22 लाख का छात्रावास किसी काम का नहीं

Updated at : 19 Aug 2017 5:16 AM (IST)
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22 लाख का छात्रावास किसी काम का नहीं

उदासीनता . उदघाटन हुआ, लेकिन एक भी अल्पसंख्यक छात्र नहीं रह पाये गोड्डा काॅलेज अल्पसंख्यक छात्रावास में आज तक छात्रों को रहना नसीब नहीं हुआ. अब जो स्थिति है इसे फिर से चालू करने की कोई उम्मीद नहीं बची. गोड्डा : करीब 22 लाख की राशि से वर्ष 2007 में बनकर तैयार अल्पसंख्यक छात्रावास का […]

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उदासीनता . उदघाटन हुआ, लेकिन एक भी अल्पसंख्यक छात्र नहीं रह पाये

गोड्डा काॅलेज अल्पसंख्यक छात्रावास में आज तक छात्रों को रहना नसीब नहीं हुआ. अब जो स्थिति है इसे फिर से चालू करने की कोई उम्मीद नहीं बची.
गोड्डा : करीब 22 लाख की राशि से वर्ष 2007 में बनकर तैयार अल्पसंख्यक छात्रावास का उद्घाटन तात्कालीन सांसद फुरकान अंसारी ने किया था. हालांकि उद्घाटन में तात्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को आना था, शिरकत नहीं कर पाये थे. कल्याण विभाग से बने 33 बेड वाले डबल स्टोरी बिल्डिंग आज तक अपने आंगण में छात्रों को भटकने तक नहीं दिया. वर्ष 2005 में गोड्डा काॅलेज में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक छात्रों के रहने में होने वाली परेशानी को लेकर ओबीसी छात्रावास के पास ही अल्पसंख्यक छात्रावास की आधारशिला रखी गयी. छात्रावास का निर्माण कल्याण विभाग को कराया गया जिसे विशेष प्रमंडल विभाग ने बनाया था. 22 लाख की राशि से बने इस छात्रावास के बनने के बाद छात्रों को हेंडओवर नहीं किया गया.
अब हाल यह है कि इस छात्रावास का कोई भी हिस्सा सही नहीं रहा. पूरा भवन भुतबंगला बन चुका है. असामाजिक तत्वों का रात में यहां जमावड़ा लगता है. साथ ही आसपास के लोग यहां मवेशी बांध कर तबेला बना चुके हैं.
इसे चालू करने में अब शासन को पुन: करनी होगी माथापच्ची
देखते ही देखते उठा ले गया खिड़की व दरवाजे, बचा शीशा बच्चों ने निशाना बनाया
उद्घाटन के बाद काॅलेज को छात्रावास सौंपा जाना था मगर विभाग की ओर से देर से सौंपा गया. बताया जाता है कि उद्घाटन के समय छात्रावास का काम कुछ बांकी ही था और आनन फानन में फीता काट लिया गया. जब छात्रावास तैयार हो जाने के बाद छात्र रह नहीं पाये इससे पहले खिड़की व दरवाजे को एक-एक कर असामाजिक तत्वों द्वारा उखाड़ लिया गया. खिड़की के शीशे चूर हो गये.
दस साल में हो गया खंडहर, अब पशु बांधने के काम आता है
सरकारी राशि के बरबादी का सबसे बड़ा उदाहरण बना अल्पसंख्यक छात्रावास के दस साल बीतने तथा किसी भी पदाधिकारी व जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान नहीं दिये जाने की वजह से आज खंडहर में तब्दील है. रात में यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है.
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