हाल आंगनबाड़ी केंद्र का : एक साल में पांच लोगों की हत्या हुई, फिर भी केंद्र की शुरुआत नहीं हुई

Published at :13 Sep 2017 11:26 AM (IST)
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हाल आंगनबाड़ी केंद्र का : एक साल में पांच लोगों की हत्या हुई, फिर भी केंद्र की शुरुआत नहीं हुई

गुमला: पालकोट प्रखंड के कोलेंग पंचायत में कुलबीर गांव है. एक समय था, इस क्षेत्र में उग्रवाद था. यह गांव चारों ओर जंगल व पहाड़ से घिरा है. यह गांव वर्ष 2012 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब एक साल के अंदर पांच लोगों की हत्या हो गयी थी. गांव में आये दिन […]

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गुमला: पालकोट प्रखंड के कोलेंग पंचायत में कुलबीर गांव है. एक समय था, इस क्षेत्र में उग्रवाद था. यह गांव चारों ओर जंगल व पहाड़ से घिरा है. यह गांव वर्ष 2012 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब एक साल के अंदर पांच लोगों की हत्या हो गयी थी. गांव में आये दिन मारपीट की घटना होने लगी. इन हत्याओं का कारण आंगनबाड़ी केंद्र बना.

आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बनाने के लिए ठेकेदारी व सेविका चुनाव के विवाद ने पूरे गांव को अशांत कर दिया था. एक-एक कर पांच लोगों की जान चली गयी. आज भी गांव के लोग 2012 की घटना को याद कर सिहर जाते हैं. लेकिन दुर्भाग्य है, पांच लोगों की मौत का कारण बनने वाला आंगनबाड़ी केंद्र आज बेकार पड़ा है. छह वर्षों से केंद्र बंद है. अब जब गांव में शांति है, लोग मिल जुल कर रहने लगे हैं. सभी चाहते हैं आंगनबाड़ी केंद्र शुरू हो. उसमें बच्चे पढ़ने जायें. आंगनबाड़ी केंद्र को शुरू करने की मांग लगातार लोग कर रहे हैं, लेकिन उग्रवाद क्षेत्र का बहाना बना कर प्रशासन आंगनबाड़ी केंद्र का चालू करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है.

इन लोगों की हत्या हुई थी
कुलबीर गांव के अनिल साहू ने बताया कि गांव में अखिलेश्वर साहू, चैतु खड़िया, शनिचर खड़िया, जगरनाथ टाना भगत व राम खड़िया की हत्या हुई थी. इसके अलावा मारपीट की भी घटना में कई लोग घायल हुए हैं. लालधारी सिंह पर गोली चलायी गयी थी, जिससे वह घायल हुआ था. विनास सिंह भी घायल हुआ था. इन सब घटनाओं का कारण आंगनबाड़ी केंद्र का विवाद था. लेकिन यह 2012 की कहानी है. अब लोग पुरानी बात भूल कर आंगनबाड़ी केंद्र को चालू करना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा है. अगर केंद्र चालू हो जाता है, तो बच्चे दिनभर खेलने कूदने की बजाय केंद्र में जाकर पढ़ाई कर लेंगे. उन्हें पौष्टिक आहार भी मिलेगा.
कुलबीर सुविधाओं से महरूम है
कुलबीर गांव में 60 घर है. यह गांव पूरी तरह उपेक्षित है. आज भी इस गांव के लोग सरकारी सुविधाओं से महरूम हैं. इस गांव में 40 से 45 बच्चे हैं. आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहने के कारण बच्चे दिनभर अपने माता-पिता के साथ खेत व जंगलों में घूमते रहते हैं या फिर खेलते-कूदते रहते हैं. अगर केंद्र शुरू होता है, तो इन बच्चों को शिक्षा मिल सकेगी.
गांव में अक्सर डायरिया फैलता है
कुलबीर गांव पालकोट, गुमला व रायडीह प्रखंड की सीमा पर है. यह गांव चारों ओर नदियों से घिरा है. इन नदियों में पुल नहीं है. बरसात में लोग नदी से होकर गुजरते हैं. गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं है. अक्सर गांव में डायरिया फैलता है. 2016 में डायरिया से छेदी देवी की मौत हो गयी थी. कई लोग पीड़ित भी थे. सभी को खटिया पर सुला कर नदी पार कर मुख्य सड़क तक लाये थे. इसके बाद अस्पताल लाकर लोगों की जान बचायी गयी थी. गांव के लोगों ने नदी में पुल बनाने की मांग की है.
कुलबीर में विवाद के बाद लगातार हुई हत्या के कारण आंगनबाड़ी केंद्र शुरू नहीं हो सका. दूसरा कारण सीडीपीओ द्वारा सेविका चयन में गड़बड़ी की गयी है. छह साल से केंद्र बंद है. मैं प्रयास करूंगी कि केंद्र चालू हो जाये.
सुषमा केरकेट्टा, मुखिया, कोलेंग पंचायत
कुलबीर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र क्यों बंद है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है. पहले मामले की जांच कर लूंगा. इसके बाद ही कुछ कह सकता हूं.
अमित बेसरा, बीडीओ, पालकोट प्रखंड
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