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Giridih News :सैलानियों का पसंदीदा पिकनिक स्पॉट है सरिया का पावापुर डैम

यदि प्राकृतिक सुंदरता व शांत वातावरण का मजा लेना है, तो सरिया स्थित पावापुर डैम आयें. यहां पर्यटकों के पहुंचने से उनके चेहरों पर ताजगी साफ झलकती. बरसात में इस डैम का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है.

चारों ओर पेड़ों की हरियाली तथा डैम के आउटडोर गेट से निकलने वाला झरने के जैसा गिरते पानी की गर्जना क्या सब मिलकर एक अद्भुत नजारा पेश करते हैं. सैलानी इस जगह खड़े होकर पर्यटन का आनंद लेते हैं. उन्हें ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने इस जगह को अपने हाथों से सजाया हो. पावापुर डैम व उसके इर्द-गिर्द का क्षेत्र पिकनिक के लिए प्रमुख स्थल के रूप में है जाना जाता है.

साइबेरियन पक्षी मन को लुभाते हैं

प्रखंड मुख्यालय से लगभग पांच किमी पूरब की ओर स्थित यह डैम प्रवासी पक्षियों के लिए क्रीड़ा स्थल के रूप में भी जाना जाता है. वैसे साइबेरियन पक्षियों का आना शीत ऋतु से प्रारंभ हो जाता है. लगभग चार महीने तक रंग-बिरंगे इन पक्षियों से पावापुर डैम तथा उसके आसपास का क्षेत्र गुलजार रहता है. यहां की प्राकृतिक छटा लोगों को पूर्व से ही आकर्षित करते रही है. साल, पलास, जामुन, अकेसिया, अंजन, केंदु, जंगली बेर समेत अन्य पेड़ों और कंटीली झाड़ियां से भरे जंगल में मोर, सियार, खरगोश, लोमड़ी, भेड़िया जैसे वन्य प्राणी दिख जाते हैं. डंगल में कालमेघ (चिरौंता), नीम, गिलोय, अश्वगंधा, रक्त रोहन, अर्जुन जैसे औषधीय पेड़ भी हैं. स्थानीय लोग हर साल पौष के महीना में पूरे 30 दिनों तक कहीं ना कहीं पिकनिक मनाते रहते हैं.

नववर्ष में लोगों का लगता है जमावड़ा

प्रत्येक वर्ष एक जनवरी को यहां सैलानियों का जमावड़ा लगा रहता है. लोगों की सुविधा तथा उनके आकर्षण बढ़ाने को लेकर कुछ स्थानीय लोग अपनी निजी जमीन पर सुंदर पार्क बनाये हैं, जिसमें केला, आम, अमरूद, नींबू, जामुन, बेल, कटहल जैसे फलदार पौधे लगे हैं. गुलाब, गेंदा, उड़हुल, चमेली जैसे फूलों से बगीचे को सजाया गया है. झूले, पेयजल व सीमेंटेड चेयर आदि बनवाये गये हैं.

1965 में पावापुर गांव में बना था डैम

तत्कालीन बगोदर प्रखंड की बड़की सरिया पंचायत के प्रथम मुखिया भिखारी दत्त शर्मा ने वर्ष 1965 में पावापुर गांव में धोबी-लूगा नदी पर इस डैम का निर्माण करवाया था, जो कई हेक्टेयर में फैला हुआ है. डैम के अस्तित्व में आने के साथ ही यहां के लोग लाभान्वित होने लगे. गांव के चारों ओर नहरें निकाली गयीं. सिंचाई के अलावा मछली पालन भी होने लगा. डैम के किनारे बीच जंगल में शिवमंदिर (केदारनाथ धाम) तथा हनुमान मंदिर है. प्राकृतिक व धार्मिक दृष्टि से इलाके में यह महत्वपूर्ण होते जा रहा है. हालांकि प्रशासन ने यहां सुरक्षा की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की है.

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