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Giridih News :मेयर पद का आरक्षण रोस्टर जारी, बढ़ी चहल-पहल

Updated at : 09 Jan 2026 10:50 PM (IST)
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Giridih News :मेयर पद का आरक्षण रोस्टर जारी, बढ़ी चहल-पहल

Giridih News :गिरिडीह नगर निगम मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है. राज्य निर्वाचन आयुक्त के आदेश से आरक्षित किये गये निर्वाचन क्षेत्रों की सूची जारी कर दी गयी है. अधिसूचना में गिरिडीह नगर निगम मेयर पद अनुसूचित जाति अन्य के लिए आरक्षित किया गया.

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आरक्षण की सूची जारी होने के बाद एक ओर जहां अनुसूचित जाति के दावेदारों की बांछे खिल गयी है, वहीं दूसरी ओर मेयर पद का चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले सामान्य व पिछड़ा वर्ग के दावेदारों को निराशा हाथ लगी है.

2018 में भी अनुसूचित जाति के लिए पद था आरक्षित

इससे पूर्व वर्ष 2018 गिरिडीह नगर निगम का मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था. उस समय दलीय आधार पर चुनाव हुआ था. वर्ष 2018 के चुनाव में मेयर पद पर भाजपा के प्रत्याशी सुनील पासवान ने जीत हासिल की थी. इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी द्वितीय स्थान पर रहे, वहीं झामुमो प्रत्याशी तृतीय स्थान पर थे. हालांकि, कुछ माह के बाद फर्जी सार्टिफिकेट के मामले को लेकर भाजपा के मेयर को समय से पूर्व ही पद छोड़ना पड़ा था. इसके बाद से मेयर का कुर्सी रिक्त रही. इस चुनाव के बाद नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल वर्ष 2023 में समाप्त हो गया था. वर्ष 2018 में मेयर पद अनुसूचित जाति के आरक्षित था और पुन: वर्ष 2026 में होने वाले चुनाव को लेकर मेयर पद अनुसूचित जाति अन्य के लिए आरक्षित किया गया है.

पूर्व में था परिषद

नगर निगम का चुनाव 2023 में ही होना था. लेकिन, इसमें काफी देरी हुई है. गिरिडीह नगर निगम से पहले यह नगर परिषद था. गिरिडीह नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए वर्ष 2008 में चुनाव हुआ था. इस चुनाव में अध्यक्ष पद पर पूनम प्रकाश ने जीत हासिल की थी. इसके बाद वर्ष 2013 में नगर परिषद का चुनाव हुआ जिसमें दिनेश प्रसाद यादव ने पूनम प्रकाश को हराकर जीत दर्ज की. हालांकि नगर परिषद के दौरान दोनों कार्यकाल विवादों से घिरा रहा. बताया जाता है कि वर्ष 2017 में नगर विकास विभाग ने गिरिडीह नगर परिषद को नगर निगम बनाने की मंजूरी दी थी, जिसमें शहर से सटे कई गांवों को शामिल किया गया और नगर निगम में 36 वार्ड बनाये गये. यूं तो गिरिडीह नगरपालिका का इतिहास काफी पुराना है. इसकी शुरूआत ब्रिटिश काल में वर्ष 1902 में एक नगर निकाय के रूप में हुई थी, जो बाद में 2008 में जनसंख्या के आधार पर नगर परिषद बनी और फिर 2017 में नगर निगम के रूप में परिवर्तित हो गया. बहरहाल, अभी मेयर सीट पर आरक्षण को लेकर अधिसूचना जारी की गई है. फिलवक्त सबों को नगर निकाय चुनाव की घोषणा का इंतजार है.

कई लोगों के मंसूबे पर फिरा पानी

इस बार मेयर पद पर कई लोग चुनाव लड़ने का मन बनाये हुए थे. इसमें सामान्य व पिछड़ा वर्ग से कई दावेदार शामिल थे. लेकिन, आरक्षण की अधिसूचना जारी होने के बाद कई लोगों के मंसूबे पर पानी फिर गया है. इनकी सारी तैयारी धरी की धरी रह गई है. कई लोगों का कहना है कि पूर्व में मेयर पद एससी के लिए आरक्षित था. इस बार आरक्षण में बदलाव होना चाहिए था. इस संबंध में नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष सह भाजपा नेता दिनेश प्रसाद यादव कहते हैं कि वर्ष 2018 के चुनाव में नगर निगम मेयर पद एससी के लिए आरक्षित था. इस बार आरक्षण रोटेशन में यह सीट चेंज होना चाहिए था. राज्य सरकार अपने हिसाब से सीट तय कर चुनाव कराना चाहती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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