हिंदी व उर्दू शायरी देश की एकता के सूत्रधार हैं

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27 गुम 23 में, कवि सम्मेलन में उपस्थित अतिथि व अन्य.गुमला. मुसलिम युवा मंच ने रविवार की संध्या भारत के प्रसिद्ध शायर जनाब घायल फरीदी के सम्मान में कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया. मुख्य अतिथि कल्याणकारी मानव विकास संस्थान के सचिव अनिरूद्ध चौबे ने कहा कि साहित्य विभिन्न मानसिकता को एक सूत्र में […]

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27 गुम 23 में, कवि सम्मेलन में उपस्थित अतिथि व अन्य.गुमला. मुसलिम युवा मंच ने रविवार की संध्या भारत के प्रसिद्ध शायर जनाब घायल फरीदी के सम्मान में कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया. मुख्य अतिथि कल्याणकारी मानव विकास संस्थान के सचिव अनिरूद्ध चौबे ने कहा कि साहित्य विभिन्न मानसिकता को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है. हिंदी व उर्दू शायरी देश की एकता के सूत्रधार हैं. युवाओं को अपनी शक्ति देश की तरक्की, शिक्षा, गरीबी निवारण आदि में लगाना चाहिए. सम्मेलन में शायर घायल फरीद ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा कि काले धब्बे को मैं रंगीन नहीं कह सकता, एक और चार को मंै तीन नहीं कह सकता, फड़फड़ाना तो परिंदो की है फितरत, लेकिन चील को मैं कभी शाहीन नहीं कह सकता. आफताब अंजुम ने अपना मुशायरा पेश करते हुए कहा कि किसी सोते बच्चे को तुम देख लेना, मेरी झोपड़ी जलाने से पहले… अफरोज सागर ने कहा कि मुझ पे उंगली न उठा अपना गिरेबान भी देख, भाग मत कौए की जानिब तू जरा कान भी देख… मुशायरा प्रस्तुत किया. मौके पर सरफराज कुरैशी, जबीउल्लाह जानी, अध्यक्ष तबरेज खान, सचिव गुलाम मुस्तफा, मो जावेद, मो अफजल सहित कई कवि उपस्थित थे.

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