दीरगांव की सड़क पर कीचड़, धान रोपकर अपनी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया

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30 गुम 11 में बैठक करते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

30 गुम 11 में बैठक करते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network

गुमला के घाघरा में सड़क की बदहाली से परेशान ग्रामीणों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। कीचड़ भरी सड़क पर धान रोपकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना आक्रोश जताया।

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घाघरा: विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर गुमला के घाघरा प्रखंड के अति सुदूरवर्ती दीरगांव पंचायत में सड़क की बदहाली ने ग्रामीणों का धैर्य तोड़ दिया है. वर्षों तक जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी जब सलगी तालाब से चांदगो तालाब तक लगभग सात किलोमीटर सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया. जिसने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.

गुरुवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने जर्जर सड़क पर धान की रोपाई कर अपनी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लगभग 20 वर्षों से इस सड़क के निर्माण की मांग की जा रही है. हर चुनाव में सड़क बनाने का आश्वासन मिलता है. लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भुल जाते हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में यह मार्ग घुटनों तक कीचड़ से भर जाता है. जिससे पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रहता. मरीज, गर्भवती महिलाएं, स्कूली बच्चे और किसान सबसे अधिक परेशान होते हैं. ग्रामसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब सड़क लोगों के चलने लायक नहीं है तो इस पर धान की खेती ही कर दी जाये.

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बरसात के दौरान इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा. क्योंकि दुर्घटना में किसी की जान चली गयी तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी. ग्राम प्रधान जगदीश मुंडा ने कहा कि चुनाव के दौरान जब भी विधायक इस क्षेत्र में आते हैं तो कहते हैं दीरगांव पंचायत आते-आते कमर में दर्द शुरू हो जाता है.

इस बार जीतेंगे तो इस सड़क को जरूर बनायेंगे. उन्होंने लगातार कई बार जीत दर्ज की पर एक बार भी उनका वादा पूरा नहीं हुआ. वहीं ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा है कि गांव से एक सवारी पिकअप चलती है. जिससे लोग आना-जाना करते हैं. लेकिन सड़क की ऐसी स्थिति हो गयी है की किसी भी दिन दुर्घटना घट सकती है और लोगों की जाने जा सकती है. यदि ऐसा हुआ तो इसकी जवाबदेही प्रशासन व विधायक चमरा लिंडा की होगी.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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