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गुमला जेल में मच्छरों का प्रकोप, 25 की जगह 70 से 80 बंदी एक ही वार्ड में सोते हैं

Updated at : 09 Jan 2020 10:27 PM (IST)
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गुमला जेल में मच्छरों का प्रकोप, 25 की जगह 70 से 80 बंदी एक ही वार्ड में सोते हैं

– गुमला जेल में किस तरह रहते हैं बंदी, पढ़ें पूरी कहानी दुर्जय पासवान, गुमला गुमला जेल में बाहरी सुरक्षा की कमी है. जेल में बाहरी सुरक्षा के लिए जरूरत से कम पुलिस जवान हैं. इस कारण अक्सर बाहरी सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन चिंतित रहती है. क्योंकि गुमला शहर की घनी आबादी के बीच […]

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– गुमला जेल में किस तरह रहते हैं बंदी, पढ़ें पूरी कहानी

दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला जेल में बाहरी सुरक्षा की कमी है. जेल में बाहरी सुरक्षा के लिए जरूरत से कम पुलिस जवान हैं. इस कारण अक्सर बाहरी सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन चिंतित रहती है. क्योंकि गुमला शहर की घनी आबादी के बीच में जेल है. जेल के चारों ओर सैकड़ों घर हैं. पुलिस की कमी को देखते हुए बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जेल प्रशासन ने गुमला एसपी से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की है. जिससे बाहरी सुरक्षा को मजबूत किया जा सके.

प्रभारी जेलर अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान में जेल में बंदियों के रखने की क्षमता 215 है. जिसमें 200 पुरुष व 15 महिला बंदी को ही जेल में रख सकते हैं. आठ वार्ड हैं. प्रत्येक वार्ड में 25-25 बंदी के सोने की जगह है. परंतु गुमला जेल में क्षमता से तिगुना बंदी हैं. फिलहाल में 671 बंदी है. जिसमें 38 महिला बंदी हैं. महिला बंदियों के साथ चार बच्चे भी हैं. बंदियों की संख्या अधिक होने के कारण हरेक वार्ड में बंदियों को सोने में परेशानी होती है. क्षमता 25 बंदी के सोने की है. परंतु अभी एक वार्ड में 70 से 80 बंदी को सुलाया जाता है.

जेलर ने बताया कि 300 बेड का भवन बन रहा है. नया भवन बनने के बाद बंदियों को रहने व सोने में परेशानी नहीं होगी. उन्होंने यह भी बताया कि गुमला जेल में बंदियों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही थी. इस समस्या को देखते हुए कोर्ट के निर्देश पर करीब 400 बंदियों के रांची होटवार जेल शिफ्ट किया गया है.

प्रभारी जेलर श्री शर्मा ने बताया कि गुमला जेल में जेलर व सहायक जेलर का पद खाली है. वहीं 47 कक्षपाल की जरूरत है. जिसमें 35 कक्षपाल हैं. 12 कक्षपाल की कमी है. इन सब समस्याओं को देखते हुए बाहरी सुरक्षा के लिए गुमला एसपी से अतिरिक्त पुलिस जवान की मांग की गयी है.

जेल में कूड़ा कचरा से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, बंदी परेशान

गुमला जेल में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है. क्योंकि जेल के अंदर से निकलने वाली कूड़ा कचरा को जेल बाहर कैंपस में जमा कर दिया गया है. जेल प्रशासन के अनुसार 12 से 15 ट्रैक्टर कूड़ा कचरा जमा है. जिसे फेंका नहीं गया है. इसके लिए कई बार नगर परिषद से कूड़ा कचरा को साफ करने की मांग की गयी है. परंतु अभी तक कूड़ा कचरा को फेंके नहीं जाने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है.

जेल नियम व सुरक्षा कारणों से बंदियों को मच्छरदानी नहीं दिया जाता है. जिससे बंदियों को मच्छरों से अक्सर खतरा बना रहता है. जेल में अस्पताल भी नहीं है. जिस कारण बंदी बीमार होते हैं तो उन्हें गुमला सदर अस्पताल इलाज के लिए कड़ी निगरानी के बीच ले जाया जाता है. जेल प्रशासन का कहना है कि गुमला जेल में फिलहाल में छह टीवी के रोगी है. जिन्हें जेल के अलग वार्ड में रखा गया है. जेल के कैंपस में नया अस्पताल बन रहा है. अस्पताल बनने के बाद समस्या दूर होगी. फिलहाल में एक डॉक्टर डिपुटेशन में हैं. जबकि एक नर्स व एक कंपाउंडर है.

जेल में 40 से अधिक उग्रवादी बंद हैं

गुमला जिले में भाकपा माओवादी व पीएलएफआई के 40 से अधिक उग्रवादी बंद है. इन सभी पर 17 सीएलए एक्ट के तहत मामला दर्ज है. प्रभारी जेलर अरुण शर्मा ने बताया कि अभी कुछ माह पहले भूषण यादव ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया था तो उसे गुमला जेल लाया गया था. कुछ दिन गुमला जेल में रखने के बाद उसे रांची होटवार जेल शिफ्ट कर दिया गया. बड़े उग्रवादी व नक्सलियों के रखने में यहां परेशानी होती है. इसलिए उन्हें रांची होटवार जेल भेज दिया जाता है.

जेल के अंदर पढ़ रहे चार बच्चे

गुमला जेल में चार महिला बंदी ऐसी हैं, जो अपराधिक मामलों में जेल में बंद हैं. इनके चार बच्चे हैं. ये बच्चे अपनी मां के बिना रहने को तैयार नहीं है. इसलिए जेल प्रशासन ने इन चार बच्चों को जेल के अंदर ही शिक्षा देने की व्यवस्था की है. महिला कक्षपाल या फिर पढ़ी लिखी महिला बंदी ही इन बच्चों को पढ़ाती हैं. जेल प्रशासन के अनुसार पहले एक शिक्षिका की जेल में प्रतिनियुक्ति थी. परंतु शिक्षिका की प्रतिनियुक्ति रद्द कर देने के बाद जेल में कोई शिक्षिका नहीं है. ऐसे जेल प्रशासन ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर एक शिक्षक की मांग की है.

गुमला जेल में ये बदलाव होंगे

गुमला जेल की समस्याओं को दूर करने के लिए यहां कई काम हो रहे हैं. ये काम पूरे होंगे तो जेल में कई बदलाव नजर आयेगा और समस्या दूर होगी. जेल प्रशासन के अनुसार पानी टंकी का निर्माण हो गया है. जिससे जल संकट दूर होगी. 300 बेड का अतिरिक्त भवन बन रहा है. जहां बंदियों को रखा जायेगा. ये भवन बन जायेगा तो आराम से बंदी रह सकते हैं. दो यूनिट का सेल बन गया है. एक यूनिट में आठ बंदियों के रखने की क्षमता है. संभवत: 26 जनवरी को सेल का उदघाटन किया जायेगा. जेल कैंपस में प्रशासनिक भवन का निर्माण किया जा रहा है. अस्पताल जेल के अंदर बन रहा है. इस अस्पताल में सभी प्रकार की सुविधा होगी.

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