Giridih News :वन पट्टा नहीं मिलने से दोहरी माहर झेलने को हैं विवश आदिवासी समुदाय के लोग

Published by :PRADEEP KUMAR
Published at :15 Apr 2026 11:50 PM (IST)
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Giridih News :वन पट्टा नहीं मिलने से दोहरी माहर झेलने को हैं विवश आदिवासी समुदाय के लोग

Giridih News :सदर प्रखंड के बदगुंदाखुर्द गांव में जिस बड़की देवी के अबुआ आवास को वन विभाग के लोगों ने बुलडोजर लगाकर ध्वस्त कर दिया, वह क्षेत्र झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का विधानसभा क्षेत्र है. कल्पना सोरेन के क्षेत्र भ्रमण से ऐसे लाभुकों में यह उम्मीद जगी है कि उनकी परेशानी अब दूर होगी.

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पिछले दिनों वन विभाग के लोगों ने बड़की देवी के अबुआ आवास को इसलिए तोड़ दिया, क्योंकि बिना वन पट्टा के और वन विभाग के सहमति के वन भूमि पर बनाया गया था. स्थानीय ग्रामीणों का इस मामले में कहना है कि बड़की गरीब और अनपढ़ है. उसे वर्ष 2023-24 में अबुआ आवास की स्वीकृति मिली. जांच के क्रम में अबुआ आवास की स्वीकृति जिस जमीन के दस्तावेज पर मिली है, वह भी फर्जी पाया गया. हालांकि, इस तरह का मामला सिर्फ बड़की का नहीं है, बल्कि बदगुंदाखुर्द में ही कुल 113 अबुआ आवास में से लगभग एक दर्जन से भी अधिक आवास ऐसे हैं, जो वन भूमि पर बने हुए हैं. सरकारी सिस्टम में एक ओर जहां रुपये खर्च कर अबुआ आवास की स्वीकृति मिली है, वहीं दूसरी ओर अब वन भूमि पर बनाये जाने के कारण वन विभाग लोगों को परेशान कर रहे हैं. ऐसे में वर्षों से वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि जिन्हें अबुआ आवास की स्वीकृति दी गयी है, वे वर्षों से जंगल क्षेत्र में जर्जर मिट्टी के भवन या झोपड़ी में रहते थे. वन पट्टा नहीं मिलने के कारण इधर-उधर का जमीन का दस्तावेज लगाकर योजना की स्वीकृति मिली. लेकिन, अब ऐसे लोग वन पट्टा नहीं मिलने के कारण परेशान हैं.

अबुआ आवास तोड़े जाने के बाद अन्य लाभुक दहशत में

बड़की देवी का अबुआ आवास लगभग लिंटन तक बना लिया गया था. इन्हें पहली किस्त के रूप में 30 हजार और दूसरी किस्त के रूप में 80 हजार रुपये भी मिल चुके थे. जबकि, वह दो लाख रुपये उधार लेकर घर बनाने पर खर्च भी किया. लेकिन, वन भूमि में रहने के कारण विभाग के लोगों ने उसके आशियाने को उजाड़ दिया. आरोप लगा कि वन विभाग वालों को मांगी गयी 30 हजार रुपये की रकम नहीं दी, तो बिना नोटिस के ही उनके घर को रात के अंधेरे में ध्वस्त कर दिया गया. लगभग ऐसी ही स्थिति बदगुंदाखुर्द में ही एक दर्जन लोगों के साथ है. इनमें से कई लोगों ने वन भूमि में ही अबुआ आवास का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के लोगों को सारी जानकारी है. कई लोगों से रकम भी वसूली गयी है और जो लोग रकम देने में असमर्थ हैं, उन्हें धमकी भी दी जा रही है. ऐसे में अबुआ आवास तोड़े जाने के दहशत में लोग जीने को विवश हैं. लोगों को उम्मीद है कि उनके क्षेत्र की विधायक कल्पना सोरेन वन पट्टा दिलाने में मददगार साबित हो सकती हैं. लाभुक जीतन मांझी ने बताया कि वन पट्टा के लिए उन्हें काफी दौड़ाया गया, लेकिन वन पट्टा नहीं मिला. उन्होंने भी लिंटन तक अबुआ आवास का निर्माण कर लिया है.

सूची तैयार कर रहे झामुमो व फारवर्ड ब्लॉक

इधर, बड़की देवी के आवास को तोड़े जाने और वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों को वन पट्टा नहीं मिलने और उन्हें विभाग द्वारा परेशान किये जाने की जानकारी जब झामुमो व फारवर्ड ब्लॉक को मिली, तो दोनों ही दल के लोग रेस हो गया. झामुमो के जिलाध्यक्ष संजय सिंह के नेतृत्व में एक जांच कमेटी गठित कर बदगुंदा खुर्द पंचायत में वर्षों से रह रहे आदिवासियों के संबंध में रिपोर्ट मांगी गयी है. वहीं, फारवर्ड ब्लॉक वैसे लोगों की सूची तैयार कर रहा है, जो जंगल क्षेत्र में एक लंबे अर्से से रह रहे हैं. झामुमो के कोलेश्वर सोरेन ने कहा कि उन आदिवासियों को चिह्नित करते हुए सूची तैयार की जा रही है, जो वर्षों से जंगल में रहते आ रहे हैं और अत्यंत ही गरीब हैं. ऐसे लोगों को वन पट्टा दिलाने का प्रयास किया जायेगा. फारवर्ड ब्लॉक के राजेश यादव ने कहा कि वन विभाग के लोगों ने पहले आदिवासियों को वन भूमि पर अबुआ आवास बनाने की छूट दी और जब वे लोग आवास का निर्माण पूर्ण करने की स्थिति में हैं तो उन्हें वन विभाग वाले परेशान कर रहे हैं. कहा कि वर्षों से वनों पर आश्रित रहने वाले आदिवासियों की एक सूची तैयार करायी जा रही है और उन्हें वन पट्टा दिलाने का प्रयास किया जायेगा.

वन पट्टा दिलाने को ले कल्पना सोरेन से वार्ता करेगा झामुमो

वर्षों से जंगल में रहने वाले आदिवासियों को वन पट्टा नहीं मिलने के मामले को लेकर झामुमो काफी गंभीर है. झामुमो के सदस्य इस मामले को लेकर कल्पना सोरेन से वार्ता करेंगे. पार्टी के जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन पर पहला हक यहां के आदिवासियों को और यहां पर रहने वाले लोगों का बनता है. जिन झारखंडियों ने एक लंबा वक्त जंगल में गुजार दिया है, वे कहां जायेंगे. उन्होंने कहा कि इसकी सूची तैयार करने के लिए झामुमो ने एक कमेटी भी गठित की है. बताया कि कई आदिवासी हैं, जिनका अबुआ आवास वन भूमि पर बना हुआ है. ऐसे लोगों को वन पट्टा दिलाने की पहल की जायेगी. इसके लिए गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन से भी मिलकर उन्हें सारी स्थिति से अवगत कराया जायेगा और आदिवासियों को वन पट्टा दिलाने की कोशिश की जायेगी.

(राकेश सिन्हा, गिरिडीह)B

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