जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे

Published at :28 Mar 2017 7:56 AM (IST)
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जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे

आयाेजन. आदिवासी सेंगेल अभियान की समाधान सभा रघुवर सरकार पर जम कर बरसे आदिवासी नेता 2019 में सरकार को उखाड़ फेंकने का ऐलान गुमला जिले के सैकड़ों आदिवासी पहुंचे. सीएनटी व एसपीटी एक्ट: संशोधन के विरोध में सेंगेल अभियान की समाधान सभा गुमला : सीएनटी व एसपीटी एक्ट में हुए संशोधन व स्थानीय नीति के […]

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आयाेजन. आदिवासी सेंगेल अभियान की समाधान सभा
रघुवर सरकार पर जम कर बरसे आदिवासी नेता
2019 में सरकार को उखाड़ फेंकने का ऐलान
गुमला जिले के सैकड़ों आदिवासी पहुंचे.
सीएनटी व एसपीटी एक्ट: संशोधन के विरोध में सेंगेल अभियान की समाधान सभा
गुमला : सीएनटी व एसपीटी एक्ट में हुए संशोधन व स्थानीय नीति के विरोध में आदिवासी सेंगेल अभियान गुमला के तत्वावधान में कचहरी परिसर में समाधान सभा का आयोजन किया गया. सभा में जिले के सभी 12 प्रखंड से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. इनमें महिलाओं की संख्या अधिक थी. मौके पर कई बड़े आदिवासी नेता पहुंचे. सभी नेता रघुवर सरकार पर जम कर बरसे. वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का निर्णय लिया गया. जान देंगे, जमीन नहीं देंगे के नारे लगाये गये. लोगों ने एक स्वर में कहा: जमीन हमारे जीने का सहारा है. इसे लूटने नहीं देंगे. जमीन नहीं रहेगा, तो हम भूखे मर जायेंगे. मौके पर कैथोलिक संघ के अध्यक्ष सेत कुमार एक्का, तेलेस्फोर एक्का, फ्लोरा मिंज, रोश किंडो, सुमित्रा, सिमडेगा के आशीष बाड़ा, सजीत पन्ना, अमित एक्का, गोविंदा, ललित एक्का व सुशील दीपक मिंज सहित कई लोग थे.
जमीन के लिए दूसरी लड़ाई शुरू : सालखन
सेंगेल अभियान के केंद्रीय संयोजक सालखन मुरमू ने कहा कि सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन कर भाजपा सरकार ने आदिवासी व मूलवासियों को जीते जी मारने की योजना बनायी है. अगर हम आज नहीं जागें, तो भविष्य में अपनी ही जमीन पर नौकर होंगे.
सरकार चाहती है, हम नौकर बन कर रहें. सरकार ने झारखंडी समाज के शौर्य को ललकारा है. हमारी विरासत पर हमला बोला है. भाजपा ने एक्ट में संशोधन कर हमारी सामाजिक व आर्थिक आधार की जड़ को हिलाने का काम किया है, लेकिन अब धैर्य का बांध टूट गया है. जवाब देना होगा और यह तभी संभव होगा, जब झारखंड राज्य के तमाम मूलवासी व आदिवासी एक मंच पर आयेंगे. एक लड़ाई झारखंड अलग की लड़ी गयी थी, अब दूसरी लड़ाई सीएनटी व एसपीटी एक्ट में हुए संशोधन के खिलाफ शुरू हो गयी है.
सुरक्षा कवच है एक्ट : डॉ अरुण
प्रदेश संयोजक डॉ अरुण उरांव ने कहा कि सीएनटी व एसपीटी एक्ट अदिवासियों का सुरक्षा कवच है. लेकिन रघुवर सरकार ने एक साजिश के तहत एक्ट में संशोधन कर हमें अपनी ही जमीन से बेदखल करने की योजना बनायी है. रघुवर सरकार की योजना है, झारखंड में पूंजीपतियों को स्थापित कर हम गरीब आदिवासियों को पलायन करने के लिए मजबूर कर देना. लेकिन यह कभी संभव नहीं होगा, क्योंकि हम एकजुट हो रहे हैं. हम रघुवर सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन करें. हमारी जमीन ही हमारी इज्जत व रोजी रोटी है. इसे किसी भी कीमत पर लूटने नहीं देंगे.
जमीन की रक्षा करना है : थियोडोर किड़ो
प्रदेश संयोजक थियोडोर किड़ो ने आदिवासियों से आह्वान किया कि पैसे के लोभ में न आयें. जमीन की रक्षा करें. राज्य की जिस माटी को बचाने के लिए भगवान बिरसा मुंडा, वीर बुधू भगत, सिदो-कान्हू, जतरा टाना भगत व कार्तिक उरांव सहित कई सपूतों ने अपना पूरा जीवन राज्य को समर्पित कर दिया. आज उस माटी की रक्षा के लिए हमें एकजुट होने की जरूरत है. सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन कर सरकार ने आदिवासियों पर सीधा प्रहार किया है. समय आ रहा है. हमें जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा.
अस्तित्व की रक्षा के लिए एकजुट हों : सुनील
गुमला जिला संयोजक सुनील केरकेट्टा ने कहा कि हमारी जन्म भूमि, जीविका भूमि को रघुवर सरकार हमसे छीनने में लगी हुई है. हमारे स्थानीय सांसद, विधायक व अधिकारी भी रघुवर सरकार की जी हुजूरी करने में लगे हैं. लेकिन अब बरदाश्त से बाहर हो गया है. झारखंड राज्य के लोग सीधे और ईमानदार हैं. रघुवर सरकार इसका फायदा उठाना चाह रही है, लेकिन रघुवर सरकार को यह पता नहीं है कि अब बात हमारे अस्तित्व की है और हम अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी जान तक दे सकते हैं.
जवाब देने के लिए तैयार रहे : नील जस्टिन
प्रमंडलीय संयोजक नील जस्टिन बेक ने कहा कि हमें एकजुट होना होगा. सरकार ने हमें गांवों से बेदखल करने की जो योजना बनायी है, उसका जवाब देना होगा. जमीन रहेगी, तभी हम जीवित रहेंगे, क्योंकि जमीन पर हम खेतीबारी कर अपनी जीविका चलाते हैं. रघुवर सरकार ने हमारी जमीन को छीन कर हमें भूखों मारने की योजना बनायी है. स्थानीय नीति में बाहरी को लाभ मिल रहा है.
हमारे भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट होने की जरूरत है. सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन कर सरकार ने आदिवासियों पर सीधा प्रहार किया है. हमें जवाब देने के लिए तैयार रहना होगा.
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