झारखंड के इन सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक नहीं, 40 हजार बच्चों की जोखिम में जान, बारिश में डरा रहा वज्रपात

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सरकारी स्कूल के बच्चे और शिक्षक

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Lightning Conductors: झारखंड के गोड्डा जिले के महागामा के 171 सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक नहीं है. इससे बारिश के मौसम में करीब 40 हजार बच्चों की जान संकट में है. अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा विभाग को बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि सभी विद्यालयों में तत्काल तड़ित चालक लगाए जाएं ताकि बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें.

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Lightning Conductors: महागामा (गोड्डा)-झारखंड के गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड के 171 सरकारी स्कूलों में तड़ित चालक (Lightning Conductor) नहीं होने के कारण लगभग 40 हजार बच्चों की जान पर खतरा मंडरा रहा है. मानसून की बारिश में वज्रपात की घटनाएं हर वर्ष होती हैं. इससे अभिभावक चिंतित हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं. विभागीय जेई योगेश रंजन ने बताया कि वर्ष 2005-2006 में सरकार की ओर से तड़ित चालक लगाने की पहल की गयी थी. उस समय लगभग 36 हजार रुपये की लागत से अधिकतर विद्यालयों में तड़ित चालक लगाए गए थे, लेकिन एक वर्ष के अंदर ये उपकरण या तो चोरी हो गए या जंग लगने के कारण खराब हो गए. इसके बाद से अब तक किसी भी विद्यालय में नया तड़ित चालक नहीं लगाया गया है.

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बारिश के मौसम में वज्रपात का अधिक खतरा


बीपीओ मनोज बालहंस ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में कुल 171 सरकारी विद्यालय हैं, जिनमें 54 उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, 43 प्राथमिक विद्यालय, 39 उत्क्रमित मध्य विद्यालय, 16 मध्य विद्यालय, 14 उत्क्रमित उच्च विद्यालय, 4 उच्च विद्यालय तथा एक कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय शामिल हैं. इसके अतिरिक्त 30 सरकारी मान्यता प्राप्त मदरसे भी नियमित शैक्षणिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं. बारिश के मौसम में वज्रपात का खतरा अधिक होता है और विद्यालय भवन सीधे वज्रपात की चपेट में आ सकते हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों की जान को जोखिम है.

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बच्चों को स्कूल भेजने में लग रहा डर-अभिभावक


अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग को बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए. अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि सभी विद्यालयों में तत्काल तड़ित चालक लगाए जाएं ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके. वर्तमान में बारिश के दौरान बच्चों को स्कूल भेजने में अभिभावकों को डर लग रहा है. शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

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