गोड्डा के ऊर्जावान सेवानिवृत बुजुर्गों के प्रयास से समाज में आया बदलाव

Updated at : 02 Apr 2025 11:10 PM (IST)
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गोड्डा के ऊर्जावान सेवानिवृत बुजुर्गों के प्रयास से समाज में आया बदलाव

सेवानिवृत शिक्षकों व राजस्व कर्मचारी ने समाज के लिए किया जीवन समर्पित

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जीवन की दूसरी पारी में भी कार्य करने वालों की कमी नहीं है. उम्र के आखरी पड़ाव में भी कई लोगों ने समाजसेवा में अपना जीवन झोंक दिया है. चाहें कितनी भी कठिनाई से भरा पथ क्यों ना हो, मगर उनकी हिम्मत और भी मजबूत होती रही. ऐसे लोगों की वजह से समाज में एक अलग चेतना जागृत होती है. नयी पीढ़ी को एक प्रेरणा मिलती है. गोड्डा जिले के विभिन्न प्रखंडों में ऐसे कई लोग है, जो दूसरे के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. ऐसे ही समर्पित लोगों पर पेश है रिपोर्ट.

99 वर्ष की उम्र में भी ग्रामीणों को खेती के लिए प्रेरित कर रहे अभयचरण ठाकुर

पथरगगमा प्रखंड के भलसुंधिया गांव के रहने वाले अभय चरण ठाकुर ने अपने जीवनकाल में न केवल अपने गांव के लोगों को खेती के प्रति प्रेरित किया, बल्कि आसपास कई गांव के लोगों को भी प्रेरणा मिल रही है. गांव में 50 प्रतिशत लोग खेती कर अपना जीवन संवार रहे हैं. अभय चरण ठाकुर 1987 में राजस्व कर्मचारी के पद से सेवानिवृत हुए. इसके बाद उन्होंने गांव के लोगों को खेती के प्रति प्रेरित करना आरंभ किया. उन्होंने लोगों को समझाया कि खेती न केवल परिवार के लिए रोजगार का साधन है, बल्कि यह उनके गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना सकती है. आज भले ही अभय चरण ठाकुर की उम्र 99 की है, मगर वे खेती के प्रति अपने जुनून को बनाये हुए है. उनके पास आने वाले लोगों को खेती करने की जानकारी देते हैं. उनका मानना है कि खेती न केवल हमारे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकती है, बल्कि यह हमारे पर्यावरण को भी सुरक्षित रख सकती है.से

वानिवृति के बाद साहित्य साधना की ओर परीक्षित मंडल ने बढ़ाया कदम

परीक्षित मंडल प्रेमी एक सरल व्यक्तित्व के है. जीवनकाल में साहित्य, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उनकी सेवानिवृति के बाद उन्होंने साहित्य साधना की ओर अपना कदम बढ़ाया और कई महत्वपूर्ण पुस्तकें व शोध निबंध प्रकाशित हुआ है. उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘हनुमानजी बंदर नहीं थे’, ‘रासलीला का यथार्थ स्वरूप’, ‘स्वामी गंगेश्वरानंद का काव्य चिंतन’, ‘हिंदी व्याकरण प्रश्नोत्तरी’ आदि शामिल हैं. इसके अलावा, उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन किया है, जिसमें नवप्रकाश व प्रतिविंब शामिल है. परीक्षित मंडल को कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है. अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच झारखंड की ओर से लक्ष्मीनारायण सुधांशु सम्मान और जनार्दन भाई शिक्षण संस्थान बक्सरा, गोड्डा द्वारा झारखंडश्री शामिल है. प्रेमी लोगों को वेद, उपनिषद, वेदांत, स्मृति, रामायण, महाभारत, रामचरितमानस आदि की जानकारी देते हैं.

ज्ञान की ज्योति जला रहे केदार राय, शिक्षा के प्रति समर्पण से बने आदर्श शिक्षक

पोड़ैयाहाट प्रखंड के माधुरी गांव के सेवानिवृत शिक्षक केदारनाथ राय की शख्सियत भी अलग है. 99 वर्ष की उम्र में भी समाज में ज्ञान का दीप जला रहे हैं. शिक्षा के प्रति समर्पण और बच्चों के प्रति प्रेम ने उन्हें एक आदर्श शिक्षक बनाया है. केदारनाथ राय ने अपने शिक्षण कार्य की शुरुआत सर्वोदय हाई स्कूल बक्सरा में किया. उन्होंने कई वर्षों तक शिक्षण कार्य में महत्वपूर्ण योगदान निभाया. उनकी शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के प्रति प्रेम ने उन्हें छात्रों और अभिभावकों के बीच बहुत लोकप्रिय बनाया. सेवानिवृति के बाद गांव के बच्चों को पढ़ने का कार्य करते रहे हैं. बच्चों को निशुल्क शिक्षा के साथ शिक्षा के लिए आवश्यक सामग्री भी प्रदान किया. पहल ने कई गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया. श्री राय समाज के लिए बड़ी प्रेरणा स्रोत हैं. समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है. उनकी इस पहल ने कई लोगों को प्रेरित किया है.

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