नाम का सदर अस्पताल स्थिति सीएचसी की तरह
सदर अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं
32 फीजिशियन की जगह काम कर रहे मात्र 10
गोड्डा : गोड्डा में लगभग 20 साल पहले अनुमंडल अस्पताल गोड्डा को अपग्रेड कर सदर अस्पताल का दर्जा दिया गया था. लेकिन व्यवस्था अपग्रेड नहीं हो सका. इस कारण जिले के अधिकांश लोग इलाज कराने दूसरे राज्य का झारखंड के बड़े शहरों की ओर रूख करते हैं. भले ही गोड्डा उपजाऊ राजनीतिक की भूमि रही है. संयुक्त बिहार के वक्त यहां से मुख्यमंत्री से लेकर लेकर कई मंत्री रहे हैं. झारखंड बनने के बाद भी गोड्डा ने कई मंत्री दिये हैं.
बावजूद गोड्डा में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी लोगों को सही ढंग से मयस्सर नहीं हो पा रही है. नेताओं की इच्छा शक्ति के अभाव में आज भी लाेग बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर ही निर्भर हैं. इसे विडंबना ही कहेंगे कि राज्य के स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा मंत्री के पद पर रहने वाले गोड्डा के राजनेता इन 20 वर्षों के दौरान सदर अस्पताल की व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं कर पाये. 13 लाख आबादी के इलाज का एक मात्र अस्पताल गोड्डा अस्पताल में सामान्य सुविधाओं का भी बुरा हाल है.
