Jharkhand : अस्पताल से नहीं मिला एंबुलेंस, बाइक पर लाद कर बेटी के शव को घर ले गये पिता

Updated at : 08 Dec 2017 8:53 AM (IST)
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Jharkhand : अस्पताल से नहीं मिला एंबुलेंस, बाइक पर लाद कर बेटी के शव को घर ले गये पिता

गोड्डा : झारखंड में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है. फिर एक शव को एंबुलेंस नसीब नहीं हुआ. ताजा मामला संताल परगना के गोड्डा सदर अस्पतालकाहै. इस अस्पताल ने मानवीय असंवेदना का परिचय तो दिया ही, मेडिकल लॉ एंड एथिक्स को भी ताक पर रख दिया. फलस्वरूप बुधवार की शाम करीब पांच बजे एक […]

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गोड्डा : झारखंड में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है. फिर एक शव को एंबुलेंस नसीब नहीं हुआ. ताजा मामला संताल परगना के गोड्डा सदर अस्पतालकाहै. इस अस्पताल ने मानवीय असंवेदना का परिचय तो दिया ही, मेडिकल लॉ एंड एथिक्स को भी ताक पर रख दिया. फलस्वरूप बुधवार की शाम करीब पांच बजे एक पिता को मजबूर होकर अपनी बेटी के शव को अपनी बाइक पर लाद कर ले जाना पड़ा. यह हालत तब है, जब मुख्यमंत्री कई बार निर्देश दे चुके हैं कि अस्पताल किसी व्यक्ति के शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस देने से इन्कार नहीं कर सकता.

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पेलगढ़ी पंचायत के कुर्मीचक निवासी महादेव साह की बेटी ललिता कुमारी (12) की अचानक तबीयत खराब होने पर उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां जब स्थिति नहीं सुधरी, तो बेहतर इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल लाया गया. वहां पहुंचते ही चिकित्सकों ने ललिता को मृत घोषित कर दिया. महादेव ने अपनी बेटी का शव ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से एंबुलेंस देने की अपील की, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इससे इन्कार कर दिया. आखिरकार महादेव को अपनी बेटी की लाश अपनी बाईक पर ले जानी पड़ी.

रजिस्टर में इंट्री तक नहीं कराया : अस्पताल प्रबंधन ने न तो इसकी इंट्री अपने रजिस्टर में की, न ही पुलिस को इसकी खबर दी. पोस्टमार्टम तो दूर की बात है. ललिता कुमारी हृदय संबंधी बीमारी से ग्रसित थी. महादेव मजबूर होकर बेटी के शव को बाइक पर लाद कर ही अपने घर ले गया. कल्पना की जा सकती है उस पिता पर क्या गुजर रही होगी. यह खबर देखते ही देखते सोशल साइट पर वायरल हाे गयी. पूरे शहर में अस्पताल प्रबंधन की पोल खुलने लगी.

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वाट्सएप पर चली खबर तो एसडीओ ने की जांच : बुधवार को गोड्डा के एक वाट्सएप ग्रुप में सरौनी गांव के बच्चे की लाश मोटर साइकिल में ढोकर ले जाने संबंधी खबर को ग्रुप में चलाये जाने के बाद मामले पर डीसी के निर्देश पर एसडीओ नमन प्रियेश लकड़ा एवं एसडीपीओ अभिषेक कुमार ने संयुक्त रूप से जांच की. पदाधिकारी की टीम सदर प्रखंड के सरौनी गांव पहुंच कर महादेव साह के घर पहुंचे इस दौरान पदाधिकारियों ने जांच के दौरान महादेव साह से जानकारी ली. जानकारी में महादेव साह ने बताया गया कि उनकी 15 वर्षीय पुत्री ललिता कुमारी की तबीयत खराब हो जाने के बाद पड़ोस के चंद्रशेखर नामक बाइक चालक के साथ सदर अस्पताल पहुंच कर चिकित्सक को दिखाया.

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ड्यूटी पर तैनात डाॅ सीएल वैद्य दुर्घटना पेसेंट का उपचार के बाद बच्ची को देखने के बाद मृत घोषित कर दिया. चिकित्सक ने पिता महादेव को इस बात की भी जानकारी दी कि अस्पताल लाने से पूर्व ही बच्ची की मौत हो गयी है. अस्पताल के चिकित्सक पुन: घायल की इलाज में जुट गये. इस बीच महादेव साह व चंद्रशेखर मोटरसाइकिल पर बच्ची को लादकर पुन: घर की ओर भाग गया. एसडीओ श्री लकड़ा द्वारा इस बात की जानकारी लिये जाने पर कि बच्ची की मौत के बाद अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज कराये व लाश के घर तक ढ़ोने के लिये एंबुलेंस की मांग बगैर मोटरसाइकिल पर क्यों लाया गया. इस पर श्री साह का ने अपने को परेशान व पुलिसिया पचड़े से बचने के लिए ऐसा किया. मृत बच्ची के पिता ने इस बात को भी स्वीकार किया कि अस्पताल प्रबंधन से एंबुलेंस की मांग नहीं की थी.

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