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दुष्कर्म, बाल विवाह, मानव तस्करी की शिकार 52 पीड़ित बच्चियों का नहीं हो रहा नामांकन

Updated at : 27 Aug 2019 6:32 AM (IST)
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दुष्कर्म, बाल विवाह, मानव तस्करी की शिकार 52 पीड़ित बच्चियों का नहीं हो रहा नामांकन

दुर्जय पासवान गुमला : दुष्कर्म, बाल विवाह, मानव तस्करी की शिकार, अनाथ व गरीबी में जी रही गुमला जिले की 52 लड़कियों का कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में नामांकन नहीं हो रहा है. ये लड़कियां पांच महीने से नामांकन के लिए कस्तूरबा स्कूल, सीडब्ल्यूसी व डालसा कार्यालय का चक्कर लगा रही हैं. शिक्षा विभाग […]

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दुर्जय पासवान
गुमला : दुष्कर्म, बाल विवाह, मानव तस्करी की शिकार, अनाथ व गरीबी में जी रही गुमला जिले की 52 लड़कियों का कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में नामांकन नहीं हो रहा है. ये लड़कियां पांच महीने से नामांकन के लिए कस्तूरबा स्कूल, सीडब्ल्यूसी व डालसा कार्यालय का चक्कर लगा रही हैं. शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण उनका नामांकन नहीं हो पा रहा.
2019 के मार्च व अप्रैल में सीडब्ल्यूसी व डालसा (जिला विधिक प्राधिकार) द्वारा 52 लड़कियों की सूची शिक्षा विभाग को सौंपी गयी थी. सूची में उन लड़कियों का नाम, पता व पिता का नाम अंकित है. साथ ही किस कारण से लड़कियों का कस्तूरबा स्कूल में नामांकन लेना है. इसकी भी जानकारी दी गयी है. इसके बाद भी शिक्षा विभाग इन लड़कियों के नामांकन में देरी कर रहा है.
मैं पढ़ना चाहती हूं, प्रशासन मदद करें : दुष्कर्म की शिकार एक लड़की ने कहा कि वह पांच महीने से कस्तूरबा स्कूल में नामांकन के लिए भटक रही है. मैं अनाथ भी हूं. मैं पढ़ना चाहती हूं. प्रशासन मेरी मदद करें.
पढ़-लिखकर ही मैं अपनी अलग पहचान बना सकती हूं. वहीं अनाथ बच्ची ने कहा कि मेरे माता-पिता नहीं हैं. नामांकन होने पर मैं पढूंगी. जीवन में आगे बढ़ूंगी.
जब सूची आयी है तो नामांकन हो जाना चाहिए था. अगर नामांकन नहीं हुआ है तो मैं इसकी जांच करा लेता हूं. सूची में जिन छात्राओं का नाम है. उनका नामांकन कस्तूरबा स्कूल में जरूर होगा.
सुरेंद्र पांडेय, जिला शिक्षा पदाधिकारी, गुमला
गुमला जिले के 10 प्रखंडों में स्थित 10 कस्तूरबा स्कूलों में नामांकन के लिए 52 लड़कियों की सूची शिक्षा विभाग को दी गयी है. वर्ग छह से वर्ग 11वीं तक में नामांकन लेना है. परंतु एक भी लड़की का नामांकन नहीं हुआ है. डर है कि कहीं दोबारा ये लड़कियां मानव तस्करी का शिकार न हो जाये.
सुषमा देवी, सदस्य, सीडब्ल्यूसी, गुमला
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