पक्की सड़क नसीब नहीं

Published at :03 Jun 2016 7:10 AM (IST)
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पक्की सड़क नसीब नहीं

प्रभात खबर आपके द्वार. बसखोरिया वासियों ने सुनायी समस्याएं प्रखंड मुख्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित बसपोखरिया गांव में विकास की रोशनी नहीं पहुंच पायी है. ग्रामीण एक अदद पक्की सड़क के लिए आजादी के साढ़े छह दशक बाद भी तरस रहे हैं. गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं है. पेयजल संकट […]

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प्रभात खबर आपके द्वार. बसखोरिया वासियों ने सुनायी समस्याएं

प्रखंड मुख्यालय से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित बसपोखरिया गांव में विकास की रोशनी नहीं पहुंच पायी है. ग्रामीण एक अदद पक्की सड़क के लिए आजादी के साढ़े छह दशक बाद भी तरस रहे हैं. गांव में आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं है. पेयजल संकट की समस्या भी बरकरार है.
बसंतराय : ना बनाओ अभियान के तहत गांव की सूरत बदलने का सरकारी दावा बाघाकोल पंचायत के बसखोरिया गांव में खोखला साबित हो रहा है. आजादी के साढ़े छह दशक बाद भी गांव के लोग एक अदद पक्की सड़क को तरस रहे हैं. प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में ग्रामीणों की समस्या सुन कर प्रभात टीम भी सकते में पड़ गयी. ग्रामीणों ने बताया गांव की आबादी 900 के आसपास है. 90 फीसदी लोग बीपीएल परिवार से आते हैं.
शिक्षा, सिंचाई व पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मयस्सर नहीं है. स्कूल में नामांकित 110 बच्चों को एक पारा शिक्षक पढ़ाते हैं. इस दिशा में कई बार प्रखंड प्रशासन से पहल करने की मांग की गयी है. पर अनसुनी कर दी जाती है. बरसात में गांव के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं. गांव की दुर्दशा देख कर रिश्तेदार रिश्ता जोड़ने से भी मुकर जाते हैं. मरीजों को खाट पर लिटा कर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है.
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