प्रत्येक वर्ष मेले के नाम पर लाखों रुपये की राजस्व की होती है उगाही

Updated at : 03 Apr 2025 11:37 PM (IST)
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प्रत्येक वर्ष मेले के नाम पर लाखों रुपये की राजस्व की होती है उगाही

स्थाई रूप से नहीं हो पाया अब तक तालाब की साफ-सफाई

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ऐतिहासिक तालाब किनारे लगने वाला 14 अप्रैल को बिसुआ मेला महज 10 दिन दूर है. मेला का दिन ज्यों-ज्यों करीब आता दिखाई दे रहा है, क्षेत्र के लोगों में तालाब की साफ-सफाई को लेकर प्रशासन के प्रति असंतोष गहराता जा रहा है. आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने आपस में चर्चा भी करना शुरू कर दिया है कि कई दशकों से प्रत्येक वर्ष मेले के नाम पर प्रशासन द्वारा लाखों रुपये राजस्व की उगाही की जाती है. इसके बावजूद आज तक स्थाई रूप से तालाब की साफ-सफाई नहीं हो सकी है. वहीं प्रशासन द्वारा स्थाई रूप से तालाब की साफ-सफाई के लिए ठोस कदम उठाने का प्रयास भी नहीं किया गया है.

तालाब से जुड़ी है कई ऐतिहासिक मान्यता

बातों-बातों में जब कभी बसंतराय के तालाब की चर्चा होती है, तो तरह-तरह की बातें निकल कर सामने आती है. इनमें से राजा मानसिंह की कहानी काफी चर्चित है. बुजुर्गों का कहना है कि पुराने समय में मानसिंह नामक एक राजा थे. उन्होंने ही अपनी बेटी के लिए इस तालाब का निर्माण कराया था. हालांकि करीब 52 एकड़ में फैला यह तालाब वर्तमान समय में अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण का शिकार हो चुका है. समय-समय पर स्थानीय समाजसेवी संगठनों द्वारा तालाब का सौंदर्यीकरण को लेकर आवाज उठायी जाती है, लेकिन तालाब के सौंदर्यीकरण को लेकर सरकार की तरफ से कोई बेहतर ठोस पहल नहीं की जा रही है. सरकार द्वारा करोड़ों की राशि खर्च की गयी, लेकिन सिर्फ पैसों का बंदरबांट हुआ है. इस कारण यह तालाब आज की तारीख में अपना अस्तित्व खोता नजर आ रहा है.

ऐतिहासिक तालाब की मशहूर है कुछ विशेषताएं

ऐतिहासिक तालाब को धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कुछ चर्चित विशेषताएं भी काफी मशहूर है. लोगों का मानना है कि इस तालाब में स्नान करने से कई प्रकार के चर्म रोग भी ठीक हो जाया करते हैं. हालांकि वर्तमान समय में तालाब का पानी साफ-सफाई के अभाव में गंदगी का शिकार है. आस्था और श्रद्धा के कारण गंदे पानी में भी आदिवासी समाज से संबंध रखने वाले सफाहोड़ के अनुआई हजारों की संख्या में तालाब में आस्था की डुबकी लगाते हैं और पानी में खड़े रहकर पूजा-अर्चना कर दीक्षा प्राप्त करते हैं. प्रशासन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए स्थानीय समाजसेवी बरूण यादव, भारत पंडित, कैलाश पंडित ने तालाब की साफ-सफाई का बीड़ा उठाया है, जिसकी शुरुआत गुरुवार से ही कर दी गयी है.

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