साप्तािहक हाट: टैक्स वसूली लाखों में, नगण्य हैं सुविधाएं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Aug 2017 11:53 AM (IST)
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गुमला : गुमला शहर का साप्ताहिक हाट (बाजार) एक ऐसा हाट है, जहां से राजस्व के रूप में प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की वसूली होती है. यहां प्रत्येक सप्ताह दो बार हाट लगता है. शनिवार को छोटा और मंगलवार को बड़ा हाट लगता है. प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हाट में सब्जी, कपड़ा, जूता-चप्पल, मशाला, […]
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गुमला : गुमला शहर का साप्ताहिक हाट (बाजार) एक ऐसा हाट है, जहां से राजस्व के रूप में प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की वसूली होती है. यहां प्रत्येक सप्ताह दो बार हाट लगता है. शनिवार को छोटा और मंगलवार को बड़ा हाट लगता है. प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हाट में सब्जी, कपड़ा, जूता-चप्पल, मशाला, मीट-मुर्गा व मछली सहित घरेलू उपयोग की कई वस्तुओं की दुकान सजती है. जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग हाट में अपनी दुकानदारी चलाते हैं.
वहीं इसी हाट से प्रत्येक वर्ष सरकार को लाखों रुपये का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है, लेकिन हाट में दुकानदारी व खरीदारी करने वालों के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं है. अभी बरसात का मौसम है. इस मौसम में हाट में दुकानदारी करने वाले दुकानदारों को भारी परेशानी हो रही है. परेशानी का मुख्य कारण हाट से बरसाती पानी की निकासी और पेयजल की सुविधा नहीं है. वहीं हाट के साफ-सफाई की कोई व्यवस्था भी नहीं है. भारी मात्रा में जहां-तहां कचरा पड़ा हुआ है. बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण जहां-तहां जलजमाव भी है. हाट की ओर से गुजरने वाले लोग भी अपने नाक पर रूमाल रख कर गुजरने को विवश हैं.
लाखों की लागत से बना है शेड, बेकार : साप्ताहिक हाट में आइएपी योजना के तहत लाखों रुपये की लागत से शेड और कमरानुमा भवन बनाया गया है. निर्माण एजेंसी कृषि उत्पादन बाजार समिति गुमला है. कई शेड अब तक अधूरा है. शेड के नाम पर केवल पीलर खड़ा कर छोड़ दिया गया है. इसी प्रकार जो कमरानुमा भवन बनाया गया है, उसे कई दुकानदारों को किराये पर तो दिया गया है, लेकिन उसमें से कईयों के शटर (दरवाजा) नहीं हैं. बताया गया कि शटर लगाया गया था, लेकिन संभवत: शटर की चोरी हो गयी. वहीं हाट में बने हुए शेड का भी दुकानदारों को कोई फायदा नहीं है. तेज हवा के थपेड़ों के साथ जब बारिश होती है, तो बारिश का पानी सीधे शेड के अंदर गिरता है.
रोजाना लगता है जुआ का अड्डा: साप्ताहिक हाट में रोजाना जुआ का अड्डा लगा रहता है. हाट में लगने वाले मटन, मुर्गा और झाड़ू के दुकान की ओर जुआरियों का अड्डा लगा रहता है. कोई ताश खेलता रहता है, तो कोई मोबाइल में गेम. प्रत्येक गेम में 100 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का दाव लगता है. हालांकि कई बार जुआरियों को वहां से खदेड़ा भी गया है, लेकिन जुआरी बाज नहीं आ रहे.
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