108 एंबुलेंस की राह देखता रहा मरीज, डेढ़ घंटे तक दर्द से तड़पने के बाद चली गयी जान

Updated at : 24 Feb 2025 11:39 PM (IST)
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108 एंबुलेंस की राह देखता रहा मरीज, डेढ़ घंटे तक दर्द से तड़पने के बाद चली गयी जान

पेट दर्द की शिकायत के बाद सदर अस्पताल में कराया गया भर्ती, बेहतर उपचार के लिए किया था रेफर

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भगैया के मरीज की इलाज के अभाव में मौत हो गयी है. मरीज को बेहतर उपचार के लिए रविवार की देर शाम बाहर नहीं ले जाया जा सका. मृतक का नाम देवन मड़ैया है. बताया जाता है कि मृतक को पेट दर्द की शिकायत थी. रविवार की देर शाम मरीज को भगैया से उपचार के लिए गोड्डा सदर अस्पताल लाया गया था. यहां मरीज का प्राथमिक उपचार किया गया और जब हालत में सुधार नहीं हुआ, तो ड्यटी में तैनात चिकित्सक ने बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया. रेफर किये जाने के बाद मरीज को 108 एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी. मृतक का बेटा अंजय मड़ैया ने बताया कि 108 एंबुलेंस के लिए कई बार कोशिश की गयी. हर बार डायल 108 के बाद संचालक द्वारा आधे घंटे का समय दिया गया. परिजनों ने कहा कि शाम 7 बजे से उनके द्वारा कॉल किया गया था, लेकिन मरीज की मौत के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, जिसका खामियाजा देवन मड़ैया को भुगतना पड़ गया. दर्द से तड़पते देवन मड़ैया की इलाज के अभाव में मौत हो गयी. मौत के बाद परिजनों ने दहाड़ मारकर रोना शुरू कर दिया. घटना के बाद मरीज के परिजन पूरी तरह से व्यवस्था को कोसते दिखे, लेकिन मरीज की मौत बाद पछताने के अलावा कुछ नहीं बचा. परिजनों ने बताया कि वे अत्यंत गरीब परिवार से हैं. बाहर ले जाने के लिए पैसे नहीं थे. एंबुलेंस के लिए और भी पैसे नहीं थे. नहीं तो कम से कम पिता की जान किसी प्रकार बचा पाते. पुत्र ने कहा कि वे इस घटना से अत्यंत दुखी हैं. पैसे की तंगी के कारण पिता की जान नहीं बचा पाये.

एजेंसी में बदलाव के बाद डायल 108 की कार्यशैली में हुआ बदलाव

जानकार सूत्रों की मानें तो राज्यभर में पहले डायल 108 के लिए दूसरी एजेंसी काम कर रही थी. यह एजेंसी एक हद तक ठीक थी. कॉल करने पर मरीजों को तत्काल 108 की सुविधा मुहैया करा दी जाती थी. लेकिन जब से नयी एजेंसी आयी है, तब से इसके कार्यशैली में काफी बदलाव देखा गया है. बहुत मशक्कत करने के बाद ही मरीज को 108 की सुविधा मिल रही है. एजेंसी इस मामले में बेहतर तरीके से परफॉर्म नहीं कर रही है. हालांकि पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग के अधीन है. इन मामलों पर स्वास्थ्य विभाग को देखरेख करना है. परंतु वास्तविकता है कि पूरी लापरवाही में एक मरीज की जान चली गयी है, जो न केवल चिंता का विषय है, बल्कि पूरे मामले पर सिस्टम को मंथन करने की भी आवश्यकता है.

मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने संचालक से मांगा है स्पष्टीकरण

पूरे मामले में दूसरे दिन सिविल सर्जन द्वारा मामले को लेकर संबंधित एजेंसी से स्पष्टीकरण की मांग की गयी है. जवाब देने को कहा गया है. डायल 108 में बैठे लोगों की लापरवाही के संबंध में भी कार्रवाई करने को कहा गया है. एनएचएम द्वारा इस मामले में एजेंसी को जवाब देने को कहा गया है.

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