गुमला : रेप पीड़िता को मिला न्याय, आरोपी को उम्रकैद, लेकिन पीड़िता के बेटे को नहीं मिला पिता का नाम

Updated at : 27 Aug 2018 10:44 PM (IST)
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गुमला : रेप पीड़िता को मिला न्याय, आरोपी को उम्रकैद, लेकिन पीड़िता के बेटे को नहीं मिला पिता का नाम

दुर्जय पासवान, गुमला गुमला में रेप पीड़िता को न्याय मिल गया. जज द्वारा रेप के आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी. लेकिन इस रेप कांड के बाद जन्मे बच्चे को न्याय नहीं मिल पाया. अभी भी बच्चा अपने पिता के नाम से वंचित है. जबकि बच्चे की उम्र अब छह साल हो गयी है. […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला में रेप पीड़िता को न्याय मिल गया. जज द्वारा रेप के आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी. लेकिन इस रेप कांड के बाद जन्मे बच्चे को न्याय नहीं मिल पाया. अभी भी बच्चा अपने पिता के नाम से वंचित है. जबकि बच्चे की उम्र अब छह साल हो गयी है. यहां बता दें कि गुमला के एडीजे-वन की अदालत ने सोमवार को नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के मामले में घाघरा ब्लॉक के गम्हरिया गांव निवासी रविंद्र उरांव उर्फ रवि को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनायी है.

आठ साल पहले जब पीड़िता से रेप हुआ था तो पीड़िता ने गुमला कोर्ट में रविंद्र उरांव के खिलाफ परिवाद दायर किया था. जिसके आलोक में घाघरा थाना में रविंद्र उरांव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी. घटना के समय पीड़िता 16 साल की थी. सोमवार को जज ने आरोपी रविंद्र उरांव को धारा 376 के तहत आजीवन सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त सजा भुगतना पड़ सकता है. जबकि धारा 313 के तहत 10 साल सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. जुर्माना की राशि नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त सजा भुगतना पड़ सकता है.

जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में पीड़िता होली के दूसरे दिन कपड़ा धोने नदी गयी थी. जिस दौरान रविंद्र, पीड़िता को डरा धमका कर झाड़ी में ले गया. वहां जबरन उसके साथ दुष्कर्म किया. जिसके बाद पीड़िता की मानसिक स्थिति खराब रहने लगी. इसके बाद आरोपी रविंद्र उरांव मौका पाकर पीड़िता को उसके घर या अपने घर ले जाकर दुष्कर्म करता था. इस बीच पीडि़ता वर्ष 2009 में गर्भवती हो गयी. इसकी जानकारी मिलते ही रविंद्र ने धोखे से पीड़िता को दूध में दवा मिलाकर गर्भपात करवा दिया. इस दौरान वह शादी का वादा कर बराबर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता रहा.

इस बीच पीड़िता वर्ष 2011 में एक बार फिर गर्भवती हो गयी. उस समय भी रविंद्र गर्भपात करवाना चाह रहा था. पीड़िता ने इसका विरोध किया और शादी करने की बात कही. इसके बाद गांव में पंचायती हुई. जिसमें रविंद्र उरांव ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और शादी करने को तैयार हो गया. पर कुछ दिनों के बाद वो शादी करने से इंकार करने लगा. इसके बाद पीड़िता ने कोर्ट का सहारा लिया. इस मामले में सरकारी पक्ष की ओर से लोक अभियोजक मीनी लकड़ा पैरवी कर रही थीं. पीड़िता की पुनर्वास की जरूरत को देखते हुए धारा 357 ए के तहत तीन लाख रूपये देने की अनुशंसा जिला विधक सेवा प्राधिकार सचिव की ओर से किया गया है.

बच्चे को नहीं मिल पाया न्याय

पीड़िता के गर्भपात कराने के बाद आरोपी रविंद्र ने दुबारा दुष्कर्म किया था. इस बार पीड़िता ने गर्भपात कराने से मना कर दिया था. जिसके बाद वर्ष 2012 में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया. जिसकी उम्र करीब छह साल है. बच्चे को भी अपने पिता का नाम नहीं मिल पाया है. आरोपी रविंद्र उरांव ने दूसरी लड़की के साथ विवाह भी कर लिया है.

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