Giridih News :मोंथा से परेशान किसानों ने सरकार से की राहत की फरियाद
Updated at : 03 Nov 2025 11:42 PM (IST)
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Giridih News :पिछले तीन दिनों से चक्रवाती तूफान के कारण हुई भारी बारिश ने खेतों में तैयार धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. खेत व खलिहान में कटाई कर रखे धान सड़ने लगे हैं. बोझा के धान अंकुरित होने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. फसल के इस नुकसान से किसान काफी परेशान हैं.
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किसानों के अनुसार साल भर की मेहनत पर बारिश ने पानी फेर दिया है. पूंजी लगाकर तैयार किये धान की फसल को इस बार बड़ा नुकसान हो गया है. ऐसे में सरकार पर ही भरोसा है. सरकार नुकसान का आकलन कर पीड़ित किसानों को मुआवजा का भुगतान करे, तभी किसानों का कल्याण संभव है, अन्यथा वे कर्ज के बोझ तले दब जायेंगे. रबी फसल को भी बारिश ने नुकसान पहुंचाया है.
किसानों ने सुनायी व्यथा
समस्या से रूबरू होने तेलोनारी पंचायत के गमतरिया गांव पहुंचने पर प्रभात खबर संवाददाता को ग्रामीणों ने अपना दर्द साझा किया. यहां किसानों के चेहरे पर नुकसान का दर्द साफ झलक रहा था. किसानों ने तैयार फसल की खलिहान में हुई बर्बादी को दिखाते हुए बताया कि तैयार फसल को खेत से काटकर खलिहान में जमा किया था. उसे झाड़ने का मौका भी नहीं मिल पाया और बारिश शुरू हो गयी. लगातार तीन दिन तक हुई बारिश ने किसानों को संभलने का मौका भी नहीं दिया. ऐसे में खलिहान में धान के बोझा पूरी तरह से भीग गये और धान अंकुरित हो गया. बोझ भी सड़ चुके हैं. ऐसे में किसानों को काफी नुकसान हुआ है. लोगों ने बताया ग्रामीण क्षेत्र की प्रमुख फसल धान है. सालभर इसके सहारे भोजन की चिंता नहीं रहती है, लेकिन इस बार किसानों को काफी नुकसान हुआ है. किसान शंकर सिंह, मनोज हाजरा, विकास कुमार, मिलन राय, शनिचर तुरी सहित अन्य ने बताया कि धान की फसल पूरी तरह से पक चुकी है. कई किसान कटाई कर धान खलिहान ले आये हैं, जबकि अधिकांश किसानों के काटे हुए धान खेत में ही पड़े हुए हैं. बारिश ने कटाई की गई धान की फसल को बर्बाद कर दिया है. सरकार की ओर से मुआवजा का भुगतान नहीं होता है तो किसानों की परेशनी बढ़ने वाली है. कहा किसानों ने बीमा भी कराया है. सरकार विभागीय कर्मियों से इसका आकलन कर मुआवजा भुगतान कर किसानों का बोझ हल्का कर सकती है. यही हाल रबी की फसल का भी है. आलू वाले खेतों में पानी जमा हो जाने से फसल सही ढंग से उग नहीं पायी है. इसका भी नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा.क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र (केविके) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ सुनीता कांडेयांग का कहना है कि लगातार बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है. तैयार फसल की कटाई में किसान जुट चुके थे. धान की काटी गयी फसल पर बारिश की मार का नुकसान किसानों को हुआ है. आलू पर भी बारिश का असर पड़ा है. कहा अभी जमीन गीली होने के कारण किसानों को सरसों, तीसी, गेहूं की फसल लगाने में भी दिक्कत हो रही है. उन्होंने किसानों को कटाई के बाद धान की फसल को ऊंचे स्थान पर संग्रह करने की सलाह दी है ताकि बारिश का पानी नीचे बह जाये. जमीन को सूखने तक का इंतजार करने की बात कही है. कहा जब जमीन की नमी कम जाये तभी सरसों, तीसी व गेंहू की फसल लगायें. अधिक नमी वाले जमीन पर लगाने से उसके सड़ने की संभावना ज्यादा रहती है. इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. कहा सब्जी की खेती भी बारिश से प्रभावित हुई है. कहा जबतक मौसम पूरी तरह से साफ व जमीन से नमी कम नहीं होगी, फसलों पर इसका प्रतिकूल असर किसानों के चिंता का कारण बनी रहेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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