छुट्टियां मनाने गांव आया मासूम तालाब में डूबा, एक सप्ताह बाद लौटना था दिल्ली
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 12 Jun 2026 3:49 PM
गुमला के चैनपुर प्रखंड में बड़ा हादसा.
Gumla News: गुमला के चैनपुर प्रखंड के बरवे नगर में दिल्ली से गर्मी की छुट्टियां मनाने आया 11 वर्षीय आर्यन लकड़ा तालाब में डूब गया. करीब दो घंटे की तलाश के बाद ग्रामीणों ने शव निकाला. परिवार एक सप्ताह बाद दिल्ली लौटने की तैयारी कर रहा था, लेकिन हादसे ने खुशियां छीन लीं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla News: गर्मी की छुट्टियां बिताने दिल्ली से अपने पैतृक गांव आया 11 वर्षीय आर्यन लकड़ा अब कभी वापस नहीं लौट सकेगा. चैनपुर प्रखंड के बरवे नगर में तालाब में डूबने से उसकी मौत हो गई. इस दर्दनाक घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है. परिवार एक सप्ताह बाद दिल्ली लौटने की तैयारी में था, लेकिन इससे पहले ही एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया.
15 दिन पहले आया था दादा-दादी के गांव
जानकारी के अनुसार, आर्यन लकड़ा लगभग 15 दिन पहले दिल्ली से अपने दादा-दादी के गांव बरवे नगर आया था. वह दिल्ली में पांचवीं कक्षा का छात्र था और गर्मी की छुट्टियां अपने गांव में बिताने के लिए काफी उत्साहित था. उसकी मां नीलम लकड़ा ने बताया कि परिवार की दिल्ली वापसी की तैयारी चल रही थी. एक सप्ताह बाद की ट्रेन की टिकट भी बुक हो चुका था. घर में लौटने की चर्चा हो रही थी और छुट्टियों की यादें साथ लेकर वापस जाने की योजना बनाई जा रही थी. लेकिन किसे पता था कि यह यात्रा अधूरी रह जाएगी.
सुबह से तालाब में नहाने की कर रहा था जिद
परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही आर्यन तालाब में नहाने जाने की जिद कर रहा था. करीब नौ बजे वह घर से निकल गया. शुरू में किसी को चिंता नहीं हुई, क्योंकि गांव में बच्चे अक्सर आसपास खेलते रहते हैं. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों की चिंता बढ़ गई. मां नीलम लकड़ा उसे खोजते हुए तालाब के पास पहुंचीं. वहां पहुंचने पर उन्हें तालाब किनारे आर्यन के कपड़े, साबुन और चप्पल दिखाई दिए, लेकिन बेटा कहीं नजर नहीं आया.
ग्रामीणों ने जाल के सहारे शुरू की तलाश
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुट गए. उसी दौरान तालाब में मछली पकड़ रहे कुछ ग्रामीणों ने जाल के सहारे खोजबीन शुरू की. करीब दो घंटे तक लगातार प्रयास किए गए. आखिरकार तालाब से आर्यन का शव बाहर निकाला गया. मासूम बेटे का शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया. गांव में मातम पसर गया और हर किसी की आंखें नम हो गईं. एक पल पहले तक छुट्टियों की खुशियां थीं और अगले ही पल पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
इकलौते बेटे की मौत से मां का बुरा हाल
आर्यन के पिता स्वर्गीय रंजीत लकड़ा हैं. पिता का साया पहले ही सिर से उठ चुका था और अब इकलौते बेटे की असमय मौत ने मां नीलम लकड़ा को पूरी तरह तोड़ दिया है. बेटे के निधन के बाद उनका रो-रोकर बुरा हाल है. परिजन और ग्रामीण उन्हें सांत्वना देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जिस मां ने एक सप्ताह बाद बेटे के साथ दिल्ली लौटने का सपना देखा था, उसके लिए इस दर्द को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है.
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पूरे गांव में पसरा मातम
इस हादसे से बरवे नगर समेत आसपास के इलाकों में शोक की लहर है. ग्रामीणों का कहना है कि आर्यन मिलनसार और चंचल स्वभाव का बच्चा था. गांव आने के बाद वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ खुशी-खुशी समय बिता रहा था. मासूम की असामयिक मौत ने एक बार फिर जलाशयों और तालाबों के आसपास बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. गांव के लोगों ने भी इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. एक सप्ताह बाद जिस बच्चे को दिल्ली लौटना था, वह अब हमेशा के लिए अपनों की यादों में बस गया है. छुट्टियों की खुशियां मातम में बदल गईं और बरवे नगर का यह दर्दनाक हादसा हर किसी की आंखें नम कर गया.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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