बॉटम :::: चार युवाओं ने गेंदा उगाया

Updated at :12 Nov 2015 6:54 PM
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बॉटम :::: चार युवाओं ने  गेंदा उगाया

बॉटम :::: चार युवाओं ने गेंदा उगायानगद आमदनी का बेहतर स्रोत है फूल की खेतीफोटो- एलडीजीए-4 खेल में लगे फूल , एलडीजीए-5 बाजार में बिकने को तैयार फूलों की माला, एलडीजीए-6 माला बनाते युवक, एलडीजीए-7 खेती देख कर खुश होता मंटू, एलडीजीए- 17 आधुनिक सिंचाई पद्धति , एलडीजीए-18 बनाया गया अस्थायी कुआं. लोहरदगा. दीपावली के […]

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बॉटम :::: चार युवाओं ने गेंदा उगायानगद आमदनी का बेहतर स्रोत है फूल की खेतीफोटो- एलडीजीए-4 खेल में लगे फूल , एलडीजीए-5 बाजार में बिकने को तैयार फूलों की माला, एलडीजीए-6 माला बनाते युवक, एलडीजीए-7 खेती देख कर खुश होता मंटू, एलडीजीए- 17 आधुनिक सिंचाई पद्धति , एलडीजीए-18 बनाया गया अस्थायी कुआं. लोहरदगा. दीपावली के मौके पर पूरे जिले में फूलों की खुशबू फैली और ये फूल लोहरदगा शहर के नवाड़ीपाड़ा निवासी चार युवकों के द्वारा तैयार किया गया था. मंटू, सचिन, दीपक व उपेंद्र ने सेन्हा प्रखंड के सिठियो कोयल नदी के किनारे फूलों का उत्पादन किया था. ये युवा अपनी मेहनत के बदौलत बंजर भूमि में हरियाली लायी और यहां फूलों की खेती कर भरपूर उत्पादन किया. युवाओं ने बताया कि उनमें कुछ करने का जज्बा पहले से ही था और कृषि के क्षेत्र में जाने की प्रेरणा उन्हें अपने पूर्वजों से मिली. इनका कहना है कि ये लोग चाहते तो किसी भी सरकारी संस्थान में अच्छी नौकरी कर सकते थे, लेकिन भारत को किसानों का देश कहा जाता है और यहां खेती कर विकास में अपनी भूमिका निभाना उचित समझा. इन युवाओं ने लगभग दस एकड़ जमीन मेढ़ो के आसपास के ग्रामीणों से लीज पर खेती के लिए ली. कुछ दूरी पर स्थित कोयल नदी से पानी लाकर जमीन में एक अस्थायी कुआं का निर्माण किया और वहां से टपक पद्धति से खेतों तक पानी पहुंचाया. कलकत्ता से बीज लाकर पूरे खेत में खीरा, कद्दू, बीन, सेम, गेंदा फूल लगाया. रासायनिक खादों का उपयोग लगभग नहीं के बराबर किया जाता है. आधुनिक तकनीक से खेती की जा रही है. खेतों में उत्पादित सब्जी की बिक्री रांची के बाजारों में होती है. कम खाद में बेहतर पैदावार के चलते इन सब्जीयों की मांग रांची के बाजारों में सबसे ज्यादा है. बताया जाता है कि रांची के ग्राहक इनके सब्जियों का इंतजार करते हैं. बाजार में सब्जी पहुंचते ही चंद मिनटों में ही सारी सब्जियां बिक जाती है. मंटू का कहना है कि अब तक उन्हें इस काम में काफी संतुष्टि मिली है. यहां लगभग 100 ग्रामीणेां को रोजगार भी उपलब्ध हुआ है, जो प्रतिदिन काम करते हैं. बिल्कुल ही आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके से इन युवाओं द्वारा खेती की जा रही है. अभी तक इन लोगों ने किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं ली है. अपने बदौलत ही सबकुछ कर रहे हैं. आसपास के लोग इनकी मेहनत एवं लगन को देख कर इनसे प्रेरणा ले रहे हैं. जिले में कृषि के क्षेत्र में इन चार युवाओं ने एक कृतिमान स्थापित किया है और इनकी सब्जियों की मांग जबरदस्त है. अाधुनिक तकनीक से कर रहे हैं खेतीचारों युवाओं का कहना है कि खेती के लिए जो भी तकनीक है, वह आधुनिक है. इसमें वे लोग कृषि वैज्ञानिकों से भी राय मशविरा करते हैं, लेकिन इन लोगों को नयी तकनीकों की जानकारी भी है. रात हो या दिन ये युवक अपने कर्तव्य के निर्वहन में लगे रहते हैं. यदि इन्हें थोड़ी सरकारी सहायता मिल जाये तो निश्चित रुप से ये युवा और बेहतर करेंगे. इनसे खेती के गुर सिखने आसपास के किसान भी आते हैं. जिन्हे ये लोग जानकारी देते हैं एवं उनकी मदद भी करते हैं.

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