Giridih News : स्ट्रीट फूड की दुकानों पर प्रशासन का कोई अंकुश नहीं

Giridih News : जिले के विभिन्न प्रखंडों के बाजारों व चौक-चौराहों पर अनधिकृत रूप से बिक रही हैं खाद्य सामग्री
Giridih News : प्रभात खबर टोली, गिरिडीह. जिले के शहरी क्षेत्र के अलावा प्रखंडों में भी कई इलाकों में फुटपाथ पर दुकानें लगाकर स्ट्रीट फूड बेची जा रही है. यहां तक कि कई इलाकों में लगने वाले साप्ताहिक हाट में भी बेरोक-टोक के अनधिकृत रूप से खाने-पीने की सामग्री खुलेआम बेची जा रही है. बताया जाता है कि इसमें कई ठेला, भेंडरों के अलावा फुटपाथ पर बोरा बिछाकर खाद्य सामग्री बेचने वाले लोगों की संख्या भी अच्छी-खासी है. ये लोग बिना निबंधन कराये ही खाद्य सामग्रियों की बिक्री कर रहे हैं. इन लोगों पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है. स्थिति यह है कि कई बार गांवों में दूषित खाद्य सामग्री खाने से लोग बीमार भी पड़ जाते हैं और फिर इलाज कराने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हो जाती है. इस वजह से किसी का ध्यान उस तरफ नहीं जाता है. वहीं जब सदर प्रखंड के लेदा बजटो गांव जैसी फूड प्वाइजनिंग की घटना सामने आती है, तब खलबली मचती है, जांच-पड़ताल व कार्रवाई की बात कही जाती है, फिर समय बीतने के बाद स्थिति जस-की-तस हो जाती है.
डुमरी : स्ट्रीट फूड की बिक्री, पर नहीं हो रही निगरानी
डुमरी. प्रखंड के विभिन्न चौक-चौराहों पर इन दिनों ठेले के माध्यम से स्ट्रीट फूड की बिक्री तेजी से बढ़ रही है. दुकानों में चाउमीन, चाट, गुपचुप, मंचूरियन, मोमोज और ढोसा जैसे खाद्य पदार्थ बेची जा रही है. सस्ते और स्वादिष्ट भोजन के कारण आम लोगों, खासकर युवाओं और बच्चों में इन ठेलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. शाम होते ही डुमरी, ईसरी बाजार और अन्य ग्रामीण क्षेत्र में कई स्ट्रीट फूड की दुकानों पर युवाओं की भीड़ देखने मिलती है. युवाओं की टोली मुंह का स्वाद बदलने के लिए इन ठेलों पर जाते हैं. इनमें से अधिकांश लोगों को अपने स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव की चिंता नहीं रहती. स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश ठेलों पर साफ-सफाई का अभाव है. खाद्य सामग्री खुले में रखी जाती है, जहां धूल, मक्खियां और प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है. इसके बावजूद फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं. ठेलों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की न तो नियमित जांच की जाती है और न ही विक्रेताओं को स्वच्छता के नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जाता है. . इधर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी राजेश कुमार महतो ने ग्रामीणों से गर्मी के दिनों में स्ट्रीट फूड खाने से बचने की अपील की है. कहा कि गर्मी के मौसम में या किसी भी मौसम में स्ट्रीट फूड सेहत के लिए ठीक नहीं है.
देवरी : बिना लाइसेंस के धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं फास्ट व स्ट्रीट फूड
देवरी. देवरी अंचल के चतरो, मंडरो, देवरी और घोरंजी बाजार में बिना फूड लाइसेंस के दर्जनों ठेला, खोमचा व रेहड़ी पर स्ट्रीट फूड व फास्ट फूड धड़ल्ले से बेचा जा रहा है. इन बाजारों में समोसा, कचौड़ी, आलू चॉप, गुपचुप, छोले भटूरे, बिरयानी, लिट्टी-चोखा, बड़ा पाव और चाट की अधिकांश दुकानें बिना एफएसएसआइ निबंधन के संचालित किया जा रहा है. ठेला-खोमचा, मिठाई दुकान और होटलों में बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों की जांच नहीं हो पा रही रही है. कई विक्रेताओं द्वारा समोसा, आलू चॉप, बिरयानी और चाट में हल्दी की जगह सस्ता केमिकल व रंग इस्तेमाल किया जा रहा है. मसालों में भी मिलावट की आशंका जताई जा रही है. लोग जल्द और सस्ते नाश्ते के लिए बिना सोचे-समझे इन ठेलों से खाना खा रहे हैं. खुले में बनने वाले इन खाद्य पदार्थों से फूड प्वाइजनिंग, पेट की बीमारी और लंबे समय में लीवर किडनी की रोग की समस्या उत्पन्न हो रही है..
सरिया : विभिन्न चौक-चौराहों पर लगायी जा रहीं स्ट्रीट फूड की दुकानें
सरिया. बड़की सरैया नगर पंचायत क्षेत्र के विभिन्न चौक-चौराहों पर लंबे समय से फास्ट फूड की दुकानें चल रही है, जिसमें अधिकांश दुकानें अनधिकृत रूप से चलायी जा रही है. इन दुकानों में ग्राहकों के बीच परोसे जाने वाले चाट, चाउमीन, गोलगप्पे, मोमोज, समोसा, पकौड़े आदि अन्य खाद्य सामग्रियों की मच्छर मक्खी व धूलकणों से सुरक्षा के ख्याल नहीं रखे जाते. कई रेहड़ियों में एक-दो दिन पूर्व का बचा हुआ सामग्री बेची जाती है. वहीं पकोड़े या समोसे छाने के बाद बचा हुआ तेल को कई बार इस्तेमाल किया जाता है. जला हुआ तेल के बार-बार इस्तेमाल करने से फूड प्वाइजनिंग की आशंका बनी रहती है. खासकर स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं चाट, चाऊमीन, गोलगप्पे आदि बड़े मजे से लेकर खाते हैं. बताया जाता है कि गोलगप्पे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला खट्टा पानी केमिकल युक्त रहता है. हालांकि ग्राहकों के आंखों में धूल झोंकने के लिए ऐसे दुकानदार दो-चार इमली भी वहां रखते हैं. दोपहर में स्कूल ऑफ होने के समय कई विद्यालयों के मुख्य द्वार पर दुकानदार अपने ठेलों को लगाकर इन खाद्य सामग्रियों को बेचते हैं, जहां स्कॉलर बड़े रुचि के साथ इन खाद्य सामग्रियों को खाकर तथा गोलगप्पे का खट्टा पानी पीकर भीषण गर्मी में अपनी त्रास मिटाते हैं. इस संबंध में बड़की सरिया नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार ने कहा कि बड़की सरैया नगर पंचायत में फूड इंस्पेक्टर की पदस्थापना नहीं हो सकी है. वहीं खाद्य सामग्री की दुकानों में निरीक्षण करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की चीज है.बेंगाबाद : टेस्टी का बोर्ड दिखाकर स्वास्थ्य सेफ्टी से खिलवाड़ कर रहे ठेला संचालक
बेंगाबाद. बेंगाबाद के विभिन्न स्थानों पर सड़क किनारे बिकने वाली चाट, चैमिन, अंडा, राॅल, मंचुरियन, गुपचुप, मोमोज के ठेला संचालक ग्राहकों को रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. बड़े-बड़े महानगरों के नाम पर प्रसिद्ध सामग्री बेचने का दावा करते हुए ठेला संचालक ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन इन ठेला संचालकों के टेस्टी सामग्री खिलाने के दावे के नाम पर ग्राहकों की स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. दोपहर से लेकर देर शाम तक बेंगाबाद चौक के लूप लाईन में ठेलों की भरमार और उसमें परोसे जाने वाले फास्ट फूड का लुत्फ उठाने बड़ी संख्या में ग्राहक उमड़ते हैं. इसमें बच्चे, बुजुर्ग, नौजवान हर वर्ग के ग्राहक होते हैं. लेकिन इन ठेलों में जिस तरह से फूड सेफ्टी का ख्याल नहीं रखा जाता है.फास्ट फूड खाने में टेस्टी जरूर होता है, लेकिन स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है. राॅल खाने के शौकिनों के अनुसार रात में राॅल खाने के बाद सुबह में पेट की समस्या आम बात हो गयी है. समोसा, पकौड़ी बेचने वाले ठेला संचालक एक बार कड़ाही में तेल गर्म करते हैं और बार-बार उसी में तलने का काम करते हैं. बता दें कि बेंगाबाद में एफएसएसआइ अधिकारी राजा कुमार ने कुछ माह पूर्व बेंगाबाद के विभिन्न होटलों में छापेमारी की थी जिस दौरान घटिया सामग्री पाये जाने पर नाराजगी जताते हुए नष्ट करते हुए दुकानदारों को चेताते हुए आगे से गड़बड़ी नहीं करने की बात कही थी. लेकिन अब तक एक बार भी ठेला के सामानों की जांच नहीं हो पायी है.गांडेय : खुले में संचालित है छोला-गुपचुप समेत अन्य ठेले
गांडेय. न निबंधन, न साफ सफाई और न ही सेफ्टी, चौक चौराहों में खुले में छोला, गुपचुप, चाट पकौड़े के ठेले बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं. कुछ ऐसा ही नजारा प्रखंड के महेशमुंडा, गांडेय, बुद्धूडीह, अहिल्यापुर, ताराटांड़ समेत अन्य इलाके के चौक चौराहों में आए दिन नजर आता है. जानकारी के अनुसार प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में खुलेआम चाट पकौड़े, छोला गुपचुप, चाउमीन, मंचूरियन समेत अन्य पकवानों के ठेले सजते हैं. इन ठेलों में साफ सफाई, सेफ्टी समेत अन्य व्यवस्था नगण्य होती है. आलम यह है कि लोग जैसे तैसे तले उक्त खाद्य सामग्रियों का सेवन करने में मशगूल होते हैं.बगोदर : बस पड़ाव और बाजार में बिना लाइसेंस के चल रही है स्ट्रीट फूड की दुकानें
बगोदर. बगोदर पुरानी जीटी रोड और बस पड़ाव स्ट्रीट फूड का एक हब बना हुआ है. वहीं किसी के पास फूड लाइसेस नहीं है न ही स्ट्रीट फूड की स्टॉल की क्या मापदंड होनी चाहिए, ये दुकानदार को जानकारी है. इन स्ट्रीट फूड में चाउमीन, चिकेन चिल्ली, फ्राइड राइस, मोमोज, मंचूरियन, गुपचुप, चाट, छोले, समोसे की करीब 50 से अधिक ठेले हर शाम लगती है. खासकर अभी शादी विवाह के लग्न के समय इन ठेलों की भरमार बजारों के अलावा बगोदर-सरिया रोड, मंझलाडीह, नीचे बाजार, नेहरू स्मारक मोड़, बेसिक स्कूल गेट के समीप कई खाने पीने के ठेले खड़े रहते हैं. इन ठेलों में न तो साफ – सफाई का ध्यान रखा जाता है और न ही उनके खाने बनाने के सामानों की उच्च क्वालिटी होती है. यहां तक कि बगोदर बस पड़ाव के अधिकांश फास्ट फूड ठेले में पाम ऑयल की खपत होती है. वहीं केमिकल युक्त सॉस का इस्तेमाल कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खेलवाड़ किया जाता है.तिसरी : बिना निबंधन धड़ल्ले से बिक रहे स्ट्रीट फूड
तिसरी. तिसरी प्रखंड मुख्यालय स्थित तिसरी चौक पर बगैर निबंधन किए कई ठेला आदि लगे रहते हैं. यहां फास्टफूड, छोले, पानीपुरी, पकौड़े, समोसा आदि बेचे जाते हैं. सड़क के किनारे ही कई ठेला लगा रहता है और 24 घंटा उक्त सड़क पर वाहनों का आवागमन होता रहता है और जिसका डस्ट भी उक्त ठेला पर पकौड़े आदि छाने जाने वाले कढ़ाइयों पर पड़ता रहता. फिर डस्ट युक्त तेल में ही खाने वाली सामग्रियों को छाना जाता है और फिर उसे ग्राहकों के बीच परोसा जाता है. वहीं तिसरी चौक पर कई दुकान और होटल हैं जिसका निबंधन नहीं किया हुआ है और साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा जाता है.पीरटांड़ : बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे फास्ट फूड के ठेले
पीरटांड़. प्रखंड के चिरकी, मधुबन, हरलाडीह सहित आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में बिना किसी वैध अनुमति या लाइसेंस के फास्ट फूड की दुकानें संचालित हो रही हैं. इन दुकानों में ग्राहकों को चाउमीन, मंचूरियन, मोमोज, पकौड़े, गोलगप्पे समेत अन्य फास्ट फूड परोसे जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानदार खाने की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं. एक ही तेल का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की लापरवाही से फूड प्वाइजनिंग समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. खासकर गर्मी के मौसम में बासी और अस्वच्छ भोजन का सेवन लोगों के लिए अधिक जोखिम भरा साबित हो सकता है.बिरनी : बगैर रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे सड़क किनारे दुकानें
बिरनी. बिरनी प्रखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित होटल, सड़क किनारे स्कूल के पास लगने वाले चाट, गुपचुप, समोसा कचौड़ी बेचने वाले ठेला दुकानदार का रजिस्ट्रेशन नहीं है. बावजूद धड़ल्ले से इन दुकानों का संचालन किया जा रहा है. इन दुकानों में भिनभिनाती मक्खियों, मिठाई में जाकर बैठ जाती है. इतना ही नहीं, एक बार तेल कड़ाही में डालने के बाद उसे उपयोग के बाद फेंकने के जगह पर उसी तेल में पुनः डालकर महीनों तक उपयोग किया जाता है. इसी तरह चाट, गुपचुप बेचने वाले भी किस तरह का पानी का उपयोग कर रहे हैं. इसका भी ध्यान नहीं दिया जाता है. इस वजह से लोग आये दिन बीमार हो रहे हैं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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