शिक्षा में नैतिक मूल्यों की गिरावट चिंता का विषय
Published by : SANJEET KUMAR Updated At : 04 Sep 2025 11:30 PM
शिक्षकों की भूमिका पर उठ रहे सवाल, शिक्षा सेवा नहीं अब बन गया है व्यवसाय
आधुनिकता के इस दौर में शिक्षा की दिशा और दशा पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है. वर्तमान समय में देश में बढ़ती अराजकता के लिए कहीं न कहीं हमारी शैक्षणिक व्यवस्था भी जिम्मेदार है. शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह नैतिक और सामाजिक मूल्यों की नींव है, जो व्यक्ति को एक अच्छा नागरिक बनाती है. पहले विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दिये जाते थे, जिससे उनमें समाज के प्रति जिम्मेदारी और नैतिकता का भाव पैदा होता था. परंतु आज स्थिति चिंताजनक है. कई विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति आम बात हो गयी है, वहीं बुनियादी ढांचे की हालत भी दयनीय है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब महंगी हो चली है, जो आम वर्ग के लिए एक सपना बन गयी है. इसका परिणाम यह है कि बड़ी संख्या में बच्चे उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने भविष्य से भटक जाते हैं. कुछ स्थानों पर तो शिक्षक नकल को बढ़ावा देने लगे हैं, जिससे उनके प्रति बच्चों का आदर खत्म हो गया है और उनकी छवि एक व्यवसायी जैसी बन गयी है. आज शिक्षा सेवाभाव से हटकर एक मुनाफाखोरी का साधन बनती जा रही है. जबकि शिक्षक की भूमिका तो समाज निर्माण की नींव होती है. देश में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है तो केवल उन्हें सही मार्गदर्शन और प्रेरणा देने की. शिक्षकों को फिर से आदर्श बनकर बच्चों के जीवन में प्रेरणास्रोत बनने की आवश्यकता है.
कैसा हो शिक्षक दिवस
सरकार और समाज को शिक्षकों को केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि देश के पायलट की तरह सम्मान देना चाहिए. तभी शिक्षक दिवस की सार्थकता होगी और देश का समग्र विकास संभव हो सकेगा.-डॉ. रवि रंजन, सहायक शिक्षक, मध्य विद्यालय भारतीकित्ता
शिक्षक दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि शिक्षक हमारे जीवन को दिशा देने वाले मार्गदर्शक हैं. वे बच्चों के चरित्र निर्माण व समाज की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं.– राजीव कुमार, सहायक शिक्षक, 2 उच्च विद्यालय, जमनी पहाड़पुर
शिक्षा वह माध्यम है, जिससे न केवल जीवन बदला जा सकता है, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा दी जा सकती है. शिक्षक दिवस पर छात्र अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त कर उनके योगदान को स्मरण करते हैं.– ज्योति भारती, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुसुमटोला
सरकार को शिक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. विद्यालयों में रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति जरूरी है, ताकि शिक्षक बच्चों में अनुशासन, संस्कार, परिश्रम और सकारात्मक सोच का विकास कर सकें.– अरविंद कुमार, सहायक अध्यापक, यूएमएस रानीडीह (उर्दू)B
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