्यालय के लिए कुल 12 पद सृजित है. कर्मियों के कमी के कारण कार्य प्रभावित होता है.
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Posted By : Samir Ranjan.
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