FIFA U17 World Cup: टीवी नहीं है, कप्तान अष्टम उरांव को वर्ल्ड कप खेलते नहीं देख पायेंगे उनके गांव के लोग

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फीफा अंडर 17 वर्ल्ड कप का मंगलवार को आगाज हो रहा है. भारत का पहला मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाला है. भारत की कप्तान अष्टम उरांव झारखंड की हैं. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि उनके गांव के लोग उनका मैच नहीं देख पायेंगे. क्योंकि गांव में किसी के पास टीवी ही नहीं है.

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फीफा अंडर-17 विश्व कप में भारत कल मंगलवार को अपने अभियान की शुरुआत अमेरिका के खिलाफ करने वाला है. झारखंड की छह बेटियों को नेशनल टीम में जगह मिली है. यहां तक कि टीम की कप्तान भी झारखंड की ही बेटी अष्टम उरांव है. लेकिन अष्टम उरांव को उसके गांव वाले इस मेगा इवेंट में फुटबॉल खेलते हुए नहीं देख पायेंगे. क्योंकि उसके घर में टीवी नहीं है. गांव वालों के पास भी टीवी नहीं है. इससे गांव के लोग निराश हैं.

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गुमला की दो बेटी वर्ल्ड कप टीम में 

गुमला जिला से 60 किमी दूर बिशुनपुर प्रखंड के बनारी गोर्राटोली की रहने वाली अष्टम उरांव भारतीय महिला टीम की कप्तान हैं. इसलिए गांव वाले चाहते हैं कि अष्टम उरांव को इस इंटरनेशनल मुकाबले में खेलते हुए टीवी पर देखें. बता दें कि गुमला जिले के दो बालिका फुटबॉलरों का चयन फीफा वर्ल्ड कप के लिए हुआ है. जिसमें चैनपुर प्रखंड की सुधा अंकिता तिर्की व बिशुनपुर प्रखंड की अष्टम उरांव है.

गांव में नहीं है किसी के पास टीवी

अष्टम उरांव का गांव दूरस्थ इलाका में है. गांव के लोग गरीबी में जी रहे हैं. ग्रामीण लोग खेतीबारी करते हैं और वह भी पूरी तरह बारिश पर निर्भर करता है. मजदूरी कर जीविका चलाते हैं. गांव वाले रोज कमाते हैं तो खाते हैं. अष्टम का परिवार भी गरीबी में जी रहा है. माता पिता मजदूरी करते हैं. ऐसे में टीवी खरीदने के लिए इन लोगों के पास पैसा नहीं है. इस कारण परिवार के लोग बेटी को खेलते हुए कैसे देखेंगे. इसकी निराशा है.

बेटी देश के लिए खेलेगी, इससे ग्रामीण खुश हैं

गोर्राटोली गांव के लोग इस बात से खुश हैं कि गांव की मिट्टी में पली बढ़ी अष्टम देश के लिए खेलेगी. अष्टम उरांव के पिता हीरालाल उरांव ने कहा कि आज मुझे अपनी बेटी पर बहुत गर्व है जो पूरे दुनिया में अपनी प्रतिभा के दम पर नाम रोशन कर रही है. उन्होंने बताया कि गरीबी के कारण किसी प्रकार उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश की. शिक्षा एवं संस्कार देने का भरपूर प्रयास किया. जिसका नतीजा आज सामने है. बिशुनपुर जैसे जगहों में खेल की कोई सुविधा नहीं होने के बावजूद वह आज भारतीय महिला टीम का कप्तान बन गयी. इससे मुझे गर्व महसूस हो रहा है. अष्टम उरांव की मां तारा देवी ने बताया कि अष्टम शुरू से ही एक जुझारू बच्ची है. वह जिस काम को ठान लेती है. उसे पूरे मन के साथ करती है. यही वजह है कि आज वह इस मुकाम तक पहुंच पायी है.

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