झारखंड की लोक-संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये : पद्मश्री मुकुंद नायक

प्रतिनिधि, गुमला पदमश्री मुकुंद नायक ने राज्य सरकार से अपील की है कि स्थानीय कला-संस्कृतिक को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये. अगर संभव हो, तो वर्ग छह से ही इसे अनिवार्य विषय बनाया जाये. इससे हमारे आने वाली पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. झारखंड की प्राचीन कला-संस्कृति भी किताबों के माध्यम से आने […]
प्रतिनिधि, गुमला
पदमश्री मुकुंद नायक ने राज्य सरकार से अपील की है कि स्थानीय कला-संस्कृतिक को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये. अगर संभव हो, तो वर्ग छह से ही इसे अनिवार्य विषय बनाया जाये. इससे हमारे आने वाली पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. झारखंड की प्राचीन कला-संस्कृति भी किताबों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी के बीच जीवित रहेगी.
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श्री नायक गुमला दौरा के क्रम में सर्किट हाउस में बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय कला-संस्कृति के संरक्षण के लिए पहल करे. झारखंड की फिजाओं में डमकच है, झूमर है तो फगुआ भी है. बस जरूरत है. इन कलाओं में आज के आधुनिक परिवेश के युवाओं की रूचि जगाने की.
श्री नायक ने गुमला प्रशासन से स्थानीय लोक-संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जिला स्तर पर कार्यक्रम भी आयोजित करने की अनुरोध किया है. इसके लिए अच्छा हो कि बच्चों के बीच लोक-संस्कृति पर प्रतियोगिता भी हो. मुकुंद नायक के गीत व नृत्य से प्रभावित गुमला एसपी चंदन कुमार झा उनसे सर्किट हाउस में मुलाकात किये.
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एसपी ने कहा कि झारखंड की कला की जो विशेषता है. उसे अक्षुण रखने के लिए आप जैसे महान कलाकार को आगे आने की. आपने झारखंड की कला व संस्कृति को एक नया गौरव प्रदान किया है. आपकी इस कला को डीफरेंट फॉम में डीफरेंट लोगों के बीच डीफरेंट सोच के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है.
मौके पर श्री नायक संत इग्नासियुस उच्च विद्यालय गुमला के परिसर में स्वर्गीय फादर पीपी वनफल द्वारा बनवाये गये आदिवासी म्यूजियम का अवलोकन किया. म्यूजियम में आदिवासियों की धरोहर, संस्कृति, वेशभूषा के संरक्षण व लोगों को बताने के लिए किये गये पहल की प्रशंसा किये.
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