केरल में मजदूर राजीव हांसदा की मौत, शव लाने में परिवार ने खर्च किए 1.67 लाख रुपये

शोकाकुल परिजन
केरल में मजदूरी करने गए गोड्डा के राजीव हांसदा की मौत के बाद शव घर लाने में परिवार को 1.67 लाख रुपये खर्च करने पड़े, जिससे परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र के कारूडीह गांव निवासी 25 वर्षीय मजदूर राजीव हांसदा की केरल के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी. सोमवार को घटना की सूचना गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गयी. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. वहीं केरल से एंबुलेंस के माध्यम से शव गांव लाने में करीब 1.67 लाख रुपये खर्च हुए, जिससे परिवार पर आर्थिक संकट और गहरा गया है. मृतक के बड़े भाई सोनेल हांसदा ने बताया कि मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में काम नहीं मिलने के कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए राजीव करीब डेढ़ माह पहले मजदूरी करने केरल गया था. वह अविवाहित था और मजदूरी कर परिवार की आर्थिक मदद कर रहा था. उन्होंने बताया कि रविवार को राजीव से मोबाइल पर बातचीत हुई थी. उस दौरान उसने सर्दी, खांसी और बुखार होने की जानकारी दी थी तथा दवा लेने की बात कही थी. लेकिन सोमवार को अचानक उसकी मौत की सूचना मिली. परिजनों के अनुसार, केरल के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हुई. हालांकि मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. परिजनों का अनुमान है कि तेज बुखार के कारण उसकी तबीयत बिगड़ गयी होगी.
शव लाने में खर्च हुए 1.67 लाख रुपये
मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने शव को गांव लाने की व्यवस्था की. केरल से एंबुलेंस के माध्यम से शव कारूडीह लाया गया, जिस पर लगभग 1,67,700 रुपये खर्च हुए. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को इस राशि की व्यवस्था करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. गांव पहुंचते ही एंबुलेंस से शव उतरते ही परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गयी. मां तथा छोटे भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पूरे गांव में शोक का माहौल है. ग्रामीणों ने बताया कि राजीव मेहनती और मिलनसार युवक था. परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के कारण वह रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्य गया था. अब उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुआवजे की उठायी मांग
घटना की जानकारी मिलने पर कांग्रेस कार्यकर्ता विजय ठाकुर, राजेश किस्कू सहित अन्य लोग कारूडीह पहुंचे और शोकाकुल परिवार से मिलकर सांत्वना दी. उन्होंने पूरी घटना की जानकारी पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव को भी दी. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विधायक से मृतक के परिजनों को सरकारी मुआवजा एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की. साथ ही उन्होंने अन्य राज्यों में कार्यरत झारखंड के मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच और कल्याण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की.
अंतिम संस्कार के लिए परिवार को लेना पड़ा कर्ज
रोजगार की तलाश में केरल गये गोड्डा जिले के राजीव की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बेहतर आजीविका की उम्मीद लेकर घर से निकले राजीव की मेहनत का सपना अधूरा रह गया और वह मात्र दो माह बाद शव बनकर अपने गांव लौटे. परिजनों के अनुसार, राजीव ने केरल में दो माह के दौरान मजदूरी कर लगभग 30 से 40 हजार रुपये ही कमाये थे. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो पाया. उनकी असामयिक मौत के बाद सबसे बड़ी चुनौती उनके शव को गांव तक लाने की थी. आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिजनों को इसके लिए कर्ज लेना पड़ा, ताकि वे अपने बेटे का अंतिम दर्शन कर सकें और पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर सकें. राजीव की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक दयनीय हो गयी है. स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि परिवार को आर्थिक मुआवजा देने के साथ-साथ शव को केरल से गांव तक लाने में हुए खर्च की भी प्रतिपूर्ति की जानी चाहिए, ताकि शोकाकुल परिवार को कुछ राहत मिल सके.
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