लॉकडाउन के बाद अप्रवासी मजदूरों की वापसी प्रशासन की चुनौती

Updated at : 21 Apr 2020 3:22 AM (IST)
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लॉकडाउन के बाद अप्रवासी मजदूरों की वापसी  प्रशासन की चुनौती

गिरिडीह : जिले के दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर लॉकडाउन समाप्ति का इंतजार कर रहे हैं. ये मजदूर घर वापसी को लेकर काफी बेचैन हैं. लॉकडाउन वन चालू होने के बाद ऐसा लग रहा था कि सरकार मजदूरों की घर वापसी की कोई व्यवस्था करेगी, लेकिन बिना व्यवस्था किये लॉकडाउन टू शुरू कर दिये जाने […]

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गिरिडीह : जिले के दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर लॉकडाउन समाप्ति का इंतजार कर रहे हैं. ये मजदूर घर वापसी को लेकर काफी बेचैन हैं. लॉकडाउन वन चालू होने के बाद ऐसा लग रहा था कि सरकार मजदूरों की घर वापसी की कोई व्यवस्था करेगी, लेकिन बिना व्यवस्था किये लॉकडाउन टू शुरू कर दिये जाने से मजदूरों की परेशानी बढ़ गयी है. हालांकि, कई राज्यों में इन मजदूरों के खाने, पीने व रहने की व्यवस्था तो की गयी है, लेकिन कई राज्य में व्यवस्था नहीं रहने और पैसे खत्म हो जाने से ऐसे मजदूर परेशान हैं. गिरिडीह जिले के मजदूर सूरत, मुंबई, थाने, दिल्ली, मंगलौर, तेलंगाना, नागपुर, करनुल, विशाखापट्टनम, कोलकाता समेत राजस्थान, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में फंसे हुए हैं. एक आकलन के मुताबिक अब भी लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा मजदूर देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए हैं.

यदि लॉकडाउन समाप्ति के तुरंत बाद ये लोग वापस घर लौटते हैं तो अफरातफरी हो सकती है. देश में लॉकडाउन वन लागू होते ही अप्रवासी मजदूर जो भी संसाधन उपलब्ध हो सका, उससे अपने घर लौट आये. इस दौरान लगभग 70 से 80 हजार मजदूरों के घर लौटने का अनुमान है. वापसी के बाद इनकी स्क्रीनिंग भी सही तरीके से नहीं हो पायी है. उस समय न ही प्रशासन के पास और न ही सरकार के पास थर्मल स्कैनर की पर्याप्त व्यवस्था थी. जब लॉकडाउन वन लागू हुआ था, उस वक्त स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र दो ही थर्मल स्कैनर थे. हालांकि स्वास्थ्य विभाग के रिकाॅर्ड में अप्रवासी मजदूरों के वापस घर लौटने की संख्या लगभग 18 हजार दर्ज हुई है. यानी लगभग 50 से 60 हजार लोग बिना प्राथमिक जांच के ही वापस अपने-अपने घरों में चले गये. यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो लॉकडाउन समाप्ति के बाद स्थिति भयावह भी हो सकती है. बॉर्डर को रखना होगा सील :लॉकडाउन टू की समाप्ति के बाद प्रशासन और सरकार को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. जिले के हर इंट्री प्वाइंट को न सिर्फ सील करना होगा, बल्कि हर छोटे-छोटे आने-जाने वाले रास्तों पर नजर भी रखनी होगी. लॉकडाउन लागू होने के बाद जिले में 11 इंट्री प्वाइंट पर बैरियर लगाया गया था. लेकिन प्रशासनिक सख्ती नहीं होने व बॉर्डर को सील करने में विलंब करने की वजह से कई लोग विभिन्न वाहनों से सीधे अपने-अपने घर पहुंच गये. प्रशासन ने 11 इंट्री प्वाइंट को चिह्नित किया है, जबकि कई प्रखंड ऐसे भी हैं जहां खेत व पगडंडियों से भी पहुंचा जा सकता है.

ऐसे में प्रशासन को हर आने-जाने वालों पर नजर रखनी होगी. गिरिडीह जिले के हजारीबाग रोड व पारसनाथ रेलवे स्टेशन में भी काफी संख्या में दूसरे राज्यों के मजदूर उतरते हैं. इन स्टेशनों पर भी विशेष जांच-पड़ताल की व्यवस्था प्रशासन को करनी होगी. प्राथमिक परीक्षण की पड़ेगी जरूरत :प्राथमिक परीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास न ही पर्याप्त मात्रा में थर्मल स्कैनर है और न ही वीटीएम कीट. इसके अलावा पीपीइ किट की भी कमी है. संसाधनों की कमी के कारण ही लॉकडाउन लागू होने के बाद काफी संख्या में मरीजों की प्रारंभिक जांच नहीं हो पायी थी. राजधनवार प्रखंड के जहनाडीह गांव में जो युवक कोरोना पॉजीटिव पाया गया, वह मुंबई से 21 मार्च को चलकर 23 मार्च को हजारीबाग रोड पहुंचा था. उस वक्त भी उसकी तबीयत ठीक नहीं थी. यदि प्रारंभिक परीक्षण किया जाता तो प्रशासन को बाद में इतनी फजीहत उठानी नहीं पड़ती. इस युवक के कारण उसकी मां भी कोरोना से संक्रमित हुई. बाद में इसी वजह से कई गांवों में कर्फ्यू लगाना पड़ा, कई गांव को सेनेटाइज करना पड़ा. कई लोगों की प्रारंभिक जांच करनी पड़ी और सभी ऑटो चालकों की भी जांच करानी पड़ी.

हालांकि अब तक उस ऑटो संचालक को चिह्नित नहीं किया जा सका जो उस युवक समेत चार लोगों को उसके गांव पहुंचाया था. आने वाले मजदूरों को करना होगा क्वारंटाइन :जो अप्रवासी मजदूर बाहर से वापस गिरिडीह जिला स्थित अपने घर लौटने वाले हैं, उन्हें न सिर्फ क्वारंटाइन करना होगा, बल्कि प्रशासन को उसके रहने व खाने-पीने की भी व्यवस्था करनी होगी. ऐसे लोगों का संपर्क अन्य लोगों से कटा रहे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए प्रशासन को सख्ती बरतनी होगी. हालांकि लॉकडाउन के दौरान काफी संख्या में मजदूर दोपहिया वाहन, पैदल व अन्य संसाधनों से वापस अपने घर सीधे पहुंच गये थे. संबंधित पंचायत के मुखिया, सहिया व अन्य के माध्यम से ऐसे लोगों को चिह्नित कर क्वारंटाइन किया जाना था. परंतु यह प्रयास सफल नहीं हो सका. कुछ ही लोगों को चिह्नित किया जा सका और उन्हें होम क्वारंटाइन में रहने की चेतावनी दी गयी थी. अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो लॉकडाउन समाप्ति के बाद स्थिति भयावह भी हो सकती है. इस मामले पर प्रशासन को हर बिंदुओं को ध्यान में रखकर योजना बनानी होगी. बॉक्स- स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र पांच थर्मल स्कैनर और 100 जांच किट संसाधनों की कमी के साथ-साथ कोरोना टेस्ट की गति भी है काफी धीमी गिरिडीह. लॉकडाउन समाप्ति के बाद अप्रवासी मजदूरों की वापसी से सबसे ज्यादा परेशानी स्वास्थ्य विभाग को उठानी पड़ेगी. संसाधनों की भारी कमी के बीच लौटने वाले मजदूरों की प्राथमिक जांच, संदिग्ध पाये जाने की स्थिति में कोरोना टेस्ट आदि आसान नहीं होगा. लॉकडाउन चालू होने के 28 दिनों के बाद भी गिरिडीह स्वास्थ्य विभाग को सरकार पर्याप्त संख्या में न ही थर्मल स्कैनर उपलब्ध करा सकी है और न ही स्वाब टेस्ट के लिए वीटीएम किट.

वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र पांच थर्मल स्कैनर और मात्र 100 वीटीएम किट है. इसके अलावा मात्र 40 पीपीइ किट उपलब्ध है. जबकि गिरिडीह जिले के 13 प्रखंडों के लिए कम से कम 26 थर्मल स्कैनर और इसके अलावा दो रेलवे स्टेशनों के लिए दो थर्मल स्कैनर की जरूरत है. यदि लगभग डेढ़ लाख से भी ज्यादा मजदूर गिरिडीह अपने घर वापस लौटते हैं तो इनमें से कम से कम दो हजार मजदूरों का कोरोना टेस्ट के लिए दो हजार वीटीएम किट की जरूरत पड़ेगी. इसी तरह पीपीइ किट की भी आवश्यकता लगभग पांच सौ से ज्यादा होगी. इन सबसे अलग हटकर वर्तमान में कोरोना टेस्ट की जांच की गति सबसे चिंताजनक बनी हुई है. यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पूरी स्थितियों को संभालना आसान नहीं होगा. जानकारी के अनुसार जांच के लिए जो स्वाब भेजे जा रहे हैं, उसकी जांच रिपोर्ट आने में काफी विलंब हो रही है. जांच रिपोर्ट के लिए एक-एक सप्ताह लोगों को प्रतीक्षा करनी पड़ रही है. गिरिडीह जिले से अब तक कुल 179 स्वाब लेकर जांच के लिए भेजे गये हैं. इनमें से मात्र 114 की ही जांच रिपोर्ट अब तक मिली है. जबकि 65 लंबित है. लंबित सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं जिनका स्वाब एक सप्ताह पूर्व ही लिया गया है. इनमें से नौ लोगों का रिम्स में और 56 लोगों का धनबाद जांच के लिए भेजा गया था. 2000 वीटीएम कीट की मांग की गयी है : सिविल सर्जन सिविल सर्जन डाॅ. अवधेश कुमार सिन्हा ने बताया कि अप्रवासी मजदूरों के लौटने पर लगभग 2000 वीटीएम किट की जरूरत पड़ेगी और इसके लिए सरकार से मांग भी की गयी है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पांच थर्मल स्कैनर हैं, लेकिन 12 प्रखंडों में कम से कम 12 थर्मल स्कैनर की आवश्यकता पड़ेगी. 12 थर्मल स्कैनर की खरीदारी के लिए प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कोरोना टेस्ट की जांच की गति धीमी है. इस वजह से रिपोर्ट आने में कुछ विलंब हो रही है. इसमें तेजी लाने की जरूरत है. बॉक्स- सरकार की मंशा साफ नहीं : विनोद सिंह चित्र परिचय : 41. विनोद सिंह, विधायक, बगोदर बगोदर विधायक विनोद सिंह ने कहा कि झारखंड के अप्रवासी मजदूरों की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है. इस मामले में सरकार की मंशा साफ नहीं है. पर्याप्त मात्रा में संसाधनों को तैयार नहीं किया गया.

कोई भी आंतरिक तैयारी सही तरीके से नहीं हो पायी है. उन्होंने कहा कि गिरिडीह जिले में अब तक मात्र पांच थर्मल स्कैनर है. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार कितनी गंभीर है. हर मामले में सरकार मजदूरों के माथे पर ही ठिकरा फोड़ रही है, जो चिंताजनक है. सरकार को मजदूरों की वापसी को लेकर व्यापक तैयारियां करनी होगी. बड़े पैमाने पर जांच की व्यवस्था करने के साथ-साथ लोगों को क्वारंटाइन करने के लिए क्वारंटाइन केंद्र विकसित करना होगा. इसके लिए स्कूल, सामुदायिक केंद्र, पंचायत भवन आदि का इस्तेमाल करना होगा.सरकार मजदूरों को लाने की व्यवस्था करे :विधायक श्री सिंह ने कहा कि लॉकडाउन की समाप्ति के बाद सरकार झारखंड के मजदूरों को वापस लाने की व्यवस्था करे. उन्होंने सुझाव दिया है कि रेल मंत्रालय चार दिनों तक मजदूरों को वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलायें. चरणबद्ध तरीके से मजदूरों को लाये जाने पर अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी. साथ ही लोग अलग-अलग वाहनों से वापस आने की कोशिश नहीं करेंगे. अगर ऐसा नहीं होता है स्थिति संभालने में जिला प्रशासन की फजीहत होगी.सहायता एप्प की अवधि बढ़ाये सरकार :दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को राहत राशि देने के लिए सरकार ने 22 अप्रैल तक की अवधि निर्धारित की है. उन्होंने कहा कि इस अवधि को सरकार बढ़ाये. भुगतान का सिलसिला जारी रखते हुए ऑनलाइन आवेदन की तिथि बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अब तक सभी लोगों ने आवेदन नहीं किया है. कई लोगों ने उसी राज्य का स्थानीय आधार कार्ड बनवा लिया है या बैंक खाता खुलवा लिया है जिस राज्य में वे रह रहे हैं. ऐसे लोगों में काफी संख्या में लोग टैक्सी, टेंपो आदि चलाते हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई विकल्प सरकार को देना चाहिए. उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि आवेदकों को ऑनलाइन लोकेशन के माध्यम से चिह्नित करने के बाद स्थानीय स्तर पर संबंधित मुखिया या शिक्षक से उसका सत्यापन कर ऐसे लोगों को भुगतान किया जा सकता है. बॉक्स- क्वारंटाइन सेंटर बनाने में जुटा जिला प्रशासन :गिरिडीह जिला प्रशासन ने लॉकडाउन समाप्ति के बाद दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों की वापसी को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है. जिला प्रशासन की ओर से जो आकलन कर आंकड़ा तैयार किया गया है, उसके मुताबिक लगभग 73,922 मजदूरों की वापसी की बात कही जा रही है. गिरिडीह जिले की 352 पंचायत में क्वारंटाइन केंद्र बनाये जा रहे हैं. इन केंद्रों में ही लौटने वाले मजदूरों के 14 दिनों तक रहने की व्यवस्था की जा रही है. प्रत्येक क्वारंटाइन केंद्र की देखरेख के लिए मैनेजर की भी प्रतिनियुक्ति कर दी गयी है. हालांकि जिला प्रशासन के अनुमान के दोगुना मजदूरों की वापसी की उम्मीद जतायी जा रही है.

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