नक्सली गढ़ के 300 बच्चों का भविष्य अंधेरे में

Published at :27 Mar 2017 7:44 AM (IST)
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नक्सली गढ़ के 300 बच्चों का भविष्य अंधेरे में

दुर्जय पासवान गुमला : गुमला जिला के जंगल व पहाड़ों के बीच बसे बिशुनपुर प्रखंड के चार पंचायत निरासी, बनारी, घाघरा व बिशुनपुर में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं है. ये नक्सल प्रभावित इलाका है. इन चार पंचायतों के करीब 300 बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. इसमें 30 से 35 अनाथ बच्चे भी हैं. शिक्षा […]

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दुर्जय पासवान
गुमला : गुमला जिला के जंगल व पहाड़ों के बीच बसे बिशुनपुर प्रखंड के चार पंचायत निरासी, बनारी, घाघरा व बिशुनपुर में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं है. ये नक्सल प्रभावित इलाका है. इन चार पंचायतों के करीब 300 बच्चे शिक्षा से वंचित हैं. इसमें 30 से 35 अनाथ बच्चे भी हैं. शिक्षा विभाग की जो रिपोर्ट आ रही है. उसके अनुसार लड़कियों में शिक्षा का स्तर सबसे कम है. तीसरी व चौथी कक्षा के बाद बच्चे स्कूल जाना छोड़ देते हैं. इसमें कुछ बच्चे घर के कामकाज में लगे जाते हैं या फिर रोजी-रोटी के लिए पलायन कर जाते हैं. 10 से 15 साल की लड़कियां मानव तस्करी का भी शिकार हो जाती हैं. नक्सलियों द्वारा भी बच्चों को उठा कर ले जाने का खतरा बना रहता है. क्षेत्र की जो भौगोलिक बनावट, गरीबी व बेरोजगारी है.
उसके अनुसार बच्चे किस राह पर जायेंगे. कहा नहीं जा सकता है.अधिकांश लड़कियां 10 साल के बाद स्कूल छोड़ देतीं हैं : शिक्षा विभाग ने 13-फोकस एरिया डेवलपमेंट प्लान के तहत चार पंचायत के बच्चों का प्रोफाइल तैयार किया है. अभी भी प्रोफाइल तैयार करने का काम चल रहा है. प्रोफाइल के अनुसार 10 साल के बाद अधिकांश लड़कियां स्कूल जाना छोड़ देती हैं. नाम, पता लिखने व कुछ बहुत पढ़ने की शिक्षा लेने के बाद लड़कियां घर पर रहती हैं. घर के कामकाज में हाथ बंटाने लगती हैं या फिर काम के लिए पलायन कर जाती हैं. कई लड़कियों की कम उम्र में शादी भी कर दी जाती है.
गांव का नाम, जहां शिक्षा का स्तर ठीक नहीं
निरासी पंचायत के बनालात, बोरांग, गोबरसेला, निरासी, कुमारी, कटिया, जमटी, टिटही, सालम नवाटोली, बनारी, जाहू कोकोटोली, हेसराग, चेंगरी, अंकुरी, घाघरा, बड़कादोहर, जोरी, रेहलदाग, हाकाजांग, दरदाग, हापाद, बैठथ, लबगा, रेहे, चापाटोली, बेती, होलेंग, चिपर गांव में शिक्षा का स्तर काफी खराब है. इन क्षेत्रों में 28 स्कूल है. इसके बावजूद शिक्षा का स्तर खराब है. शिक्षा विभाग मानता है कि शिक्षक स्कूल जाते हैं. लेकिन हाल के दिनों में वरीय अधिकारियों के दौरे से स्पष्ट हुआ है कि कई शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं. स्कूलों में समस्या भी है.
दो सौ बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुके हैं : इन गांवों से डेढ़ साल पहले जब नक्सली गांव से बच्चे मांग रहे थे, उस समय प्रशासन हरकत में आयी थी. करीब 200 से अधिक बच्चों को गांव से पुलिस सुरक्षित निकाल कर विभिन्न स्कूलों में नामांकन करा चुकी है. उस समय डीसी ने डीएसइ को निर्देश दिया था कि गांव से कितने बच्चे गायब हैं, स्कूल में नामांकन के बावजूद कौन-कौन बच्चे स्कूल नहीं आते हैं. उसका प्रोफाइल बना कर दें. इससे प्रशासन यह पता कर सके कि क्षेत्र से कितने बच्चे गायब हैं.
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