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बेटियों को बिकने से रोकेगा खड़िया समाज

गुमला : गरीबी, बेरोजगारी व पलायन से जूझ रहे आदिवासी बहुल गुमला जिले में खड़िया समाज ने पलायन के खिलाफ मुहिम शुरू की है. झारखंड राज्य में आदिवासी समाज के बीच यह पहली पहल है. समाज ने यह कदम गांव घर की बेटियों को बिकने से बचाने के लिए उठाया है. इतना ही नहीं, गांव […]

गुमला : गरीबी, बेरोजगारी व पलायन से जूझ रहे आदिवासी बहुल गुमला जिले में खड़िया समाज ने पलायन के खिलाफ मुहिम शुरू की है. झारखंड राज्य में आदिवासी समाज के बीच यह पहली पहल है. समाज ने यह कदम गांव घर की बेटियों को बिकने से बचाने के लिए उठाया है.
इतना ही नहीं, गांव घर की जिन बेटियों को दलालों ने दिल्ली में बेच दिया गया है. उन बेटियों को भी वापस लाया जायेगा. खड़िया विकास महिला समिति की जिला उपाध्यक्ष अमृता खड़िया ने कहा कि बेटियों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है. पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है. लेकिन अब खड़िया समाज इसकी शुरुआत कर रहा है. इसमें खड़िया विकास महिला समूह की भूमिका अहम होगी.
पलायन के खिलाफ बैठक हुई : अमृता : कुछ दिन पूर्व खड़िया विकास महिला समिति की बैठक हुई थी. जिसमें पलायन व बेटियों को दिल्ली में ले जाकर बेचने के मुद्दें पर चर्चा हुई थी.
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन लड़कियों को दिल्ली में बेच दिया गया है. उन्हें वापस लाने के लिए अभियान शुरू किया जायेगा. इसके लिए सीडब्ल्यूसी व पुलिस का भी सहयोग लिया जायेगा. वहीं अभी जो लड़कियां स्कूल में पढ़ रही हैं या फिर किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है व गरीब परिवार से हैं. उन घर परिवार की बेटियों को दिल्ली में बिकने से रोकना है.
मेरी बेटी को बचा लीजिए : फगनी : बैठक में ही एक मामला आया. जिसमें बताया गया कि गांव की फगनी कुल्लू की बेटी को छह साल पहले दलाल चामू बड़ाइक ने दिल्ली में बेच दिया है. फगनी की बेटी जसिंता अब कहां है. किसी को मालूम नहीं है. इसकी जानकारी जब अमृता खड़िया को हुई,तो वे फगनी को लेकर सीडब्ल्यूसी के समक्ष जसिंता को बेचने की शिकायत की है.
कई लड़कियां पलायन की शिकार
खड़िया समाज की कई बेटियां पलायन की शिकार हुई हैं. इसके मामले सीडब्ल्यूसी व आहतू थाने में है. गरीबी व बेरोजगारी के कारण सभी लड़कियां बहकावे में आकर दिल्ली चली गयी. पर अब उनका पता नहीं है. गत दिनों समाज के ही एक बेड़ी नेता की भगिनी को दिल्ली में बिकने से बचाया गया था.
खड़िया समाज ने जो कदम उठाया है. वह सराहनीय है. इससे निश्चित रूप से पलायन पर अंकुश लगेगा. दूसरे समाज के लोग भी इसी प्रकार की पहल करें. जिससे नाबालिग बेटियों को दलालों से बचाया जा सके.
संजय भगत
सदस्य सीडब्ल्यूसी, गुमला
Prabhat Khabar Digital Desk
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