पत्नी के सामने मारते-पीटते ले गये

Published at :26 May 2016 7:46 AM (IST)
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पत्नी के सामने मारते-पीटते ले गये

अपराध. आंजन गांव में राशन डीलर एतेश्वर उरांव की हत्या से सहमे हैं गांव के लोग आंजन गांव का राशन डीलर एतेश्वर 15 साल से माओवादियों के निशाने पर था. परिवार के साथ गुमला शहर में छिप कर रह रहा था. बुधवार को राशन बांटने गांव गया था. माओवादियों ने उसका अगवा किया और गोली […]

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अपराध. आंजन गांव में राशन डीलर एतेश्वर उरांव की हत्या से सहमे हैं गांव के लोग
आंजन गांव का राशन डीलर एतेश्वर 15 साल से माओवादियों के निशाने पर था. परिवार के साथ गुमला शहर में छिप कर रह रहा था. बुधवार को राशन बांटने गांव गया था. माओवादियों ने उसका अगवा किया और गोली मार दी़
गुमला : गुमला प्रखंड के आंजन गांव का राशन डीलर एतेश्वर उरांव 15 साल से भाकपा माओवादियों से छिपता फिर रहा था. कई बार माओवादियों ने उसपर हमला भी किया था, लेकिन हर बार वह बचता रहा. माओवादियों के डर से वह अपने परिवार के साथ गुमला शहर में शरण लिये हुए था. पत्नी लुइसा उरांव ने बताया कि बुधवार को दिन के करीब 11 बजे वह अपने पति के साथ दुकान में राशन बांट रही थी, तभी बाइक से दो हथियारबंद लोग पहुंचे. शुरू में लगा राशन मांगने आये हैं.
दोनों नक्सली दुकान में घुस गये. इसके बाद पैसा मांगने लगे. नक्सली व एतेश्वर की पत्नी लुइसा के बीच कहासुनी भी हुई, तभी एतेश्वर अंदर कमरे से निकला, तो नक्सली ने उसे पकड़ लिया. चेहरे व हाथ को पीछे कर काला कपड़ा से बांध दिया. डंडे से एतेश्वर को पीटा और बाइक में बैठाने लगे. वह अपने पति को बचाने के लिए नक्सलियों के सामने गिड़गिड़ाने लगी. लुइसा ने कहा कि जितना पैसा चाहिए ले लो, लेकिन मेरे पति को छोड़ दो. नक्सलियों ने लुइसा से कहा कि आंजन मंदिर के समीप हमारे संगठन के नेता हैं, उससे भेंट करा कर वापस ला देंगे. यह सुनने के बाद लुइसा भी नक्सलियों के साथ जाने को तैयार हो गयी, लेकिन नक्सलियों ने लुइसा की बात नहीं सुनी और जबरन एतेश्वर को ले गये. एतेश्वर को उठा कर ले जाने के बाद ग्रामीणों की भीड़ जुट गयी़ ग्रामीण आंजन मंदिर की और बढ़ने लगे. आधा रास्ता ही पार किया था कि गोली चलने की आवाज सुनायी दी़ जब ग्रामीण कांसीटोली पहुंचे, तो देखा एतेश्वर जमीन में तड़प रहा है. वह खून से लथपथ है. लुइसा तुरंत गाड़ी की व्यवस्था कर उसे गुमला लाने लगी, तो अंतिम बार एतेश्वर ने कहा : अब मैं नही बचूंगा. इतना कहने के साथ ही उसकी मौत हो गयी.
माओवादियों ने कुर्की जब्ती की थी
छोटा भाई विजय उरांव ने बताया कि उसके भाई एतेश्वर की किसी प्रकार का अापराधिक पृष्ठभूमि नहीं रही है. 15 साल पहले भाकपा माओवादियों ने आंजन गांव स्थित घर की कुर्की जब्ती की थी, तब से पूरा परिवार गुमला के करमटोली सरहुल नगर में रह रहा है. सिर्फ राशन बांटने एतेश्वर गांव जाता था. उसने बताया कि एतेश्वर समाज सेवक के रूप में काम करता रहता था.
एरिया कमांडर लजीम पर शक है
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि घटना को एरिया कमांडर लजीम अंसारी ने अंजाम दिया है. अभी इलाके में लजीम सक्रिय है. कुछ लोगों ने उसकी पहचान भी की है. पुलिस को भी लजीम पर शक है.
आंजन शुरू से माओवादी गढ़ रहा
आंजन गांव शुरू से ही माओवादियों का गढ़ रहा है. इस क्षेत्र में अक्सर माओवादी घूमते दिख जाते हैं. हालांकि काफी लंबे अरसे के बाद माओवादियों ने इस इलाके में किसी की हत्या की है.
दहशत पैदा करने की योजना है
सूत्र बताते हैं कि हाल के दिनों में पुलिस दबिश के कारण भाकपा माओवादी बैकफुट में चला गया है. बताया जा रहा है कि क्षेत्र में दहशत पैदा करने के लिए माओवादियों ने डीलर को मारा है, ताकि वे लोग पुन: अपनी खोयी हुई धाक वापस ला सके.
एक थाना के भरोसे काम मुश्किल
गुमला में दो थाना सदर व ग्रामीण होना चाहिए, लेकिन अभी तक सदर से ग्रामीण थाना अलग नहीं हुआ है. यही वजह है कि 20 किमी की दूरी पर कोई अपराध होने पर सदर थाना की पुलिस को परेशानी होती है. अगर अलग से ग्रामीण थाना होता, तो इससे काम करने में आसानी होती.
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