गुमला : झारखंड पर्यटन मैप के केंद्र बिंदु में रहेगा नवरत्न गढ़

दुर्जय पासवान गुमला : झारखंड राज्य के ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों का पर्यटन विभाग मैप बनाने जा रहा है. इसपर काम शुरू हो गया है, जिसमें गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित नवरत्न गढ़ झारखंड राज्य के पर्यटन मैप के केंद्र बिंदु में रहेगा. मैप में नवरत्न गढ़ मुख्य फोकस होगा, जिससे भारत ही नहीं, दूसरे […]
दुर्जय पासवान
गुमला : झारखंड राज्य के ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों का पर्यटन विभाग मैप बनाने जा रहा है. इसपर काम शुरू हो गया है, जिसमें गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित नवरत्न गढ़ झारखंड राज्य के पर्यटन मैप के केंद्र बिंदु में रहेगा. मैप में नवरत्न गढ़ मुख्य फोकस होगा, जिससे भारत ही नहीं, दूसरे देश के पर्यटक भी मैप के जरिये झारखंड के पर्यटन स्थलों के बारे में जान सकेंगे. नवरत्न गढ़ को केंद्र बिंदु मानते हुए राज्य के सभी प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों की दूरी भी मैप में अंकित होगी, जिससे लोग आसानी से ये जान सकेंगे कि कौन कितनी दूरी पर स्थित है.
सुरक्षा के लिए राजा ने बनवाया था गढ़
नवरत्न गढ़ छोटानागपुर के नागवंशी राजाओं की ऐतिहासिक धरोहर है. इसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. मुगल साम्राज्य से बचने के लिए राजा दुर्जनशाल ने इसे बनवाया था.
उस समय यह पूरा इलाका जंगल व पहाड़ था. जहां नवरत्न गढ़ बना है, उस समय चारों ओर खाई था, ताकि बाहरी राज्य के दुश्मन यहां घुसपैठ या आक्रमण न कर सके. लेकिन दुर्जनशाल की मृत्यु के बाद कलांतार में समय बदला और आज यहां विरानी है. अमूल्य भवन आज भी खंडहर के रूप में है. ऐसे केंद्र व राज्य सरकार इसे पर्यटन व ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विकसित करने में लगी हुई है. राजा दुर्जनशाल द्वारा बनवाया गया नवरत्न भवन का छह मंजिला भवन वर्तमान समय में जमींदोज हो गया है. तीन मंजिला भवन अभी शेष है, जो खंडहर हो गया है
गुमला जिले को देशभर में पहचान देने के लिए नवरत्न गढ़ को झारखंड राज्य के पर्यटन मैप में पहले स्थान पर रखा गया है. इसका विकास भी स्वयं पर्यटन विभाग अपने स्तर से करने जा रहा है. इसका पुरातात्विक विभाग ने सर्वेक्षण किया है.
अरुण कुमार सिंह, जिला योजना पदाधिकारी, गुमला
वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल है नवरत्न गढ़
रांची व गुमला मार्ग में नेशनल हाइवे-43 में स्थित सिसई प्रखंड के नगर गांव में नवरत्न गढ़ (डोइसागढ़) है. इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया है. पुरातात्विक विभाग भारत सरकार नवरत्न गढ़ का सर्वेक्षण करा रहा है. यहां के प्राचीन धरोहरों को बचाने के लिए कई चरणों में पुरातात्विक विभाग ने सर्वेक्षण किया है. डोइसागढ़, नवरत्न गढ़, रानी लुकई, कमल सरोवर, कपीलनाथ मंदिर व भैरव मंदिर अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व नयनाभिराम प्राकृतिक दृश्य के कारण विश्व विख्यात है.
डोइसागढ़ में कई धरोहर देख सकते हैं
डोइसागढ़ व नवरत्न गढ़ के नयनाभिराम प्राकृतिक दृश्य, पांच मंजिला वर्गाकार इमारत, 33 इंच मोटी दीवार, रानी वास, कचहरी घर, कमल सरोवर, रानी लुकइयर का भूलभुलैया, गुप्त कमरा, गुंबद के भीतरी भाग में पशु चित्र, घोड़ा, सिंहों से उत्कीर्ण परिपूर्ण आकृति, चारों कोनों पर शीर्ष गुंबदनुमा स्तंभों पर बड़े-बड़े नाग लिपटे, जगन्नाथ मंदिर, भैरव मंदिर, कपिलनाथ मंदिर, मंदिर के गर्भगृह में बड़े आकार की मूर्ति, धोबी मठ व दीवारों पर मनोहारी चित्रकारी यहां देखने योग्य है.
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