सावन का पवित्र माह आज से शुरू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Jul 2017 12:18 PM (IST)
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गुमला : घाघरा प्रखंड से तीन किमी दूर केराझारिया नदी के तट पर देवाकी बाबाधाम मंदिर स्थित है. यह धार्मिक स्थल के रुप में विख्यात है. यहां अति प्राचीन शिव मंदिर है. इस मंदिर से हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है. श्रवण माह में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. कई जिले से श्रद्धालु […]
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गुमला : घाघरा प्रखंड से तीन किमी दूर केराझारिया नदी के तट पर देवाकी बाबाधाम मंदिर स्थित है. यह धार्मिक स्थल के रुप में विख्यात है. यहां अति प्राचीन शिव मंदिर है. इस मंदिर से हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है. श्रवण माह में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है. कई जिले से श्रद्धालु यहां आते हैं.
बाबाधाम मंदिर लगभग तीन एकड़ भू भाग में फैला है. मंदिर के चारों ओर हरा-भरा बगीचा है. यहां दूर-दूर से लोग आते हैं. यह घाघरा व नेतरहाट के मुख्य पथ के ठीक किनारे है. इस कारण यहां आसानी से पहुंच सकते हैं. सुबह छह से शाम छह बजे तक वाहनों का परिचालन होता है. रात को बॉक्साइट ट्रक भी इसी रोड से होकर बिशुनपुर व नेतरहाट जाते हैं. यहां श्रवण व महाशिवरात्री में भक्तों की भीड़ लगी रहती है.
अन्य समय में भी यहां लोग आते रहते हैं. मंदिर व आसपास के वातावरण तथा खूबसूरत वादियों की चर्चा दूर-दूर तक है. यहां नववर्ष में गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पलामू, लातेहार, रांची व खूंटी सहित छत्तीसगढ़ राज्य से भी सैलानी आते हैं. जनश्रुति के अनुसार महाभारत काल में पांडव के अज्ञातवास के समय भगवान श्रीकृष्ण ने पांच शिवलिंग की स्थापना की थी. इसमें से एक शिवलिंग देवाकीधाम में है. इसलिए इस स्थल का नाम श्रीकृष्ण की मां देवकी के नाम पर देवाकीधाम पड़ा. पांडवों के अज्ञातवास की समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने देवाकीधाम में ही शंख बजाये थे.
देवाकीधाम एक नजर में : देवाकीधाम घाघरा प्रखंड से तीन, गुमला शहर से 28, लोहरदगा से 28, सिमडेगा से 105 व रांची से 105 किमी दूर है. यहां बाबा भोलेनाथ का मंदिर, अदभुत प्राकृतिक छटा, केराझरिया नदी के तट पर बहती जलधारा व नदी पर बनी सीढ़ी. यहां किसी भी वाहन से जा सकते हैं. ठहरने की व्यवस्था नहीं है. गुमला में ठहर सकते हैं.
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