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Giridih News :नगर निगम बनने के आठ बाद भी शहर सौंदर्यीकरण का सपना रहा अधूरा

Updated at : 09 Feb 2026 10:07 PM (IST)
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Giridih News :नगर निगम बनने के आठ बाद भी शहर सौंदर्यीकरण का सपना रहा अधूरा

Giridih News :गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में जनता की कई उम्मीदें अब तक अधूरी है. गिरिडीह नगर निगम बने आठ साल बीत गया है, पर शहर सौंदर्यीकरण का सपना अब तक अधूरा है.

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नगर निगम क्षेत्र में समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है, जिससे शहरवासियों को दो-चार होना पड़ता है. चुनाव के वक्त कई सपने संजोये जाते हैं, परंतु इसकी सार्थकता पूरी नहीं हो पायी है. गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र का सालाना बजट (वित्तीय वर्ष 2025-26) 150 करोड़ है. इस बजट के माध्यम से नागरिक सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ शहर सौंदर्यीकरण की दिशा में भी कई कार्य करना है. लेकिन, स्थिति यह है कि विकास की कई योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पायी है. जो योजनाएं धरातल पर उतरी हैं, उसका भी सही से सदुपयोग नहीं हो पा रहा है. कहीं ना कहीं इस मामले को लेकर नगर निगम पर सवाल उठते रहे हैं. वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में जलापूर्ति, प्रकाश व ट्रैफिक व्यवस्था, अतिक्रमण, जाम, शौचालय, सफाई, स्लैब विहीन नालियां, कौशल विकास समेत कई समस्याएं हैं.

जलापूर्ति की समस्या

नगर निगम क्षेत्र में 36 वार्ड हैं. वर्ष 2018 से पहले 30 वार्ड थे. नगर निगम बनने के बाद नये छह वार्डों में जलापूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो पायी है. वर्तमान में गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में खंडोली वाटर ट्रीटमेंट प्लांट वन एवं टू, चैताडीह व महादेव तालाब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जलापूर्ति हो रही है. यूं तो नगर निगम की ओर से जलकर लिया जाता है, लेकिन सभी वार्डों के मोहल्लों में सुचारू जलापूर्ति नहीं हो पा रही है. नये छह वार्डों में जलापूर्ति को लेकर डीपीआर बन रहा है.

प्रकाश व्यवस्था की कमी

निगम क्षेत्र के कई मोहल्लों में प्रकाश व्यवस्था की कमी है. इसके कारण लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. मोहल्लों की सड़कों में अंधेरा रहने के कारण शाम होते ही असामाजिक तत्वों की सक्रियता बढ़ जाती है. लूटपाट व छिनतई की घटनाएं होती हैं. खासकर अंधेरा की वजह से महिलाओं को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है.

कई शौचालयों की स्थिति जर्जर, कई हैं बंद

गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में कई शौचालय की स्थिति जर्जर है, तो कई बंद पड़े हुए हैं. नगर निगम ने चार वर्ष पूर्व 72 मॉडयूलर यूरिनल का निर्माण कराया था. इसमें लाखों रुपये खर्च किये गये. लेकिन, वर्तमान में अधिकांश जर्जर है और कई जगहों पर तो नामोनिशान मिट गया है. नगर परिषद के वक्त बनाये गये कई शौचालय महज शोभा की वस्तु बनकर रह गये हैं. इस दिशा में सिस्टम का कोई ध्यान नहीं है. आलम यह है कि शहरी क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों को जब शौचालय जाने की जरूरत होती है, तो कठिनाई होती है.

वेंडिंग जोन बना पर पसरा रहता है सन्नाटा

निगम क्षेत्र में लगभग दो करोड़ की लागत से दो वेंडिंग जोन बनाये गये, लेकिन आज तक यह वेंडिंग जोन वीरान पड़ा हुआ है. फुटपाथ दुकानदार सड़क के किनारे सब्जी व ठेला लगा रहे हैं और वेंडिंग जोन में सन्नाटा पसरा रहता है. इस दिशा में निगम ने कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला. वेंडिंग जोन निर्माण में सिर्फ ठेकेदारों की चांदी कटी. आम जनता को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाया. फुटपाथ दुकानदारों द्वारा सड़क का किनारा अतिक्रमण किये जाने के कारण जाम की समस्या उत्पन्न होती है. शहरवासी प्रतिदिन जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है.

गिरिडीह बस स्टैंड में सुविधाओं की कमी

गिरिडीह बस स्टैंड की हालत खस्ता है. यहां से पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के कई जिलों के लिए बसें खुलती है. यात्रियों से स्टैंड में चहल-पहल बनी रहती है, लेकिन सुविधा नदारद है. इस परिसर में चारों ओर गंदगी फैली रहती है. इस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है. इसका दंश यात्री झेल रहे हैं. यहां पर समुचित प्रकाश व्यवस्था की कमी रहती है. इसके कारण रात में कई बार आपराधिक घटनाएं हो चुकीं हैं.

स्लैब विहीन नालियों से हो रही परेशानी

नगर निगम क्षेत्र का सीवरेज सिस्टम ठीक नहीं है. स्लैब विहीन नालियां हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. कई बार घटना ले जानमाल का नुकसान हुआ है. पिछले दिनों दुर्गा पूजा के वक्त एक बच्चे की मौत खुले नाले में गिरने से हो गयी थी. विडंबना है कि नगर निगम के तमाम दावों के बाद भी तमाम नालियों में स्लैब नहीं बिछाया जा सका है. आज भी कई नाले खुले हुए हैं और गंदगी से भरे हुए हैं. गर्मी के दिनों में दुर्गंध का सामना करना पड़ता है. बरसात के दिनों में नाली का पानी सड़कों पर बहता है और आवागमन में आम जनता को परेशानी होती है.

क्या कहते हैं शहरवासी

निगम क्षेत्र के लोगों को इस चुनाव से काफी उम्मीदें हैं. शहरवासियों का कहना ज्वलंत समस्याओं का समाधान होना चाहिए. अमर कुमार, मनोहर राम, अमन कुमार, मो. दानिश, प्रदीप कुमार, दिव्यांश कुमार, मालती देवी आदि का कहना है कि हमलोग काफी उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधि का चयन करते हैं. लेकिन जब विकास का सही से कार्य नहीं होता है तो काफी निराशा होती है. नगर परिषद व नगर निगम चुनाव में उनलोगों को विकास का सब्जबाग तो दिखाया गया, लेकिन आशानुरूप विकास कार्य क्रियान्वित नहीं हो पायी.

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PRADEEP KUMAR

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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