राजाभिट्ठा में सर्पदंश से नौ वर्षीय बच्ची की मौत

Updated at : 17 Jul 2025 11:38 PM (IST)
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राजाभिट्ठा में सर्पदंश से नौ वर्षीय बच्ची की मौत

कान में डंसा विषैले सांप ने, इलाज के दौरान हुई मौत

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राजाभिट्ठा थाना क्षेत्र के उपरबिंधा गांव में बुधवार देर रात सर्पदंश की एक हृदयविदारक घटना सामने आयी है. नौ वर्षीय माही कुमारी, पिता दिलीप मिर्धा की सांप डंसने से इलाज के दौरान मौत हो गयी. बताया गया कि बच्ची अपनी नानी के साथ सो रही थी, तभी विषैले सांप ने उसके कान में डंस लिया. बच्ची को पहले हल्का सा कुछ चुभने का एहसास हुआ और उसने सांप को भागते हुए भी देखा, लेकिन नानी ने बात को गंभीरता से नहीं लिया. कुछ ही देर में माही बेहोश हो गयी. तब उसे आनन-फानन में सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गयी. माही के पिता दिलीप मिर्धा मजदूरी के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं.

जिले में सर्पदंश से अब तक पांच की मौत, मरने वालों में चार बच्चे शामिल

गोड्डा जिले में इस वर्ष अब तक सर्पदंश की घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें चार बच्चे शामिल हैं. करीब आठ दिन पूर्व सैदापुर गांव में सोते समय भाई-बहन की सांप डंसने से मौत हो गयी थी. उसी दिन निपनिया गांव में भी 12 वर्षीय किशोर की जान चली गयी. दो दिन पहले महागामा के समरी गांव में एक और व्यक्ति की सर्पदंश से मौत हो गयी. ताज़ा मामला उपरबिंधा गांव का है, जहां माही कुमारी की जान चली गयी. लगातार हो रही इन घटनाओं ने आमजन और प्रशासन दोनों को चिंता में डाल दिया है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, समय पर उपचार मिलने पर अधिकांश मामलों में जान बचायी जा सकती थी. दुर्भाग्यवश, कई लोग अब भी झाड़-फूंक या देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं.

मानसून में बढ़ जाती है सर्पदंश की घटनाएं, शहर भी नहीं है अछूता

जून से अगस्त के बीच वर्षा ऋतु के दौरान सर्पदंश की घटनाओं में तीव्र वृद्धि देखी जाती है. ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ अब शहरी मोहल्लों में भी सांप निकलने की घटनाएं बढ़ रही हैं. हाल ही में साकेतपुरी मुहल्ले में एक विषैला कोबरा एक ही दिन में दो से तीन घरों में देखा गया. लोगों की सूचना पर वन विभाग ने सांप को सुरक्षित बाहर निकाला. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अस्पतालों में सर्पदंश की स्थिति से निपटने के लिये आवश्यक दवाएं एवं संसाधन उपलब्ध हैं. फिर भी जागरूकता की कमी और समय पर उपचार न मिल पाने के कारण हर वर्ष कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं.

जनजागरूकता और सतर्कता ही बचाव का उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के प्रति जनजागरूकता बढ़ायी जानी चाहिए. सांप के डंसने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है. झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों से परहेज़ कर आधुनिक चिकित्सा पद्धति अपनाने से जान बचायी जा सकती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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