नारी सशक्तीकरण : शोषित, पीड़ित लड़कियां बनेंगी लीडर

शक्तिवाहिनी व सीडब्ल्यूसी द्वारा गुमला व खूंटी जिला में 60 लड़कियों को फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अब लड़कियों के हुनर के अनुसार उन्हें प्रशिक्षित कर आगे बढ़ने का अवसर दिया जायेगा. लड़कियों को चाइल्ड रिपोर्टर भी बनाने की तैयारी चल रही है. लड़कियों को कैमरा चलाने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा […]
शक्तिवाहिनी व सीडब्ल्यूसी द्वारा गुमला व खूंटी जिला में 60 लड़कियों को फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. अब लड़कियों के हुनर के अनुसार उन्हें प्रशिक्षित कर आगे बढ़ने का अवसर दिया जायेगा. लड़कियों को चाइल्ड रिपोर्टर भी बनाने की तैयारी चल रही है. लड़कियों को कैमरा चलाने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
मानव तस्करी की शिकार 500 से अधिक लड़कियों ने की नयी शुरुआत. लड़कियां बनेंगी फुटबॉलर और चाइल्ड रिपोर्टर.
जगरनाथ पासवान
गु मला में मानव तस्करी की शिकार 500 से अधिक लड़कियों ने नयी शुरुआत की है. फुटबॉल सीख रही हैं, चाइल्ड रिपोर्टर बनने की भी तैयारी कर रही हैं. इन्हें रिपोर्टिंग के साथ कैमरा चलाना भी सिखाया जा रहा है. इन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि क्षेत्र की समस्याओं की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करा सकें. पालकोट प्रखंड में दिल्ली की संस्था ‘शक्तिवाहिनी’ और गुमला सीडब्ल्यूसी लड़कियों को प्रशिक्षित कर रहा है.
‘शक्तिवाहिनी’ के ऋषिकांत ने बताया कि मानव तस्करी की शिकार लड़कियों का जीवन स्तर सुधारने, उनमें लीडरशिप की भावना जागृत करने के लिए फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे पालकोट व खूंटी की 30-30 लड़कियों में बदलाव आया है. अब इन्हें चाइल्ड रिपोर्टर बनाया जायेगा. इतना ही नहीं, लड़कियों को शिक्षित करने की दिशा में भी काम चल रहा है, ताकि भविष्य में इन्हें कोई समस्या न हो. ये अपनी अलग पहचान बना सकें. 12 लड़कियों ने इस वर्ष मैट्रिक व इंटर की परीक्षा पास की है.
मानव तस्करों के जरिये दिल्ली पहुंची इन 60 लड़कियों ने तरह-तरह की यातना-प्रताड़ना और शोषण को सहा. शक्तिवाहिनी, सीडब्ल्यूसी और पुलिस ने मिल कर इन्हें जिल्लत की जिंदगी से मुक्ति दिलायी. ऐसी लड़कियों का जीवन स्तर बदलने के लिए शक्तिवाहिनी ने उनके हुनर को निखारने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की. लड़कियों की इच्छा के अनुरूप ही उन्हें फुटबॉल और संवाददाता बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है.
चाइल्ड रिपोर्टर रोकेंगी पलायन
पलायन रोकने के लिए चाइल्ड रिपोर्टर को विशेष रूप से ट्रेंड किया जायेगा, क्योंकि इन्हें पता है कि घर से दूर किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. लोगों में जागरूकता की कमी के कारण कई केस सामने नहीं आते. ये लड़कियां गांव से पलायन की रिपोर्ट मीडिया और प्रशासन को देंगी. इनकी मदद से मानव तस्करी को भी रोका जा सकेगा. इतना ही नहीं, गांव के स्कूलों में शिक्षक आते हैं या नहीं, मध्याह्न भोजन की क्या स्थिति है, पानी, बिजली, सड़क आदि की समस्या को भी उजागर करेंगी. इन्हें मिनी कैमरा भी उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि तत्काल की घटना की तसवीर भी खींच कर भेज सकें.
12 लड़कियां इस वर्ष मैट्रिक इंटर की परीक्षा में हुईं उत्तीर्ण
दिल्ली से मुक्त होने के बाद सभी लड़कियां विभिन्न स्कूलों में पढ़ रही हैं. कुछ कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में, तो कुछ अपने गांव के स्कूल में. सीडब्ल्यूसी के सदस्य अलख नारायण सिंह ने कहा कि गुड न्यूज यह है कि पलायन की शिकार 12 लड़कियों ने मैट्रिक व इंटर की परीक्षा पास की.
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