हनवारा में बच्चे भी रमजान के रोजे में जुटे, ईद और ईदी का है बेसब्री से इंतजार

पहली बार रोजा रखने वाले बच्चे महसूस कर रहे हैं आत्मिक सुख, ईद पर ईदी और नये कपड़े का इंतजार
रमजान का महीना, जो खुदा से प्रेम और इबादत का समय है, इसमें बच्चे भी पीछे नहीं हैं. क्षेत्र के कई बच्चे इस बरकत वाले महीने में रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहे हैं. खासकर उन बच्चों में उत्साह देखने को मिल रहा है जो पहली बार रोजा रख रहे हैं. दिन भर उपवासी रहने के बाद वे इफ्तार कर रहे हैं और इसके साथ ही रमजान की खुशियों का अनुभव कर रहे हैं. 12 वर्षीय सहाबान आलम ने बताया कि वह दो साल से रोजा रख रहे हैं. उनके पिता साद्दाम ने बताया कि पहले उन्हें यह लगता था कि वे बिना खाये-पीये कैसे रहेंगे, लेकिन जब से उन्होंने रोजा रखा है, उन्हें भूख का बिल्कुल अहसास नहीं होता. वह स्कूल जाते हैं और स्कूल में बच्चों को लंच करते देख भी उन्हें भूख महसूस नहीं होती. उनका मानना है कि यह अल्लाह का करम है. नौ वर्षीय मो. अकराम आलम ने इस वर्ष पहली बार रोजा रखा है. उन्होंने कहा कि पहली बार रोजा रखकर उसे काफी खुशी हो रही है. वहीं, आर्या खातून ने बताया कि वह चार साल से रोजा रख रही हैं और रोजा रखने से उनका मन एकाग्र रहता है. उन्हें अल्लाह की इबादत में अलग ही सुकून मिलता है. रोजा रखने वाले बच्चों के परिवार भी उनकी खुशी में शामिल हैं और उनके उत्साह को देखकर बेहद खुश हैं.
ईद और ईदी का इंतजार
रमजान के महीने का एक और अहम पहलू बच्चों का ईद का इंतजार है. 14 वर्षीय इमरान खान और अब्दुल खान ने बताया कि हर साल ईद पर उन्हें घर के बड़े लोग ईदी देते हैं, जिससे उन्हें बहुत खुशी मिलती है. इसके अलावा ईद में नये कपड़े पहनना और सेवइयां खाना उन्हें बहुत भाता है, जिसके लिए वह हर साल इस त्योहार का इंतजार करते हैं. इमरान दो साल से और सूफी तीन साल से रोजा रखकर खुदा की इबादत कर रहे हैं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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