डिलिस्टिंग की मांग पर दिल्ली में हल्ला बोल, गुमला से जनजाति समाज के 518 लोग हो गए हैं रवाना
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 23 May 2026 8:21 PM
दिल्ली रवाना होने से पहले जनजातीय समुदाय के लोग. फोटो: प्रभात खबर
Gumla News: गुमला से 518 आदिवासी समाज के लोग डिलिस्टिंग की मांग को लेकर दिल्ली रवाना हुए हैं. जनजातीय सुरक्षा मंच के बैनर तले आयोजित हुंकार रैली में धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण सूची से बाहर करने की मांग उठाई जाएगी. आंदोलन को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla News: गुमला जिले से डिलिस्टिंग की मांग को लेकर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग दिल्ली रवाना हुए हैं. धर्मांतरित आदिवासियों को आरक्षण सूची से बाहर करने की मांग को लेकर आयोजित राष्ट्रव्यापी हुंकार रैली और धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जिले से कुल 518 लोग दिल्ली के लिए निकले. आदिवासी नेता सुमेश्वर उरांव के नेतृत्व में सिसई प्रखंड से सैकड़ों लोग गगनभेदी नारों के साथ दिल्ली रवाना हुए. यात्रा के दौरान “भोलेनाथ का नहीं, वह मेरे जात का नहीं” जैसे नारे लगाए गए. इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के महिला और पुरुष शामिल रहे.
डिलिस्टिंग आंदोलन को बताया अधिकार की लड़ाई
सुमेश्वर उरांव ने कहा कि जनजातीय समाज को उनकी परंपरा, विशिष्ट पूजा-पद्धति और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर संवैधानिक आरक्षण का लाभ मिला है. लेकिन कुछ लोग धर्म परिवर्तन करने के बाद भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जिससे मूल आदिवासी समाज प्रभावित हो रहा है. उन्होंने कहा कि इसी विसंगति को दूर करने के लिए जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा देशभर में डिलिस्टिंग आंदोलन चलाया जा रहा है. आंदोलन का उद्देश्य धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करना है, ताकि आरक्षण का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंच सके. उनका कहना था कि डिलिस्टिंग कानून लागू होने से जनजातीय समाज की सामाजिक संरचना मजबूत होगी और मूल आदिवासी परंपराओं को संरक्षण मिलेगा.
गांव-गांव तक चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
आदिवासी नेता ने कहा कि आंदोलन को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में उपवास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. साथ ही ग्राम सभाओं के माध्यम से डिलिस्टिंग के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी की जा रही है. सुमेश्वर उरांव ने दावा किया कि दिल्ली में आयोजित होने वाली हुंकार रैली में देशभर से करीब 10 लाख लोग शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि जब तक संसद में डिलिस्टिंग कानून लागू नहीं होता, तब तक सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन जारी रहेगा.
समाज में बढ़ रही कुरीतियों पर जताई चिंता
सुमेश्वर उरांव ने कहा कि मूल आदिवासी परंपराओं से दूर होने के कारण समाज में कई प्रकार की कुरीतियां बढ़ रही हैं और सामुदायिक एकता कमजोर हो रही है. उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की पहचान उसकी संस्कृति, रीति-रिवाज और पारंपरिक आस्था से जुड़ी हुई है. यदि इन मूल्यों का संरक्षण नहीं किया गया, तो समाज की सांस्कृतिक विरासत प्रभावित हो सकती है. उन्होंने कहा कि डिलिस्टिंग आंदोलन केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनजातीय अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का अभियान है.
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बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
दिल्ली रवाना होने के दौरान सुमित महली, विश्व भूषण खड़िया, राजेश उरांव, भैरव सिंह खेरवार, जयराम उरांव, इंद्रपाल भगत, रिचर्डसन एक्का, करिंदर पहान, सुमन कुमारी, सरोज कुमारी, अशोक कुमार भगत, बालेश्वर भगत, कर्मपाल उरांव, सुरेंद्र उरांव, मनोज उरांव, चंद्रदेव उरांव, मनदीप महली, कृष्णा महली, भीखा लोहरा और अन्य कई आदिवासी समाज के लोग मौजूद थे. यात्रा के दौरान लोगों में काफी उत्साह देखा गया. कई लोग पारंपरिक परिधान में भी नजर आए और आंदोलन के समर्थन में नारे लगाते हुए दिल्ली के लिए रवाना हुए.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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