2025 आशा की तीर्थयात्रा वर्ष है : फादर पिंगल

जुबली क्रूस नवाडीह चर्च पहुंचा, धर्मावलंबियों ने अगरबत्ती जलाकर व पुष्प वर्षा कर पवित्र क्रूस का स्वागत किया गया.
जुबली क्रूस नवाडीह चर्च पहुंचा, धर्मावलंबियों ने अगरबत्ती जलाकर व पुष्प वर्षा कर पवित्र क्रूस का स्वागत किया गया. प्रतिनिधि, डुमरी आशा की तीर्थयात्रा वर्ष के अवसर पर शनिवार को जुबली क्रूस का आगमन नवाडीह चर्च में हुआ. क्रूस के पहुंचने पर पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय हो उठा. नवाडीह क्रूस चौक पर सैकड़ों धर्मावलंबियों ने अगरबत्ती जलाकर व पुष्प वर्षा कर पवित्र क्रूस का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया. स्वागत जुलूस नाचते-गाते हुए श्रद्धा व उत्साह के साथ नवाडीह चर्च तक पहुंचा. जहां चर्च हॉल में धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत रोजरी विनती से की गयी. इसके उपरांत मिस्सा बलिदान किया गया. मुख्य अनुष्ठाता भीजी फादर इमानुएल कुजूर एवं सहयोगी पल्ली पुरोहित फादर पिंगल कुजूर, फादर ब्यातुष किंडो, फादर क्रिस्टोफर डुंगडुंग व डिकन समीर एक्का ने मिस्सा बलिदान कराया. मिस्सा बलिदान के पश्चात श्रद्धालुओं ने पवित्र क्रूस की आराधना की और दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया. इसके बाद क्रूस को परसा चर्च के लिए रवाना किया गया. पल्ली पुरोहित फादर पिंगल कुजूर ने बताया कि हमारे प्रभु यीशु ख्रीस्त के जन्म के दो हजार वर्ष पूर्ण होने की स्मृति में इस वर्ष को आशा की तीर्थयात्रा वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. यह आशा की तीर्थ यात्रा का एक हिस्सा है. जुबली क्रूस को सभी डायोसिस में भेजा गया है. ताकि यह प्रत्येक डायोसिस के पारिस में भ्रमण कर सके. इसका उद्देश्य प्रार्थना, विनती व आस्था के माध्यम से लोगों में आशा और विश्वास का संदेश फैलाना है. उन्होंने कहा कि यह तीर्थयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह हमारे विश्वास को सशक्त करने व समुदाय को एकता के सूत्र में बांधने का प्रतीक है.
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