शिक्षकेतर कर्मियों के हड़ताल का असर पठन-पाठन पर, कॉलेज की तालाबंदी से बढ़ी परेशानी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 Jan 2025 11:27 PM
अब तक शिक्षकेत्तर कर्मियों की मांगें नहीं हो सकी पूरी, छात्रों ने कॉलेज पहुंचकर कर्मियों से की बातचीत
सिकामु विवि के अंदर पड़ने वाले कॉलेजाें में काम करने वाले शिक्षकेतर कर्मियों की हड़ताल व कॉलेज में तालाबंदी से पठन-पाठन एकदम प्रभावित हो गया है. कॉलेज में बीते नौ दिसंबर से तालाबंदी कर दी गयी है. हालांकि कर्मियों की हड़ताल 26 नवंबर से थी, लेकिन परीक्षा के समापन के बाद कॉलेज में शिक्षकेतर कर्मियों ने पूर्ण रूप से तालाबंदी कर दी. इसके बाद से कॉलेज में पठन-पाठन बंद हो गया है. इस कारण से छात्रों का पठन-पाठन प्रभावित हो गया है. किसी भी वर्ग का संचालन नहीं हो पा रहा है. ऐसे में छात्रों ने भी दूसरी ओर मोर्चा खोल दिया है. शुक्रवार को कुछ छात्र हड़ताली शिक्षकेतर कर्मियों से मिलने गये और अपनी बातों को रखा. छात्रों ने बताया कि उनका भविष्य खतरे में है. छात्रों ने इस मामले में अपना विरोध जताया है.
छात्र बोले, हड़ताल के कारण बाधित हो रही पढ़ाई
छात्रों ने कहा कि विश्व विद्यालय के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लगातार हमारा क्लास बाधित हो रहा है और परीक्षा में भी देरी हो रही है. सभी छात्र बॉटनी और फिजिक्स ऑनर्स डिपार्टमेंट के थे. यूजी सेमेस्टर टू के छात्र आयुष कुमार ने कहा कि कॉलेज व विवि के चक्कर में छात्रों का भविष्य पीसा जा रहा है. विवि कहता है मामला संज्ञान में है, लेकिन सातवें वेतन का लाभ देना उनके क्षेत्राधिकार में नहीं है. वहीं हड़ताल के सवाल पर बात करते हैं, तो कर्मी विवि जाने को बोलते हैं. ऐसे में तो छात्रों का भविष्य अंधकार में हैं. आयुष ने कहा कि वे लोग स्नातक के लिए 2022 से 2026 सत्र में दाखिला करवाया है और 2025 की शुरुआत हो गयी है. अभी तक हमारा सिर्फ दो ही सेमेस्टर का परीक्षा हुआ है. बताया कि ऑनलाइन क्लास करवाया जा रहा है, लेकिन हमलोग रसायन और बॉटनी के छात्र हैं. हमारे सिलेबस में 100 नंबर का प्रैक्टिकल होता है, तो हम ऑनलाइन क्लास में क्या पढ़ेंगे. वहीं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने कहा कि वे लोग छात्रों की इस परेशानी को समझ रहे हैं. लेकिन वे लोग भी विवश हैं. उनकी मांगों को सुनने वाला कोई नहीं है. सबों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिल गया है. वे अपनी मांगों को लेकर केवल आश्वासन की घूंट पी रहे हैं. इसलिए तालाबंदी को लेकर वे भी मजबूर हैं.
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