6 माह से घर में कैद मंगरा हुआ मुक्त, पुरखों की जमीन बेचने के कारण परिजनों ने कैद में रखा था
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jan 2019 10:50 PM
दुर्जय पासवान, गुमला झारखंड के गुमला जिला स्थित सिसई थाना क्षेत्र के छारदा अंबाटोली गांव के 65 वर्षीय मंगरा उरांव छह माह बाद अपने घर से मुक्त हुए. परिजनों ने उसे छह माह से एक ही कमरे में कैद करके रखा था. बताया जा रहा है कि मंगरा अपने पुरखों की जमीन को कौड़ी के […]
दुर्जय पासवान, गुमला
झारखंड के गुमला जिला स्थित सिसई थाना क्षेत्र के छारदा अंबाटोली गांव के 65 वर्षीय मंगरा उरांव छह माह बाद अपने घर से मुक्त हुए. परिजनों ने उसे छह माह से एक ही कमरे में कैद करके रखा था. बताया जा रहा है कि मंगरा अपने पुरखों की जमीन को कौड़ी के भाव बेच रहा था. साथ ही कुछ लोग शराब पीलाकर जमीन को अपने नाम करवा रहे थे. इसलिए परिजनों ने पुरखों की जमीन को बचाने के लिए मंगरा को एक कमरे में बंद करके रखा था.
इधर, जब इसकी जानकारी बीडीओ मनोरंजन कुमार को हुई तो वे पुलिस बल के साथ गांव गये. इसके बाद मंगरा को उसके ही घर से मुक्त कराया. चूंकि छह महीने तक एक ही कमरे में कैद रहने के कारण मंगरा की स्थिति नाजुक हो गयी थी. उसे प्रशासन ने अस्पताल में भरती कराया है. जहां उसका इलाज किया जा रहा है.
जानकारी के अनुसार बहू पचोला देवी व पुत्र राजपाल उरांव पिछले छह माह से मंगरा को अपने घर में ही कैद कर रखे हुए थे. जब इसकी जानकारी छारदा पंचायत के पूर्व मुखिया दिलीप पहान को हुई तो उन्होंने सोमवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोरंजन कुमार को फोन पर सूचना दी. उसके बाद बीडीओ हरकत में आये और तुरंत थाना से फोर्स व एंबुलेंस लेकर मंगरा उरांव के घर पहुंचे और उसे कैद से बाहर निकाल कर प्राथमिक उपचार के लिए रेफरल अस्पताल सिसई लाया गया.
बीडीओ ने अपनी उपस्थिति में डॉक्टर अनुपम किशोर से पीड़ित के स्वास्थ्य की जांच करायी. स्थिति को देखते हुए मंगरा को अस्पताल में रखा गया है. बहू पचोला देवी ने बताया कि गांव के ही बनु उरांव, छोटकू उरांव, अशोक उरांव व धनु उरांव द्वारा हमारे ससुर को 100-200 रुपये देकर एवं दारू पीलाकर उनका जमीन हड़पने का काम करने का प्रयास किया जाता रहा है.
हमारे पुरखों की जमीन को इन चारों द्वारा डराकर पहले ही हड़प लिया गया है. हमें कमजोर पाकर मेरे ससुर से जबरदस्ती बचे. जमीन को भी इन लोगों के द्वारा हड़पने का प्रयास किया जाने लगा था. जिसकी जानकारी हमें गांव के कुछ लोगों से मिली. मेरे ससुर काफी वृद्ध हो चले हैं और उनका बुद्धि भी पहले जैसा नहीं है. गांव के चारों लोग उनका जमीन को हड़पना चाह रहे हैं. जमीन बचाने के लिए ससुर को घर के अंदर ही रखा जाता था.
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