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समाजसेवा के लिए अपनी समस्याओं की परवाह नहीं कर रहे बुजुर्ग

सेंकेंड इनिंग. सेवानिवृति के बाद समाज के लिए लगातार कर रहे हैं काम

गोड्डा जिले में ऐसे कई शख्सियत हैं, जो स्वयं को कभी रिटायर या फिर बुजुर्ग नहीं मानते हैं. ऐसे लोग 60 की उम्र पार करने के बावजूद भी युवाओं की तरह काम कर लोगों को कई तरह से सहयोग कर रहे हैं. नौकरी पेशे से जुड़े ऐसे लोग सेवानिवृत हो जाने के बाद भी नये मिजाज के साथ समाज के लिए काम कर रहे हैं. लोगों की समस्या का समाधान करने वाले ऐसे व्यक्तियों से कई तरह का फायदा लोगों को मिल रहा है. सेवानिवृत होने के बाद अपने जुनून में शामिल लोगों की दास्तां पर प्रस्तुत है निरभ किशोर की रिपोर्ट…

सुनील कुमार आनंद : बच्चों को स्वावलंबन बनाने में खुद को किया समर्पित

सुनील कुमार आनंद महागामा के रहने वाले हैं. 31 जनवरी 2024 को राजमहल कोल परियोजना से सेवानिवृत हुए. सेवानिवृत्ति के बाद अपना जीवन बच्चों को स्वावलंबन बनाने और उन्हें शिक्षा के महत्व से जोड़ने के लिए समर्पित कर दिया. श्री आनंद का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वावलंबी व शिक्षा के महत्व से जोड़ना है. बच्चों की पढ़ाई में मदद करने के साथ-साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं में मार्गदर्शन करते आ रहे हैं. श्री आनंद विभिन्न कौशल में प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं. उनके प्रयास का समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. गांव के बच्चे शिक्षा के महत्व को समझने लगे हैं और स्कूल जाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.

कृष्ण चंद्र दत्त : पर्यावरण संरक्षण को लेकर चला रहे हैं जागरूकता अभियान

पोड़ैयाहाट प्रखंड के देवदांड़ गांव के निवासी कृष्ण चंद्र दत्त 2025 को एसएम कॉलेज से प्रधान लिपिक के पद से सेवानिवृत हुए. सेवानिवृत्ति के बाद जीवन को पर्यावरण की बेहतरी में समर्पित कर दिया. प्रखंड के पूर्वी क्षेत्र में पर्यावरण को लेकर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पर्यावरण के बारे में बताने वाले श्री दत्त पौधरोपण कर पर्यावरण को संरक्षित कर रहे हैं. उनका उद्देश्य प्रखंड क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना व लोगों को पर्यावरण के महत्व के बारे में जागरूक करना है. विभिन्न कार्यक्रम व अभियान के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी देते हैं. उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हैं. यह उनके प्रयास में शामिल है.

परमानंद झा : सेवानिवृत कर्मियों के लिए सलाहकार व मददगार साबित

परमानंद झा करीब 85 वर्ष के हैं. 2000 में श्री झा लिपिक पद से सेवानिवृत हुए थे. लिपिकीय संवर्ग में काम कर चुके श्री झा सेवानिवृत के बाद परेशान कर्मचारियों को कानूनी सलाह देकर समस्या से उबारने का काम कर रहे है. हर दिन फाइलों से परेशान व आवश्यक जानकारी को लेकर जब कर्मचारी इनसे सलाह लेते हैं, तो उनकी समस्या का सहज निदान हो जाता है. श्री झा ने इसके अलावा घर के समीप तालाब में सघन पौधरोपण कर पर्यावरण के लिए भी काम किया है. साथ ही उनके द्वारा स्वच्छता पर ध्यान देने के लिए हमेशा सफाई अभियान चलाया जाता है. श्री झा के इस तरह के कार्य से समाज के लोगों को कई प्रेरणा मिल रही है. लोग इन्हें आइडियल मानते हैं.

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