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इकलौते बेटे के शव के लिए गिड़गिड़ाती रही मां, अस्‍पताल करता रहा पैसे की मांग, 36 घंटे बाद छोड़ा

Updated at : 19 Oct 2019 9:35 PM (IST)
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इकलौते बेटे के शव के लिए गिड़गिड़ाती रही मां, अस्‍पताल करता रहा पैसे की मांग, 36 घंटे बाद छोड़ा

दुर्जय पासवान, गुमला रांची के एक बड़े अस्पताल ने पैसा नहीं मिलने पर शव को 36 घंटे तक अपने कब्जे में रखा. यहां तक कि शव को उसके परिजनों को देखने तक नहीं दिया गया. जबकि उसकी मां अपने इकलौते पुत्र के शव को देने के लिए अस्पताल प्रबंधन से गिड़गिड़ाते रही. इसके बाद भी […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

रांची के एक बड़े अस्पताल ने पैसा नहीं मिलने पर शव को 36 घंटे तक अपने कब्जे में रखा. यहां तक कि शव को उसके परिजनों को देखने तक नहीं दिया गया. जबकि उसकी मां अपने इकलौते पुत्र के शव को देने के लिए अस्पताल प्रबंधन से गिड़गिड़ाते रही. इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा. अंत में विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव की पहल पर 36 घंटे के बाद शनिवार की सुबह 11 बजे मृत बेटे के शव को अस्पताल ने उसकी मां को सौंपा.

मामला गुमला जिला अंतर्गत बसिया प्रखंड के कोनवीर का है. जानकारी के अनुसार कोनवीर गांव के स्वर्गीय थॉमस आइंद के पुत्र विनय आइंद (25 वर्ष) रविवार को सड़क हादसे में घायल हो गया था. उसे रेफरल अस्पताल बसिया में भर्ती कराया गया था. स्थिति में सुधार नहीं होने पर मंगलवार को मां लुसिया मेरी सुरीन अपने घायल बेटे को इलाज के लिए रांची ले गयी. रांची में एक बड़े अस्पताल में विनय को भर्ती कराया गया.

लुसिया ने अपने बेटे के इलाज के लिए घर में जमा रखे दो लाख 20 हजार रुपये अस्पताल को दे दिये. लेकिन इलाज के क्रम में गुरुवार की शाम को विनय की मौत हो गयी. बेटे की मौत के बाद लुसिया रोने लगी. उसने अस्पताल से अपने बेटे का शव घर ले जाने के लिए मांगा. लेकिन अस्पताल ने कहा कि और एक लाख 62 हजार रुपये और दीजियेगा, तभी शव देंगे.

अस्पताल द्वारा पैसे की मांग की सूचना पर लुसिया परेशान हो गयी. वह गिड़गिड़ाते हुए गरीबी का हवाला देने लगी. परंतु अस्पताल ने शव देने से इंकार कर दिया. शव को देखने तक नहीं दिया जा रहा था. जब इसकी जानकारी सांसद प्रतिनिधि अमर पांडेय को हुई तो उन्होंने इसकी सूचना स्पीकर डॉ दिनेश उरांव को दी. स्पीकर ने अस्पताल प्रबंधन से बात की. अस्पताल अंत में 60 हजार रुपये की मांग करने लगा. परंतु जब स्पीकर द्वारा कहा गया कि वह गरीब परिवार है. अंत में पांच हजार रुपये लेकर अस्पताल प्रबंधन ने शव को उसकी मां को सौंपा.

मां लुसिया ने कहा

मां लुसिया ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक द्वारा पहली किस्त में एक लाख 50 हजार जमा करवाया गया. साथ ही प्रति दिन बेड चार्ज के लिए 20-20 हजार रुपय तीन दिन जमा करवाये गये. ऑपरेशन के लिए 30 हजार और जमा कराया गया. लेकिन इतनी राशि खर्च होने के वावजूद मेरे बेटे की जान नहीं बची. मेरे बेटे के मरने के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा और एक लाख 62 हजार का बिल मृतक की मां को थमा दिया गया. उसने बताया कि स्पीकर की पहल पर 36 घंटे के बाद अंततः अस्पताल प्रबंधन द्वारा पांच हजार लेकर शनिवार की सुबह 11 बजे परिजनों को शव सौंपा गया.

मृतक के पिता फौज में थे

मृतक के पिता थॉमस आइंद फौज से 2004 में सेवानिवृत्त हुए थे. वर्ष 2009 में उनका देहांत हो गया था. उसका दो पुत्री और एक पुत्र था. जिसमें से एक पुत्री रेणुका की मौत हो चुकी है. एक और पुत्री जिसकी शादी हो चुकी है. घर मे मां के साथ विनय ही एक मात्र सहारा था. विनय की मौत के बाद लुसिया मेरी सुरीन पूरी तरह टूट चुकी है.

सांसद प्रतिनिधि ने कहा

सांसद प्रतिनिधि अमर पांडेय ने बताया कि विनय आइंद की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव को ले जाने के लिए मोटी रकम मांगी गयी. किसी तरह इलाज के लिए दो लाख 20 हजार का भुगतान पहले ही कर दिया गया था. मौत के बाद पुनः एक लाख 62 हजार की मांग की गयी. पैसा नहीं देने पर शव देने से इनकार कर दिया गया. इसके बाद परिजन थककर सांसद प्रतिनिधि अमर पांडेय से अपनी आपबीती सुनायी. अमर पांडे ने घटना की पूरी जानकारी स्पीकर दिनेश उरांव को दी. स्पीकर के हस्तक्षेप पर 36 घंटा के बाद शव को परिजनों को सौंपा गया.

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