बॉटम :::: खटिया में लाद कर मरीजों को ले जाते हैं स्वास्थ्य केंद्र

Updated at :30 Oct 2015 8:24 PM
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बॉटम ::::  खटिया में लाद कर मरीजों को ले जाते हैं स्वास्थ्य केंद्र

बॉटम :::: खटिया में लाद कर मरीजों को ले जाते हैं स्वास्थ्य केंद्र किनकेल पंचायत का हाल बेहाल, पंचायत चुनाव के पांच साल बाद भी नहीं हुआ विकासफोटो फाइल:30एसआइएम:14-इसी पानी को पीते हैं ग्रामीण,15-गांव का दृश्य,16-पगडंडी जिससे गांव जाते हैं ग्रामीण,17,18,19,20,21,22,23,24-ग्रामीणप्रतिनिधिकेरसई(सिमडेगा). केरसई प्रखंड के किनकेल पंचायत का हाल बेहाल है. पंचायत चुनाव के पांच साल […]

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बॉटम :::: खटिया में लाद कर मरीजों को ले जाते हैं स्वास्थ्य केंद्र किनकेल पंचायत का हाल बेहाल, पंचायत चुनाव के पांच साल बाद भी नहीं हुआ विकासफोटो फाइल:30एसआइएम:14-इसी पानी को पीते हैं ग्रामीण,15-गांव का दृश्य,16-पगडंडी जिससे गांव जाते हैं ग्रामीण,17,18,19,20,21,22,23,24-ग्रामीणप्रतिनिधिकेरसई(सिमडेगा). केरसई प्रखंड के किनकेल पंचायत का हाल बेहाल है. पंचायत चुनाव के पांच साल बीत जाने के बाद भी विकास नहीं हुआ. छिटपुट योजनाओं को यदि दरकिनार कर दें तो इस पंचायत में विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ. पांच हजार 936 जनसंख्यावाले इस पंचायत में चहुंओर बदहाली है. सड़क की स्थिति दयनीय है. स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं है तथा बिजली की संकट मुंह बाये खड़ी है. सिंचाई के लिए एक चेकडैम बनाया गया है, किंतु वह बेकार पड़ा है. कई इंदिरा आवास अधूरे पड़े हैं. बाकीकोना, डोमराबांध, करमटोली, अडोगटोली, भोटकोटोली, पाकरबहार, तुरीटोल आदि टोले के लोग अभी भी ढिबरी युग में जी रहे हैं. उप स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक एएनएम के सहारे चलता है. चिकित्सक कभी नहीं आते. देवी मंडप से ढिंगुरपानी तक चार किलोमीटर तक सड़क की स्थिति ऐसी है कि लोग उस पर पैदल भी नहीं चल सकते. पंचायत में पेयजल की भी गंभीर समस्या है. करमटोली, डोमराबांध, करमटोली, भोटकोटोली, तुरीटोली आदि ऐसी बस्तियां हैं, जहां अब तक एक भी चापानल नहीं लगाया गया है. ग्रामीण चुंआ व नदी का पानी पीने को विवश हैं. कई गांव ऐसे हैं जहां लोग अब भी पगडंडियों के सहारे चलते हैं. किसी के बीमार हो जाने पर खटिया पर लाद कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक लाना पड़ता है. सड़क नहीं होने के कारण वाहन वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं.ग्रामीणों ने कहा कि सपना नहीं हुआ साकारत्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने के बाद पांच साल बीत गये. इस दौरान गांव का विकास हुआ या नहीं. इस विषय पर डोमराबांध निवासी जमुना सिंह का कहना है कि पंचायत चुनाव के बाद काफी उम्मीदें बंधी थी. किंतु सपना साकार नहीं हुआ. करमटोली निवासी पति देवी कहती हैं कि हमारे पंचायत का विकास नहीं हुआ. विकास के नाम पर सिर्फ छलने का काम किया गया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल सहित अन्य समस्याएं बनी हुई हैं. अंबाडीपा निवासी झालो देवी का कहना है कि पंचायत चुनाव के बाद भरोसा हो चला था कि अब हमारे अच्छे दिन आयेंगे. किंतु पांच साल इंतजार में ही कट गये. अब तक हमारे गांव में पेयजल की समस्या दूर नहीं कर सरकार तो अन्य समस्याओं का क्या कहना. बसंती देवी का कहना है कि हमारा किनकेल पंचायत विकास के किरण से कोसों दूर है. कई समस्याएं हैं. विशेष रूप से स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं होने के कारण कई लोगों को असमय ही मौत हो जाती है. गांव में सड़क, पेयजल एवं बिजली की गंभीर समस्या है. पंचायती राज का कोई मतलब ही समझ में नहीं आ रहा है.विकास का प्रयास हुआ है: मुखियाकिनकेल पंचायत के मुखिया अनमोल लकड़ा कहते हैं कि पंचायत के प्रत्येक गांव का विकास करने का प्रयास हुआ है. ग्राम सभा से पारित योजनाओं को संचालित करने का भी प्रयास हुआ है. कहा जितना फंड मिला उसी के आधार पर काम हुआ है. श्री लकड़ा ने यह भी कहा कि पूर्ण अधिकार नहीं मिलने के कारण भी विकास कार्य प्रभावित हुआ है. जब तक पंचायत प्रतिनिधियों को पूर्ण अधिकार नहीं मिलेगा, विकास की गति तेज नहीं हो सकती है.समुचित विकास नहीं हुआ: मनोहरपंचायत चुनाव में मुखिया के पद के लिए दूसरे स्थान पर रहे मनोहर टोप्पो कहते हैं कि पंचायत का समुचित विकास नहीं हुआ. देखते-देखते पांच साल गुजर गये, किंतु विकास नहीं दिखा. पूरा पंचायत मूलभूत समस्याआें से ग्रसित है. विकास के नाम पर सिर्फ लीपापोती की गयी. श्री टोप्पो कहते हैं कि पूरे पंचायत में सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई आदि समस्याएं खड़ी हैं. बॉक्सफैक्ट फाइलप्रखंड -केरसईपंचायत-किनकेलआबादी-5936वार्ड संख्या-12राजस्व ग्राम-तीनपरिवार की संख्या-1156बीपीएल परिवार-696

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