सतीश केडिया ने कहा कि सरकार मनरेगा कानून को समाप्त करने की कोशिश में है. केंद्र सरकार मजदूरों को मजदूरी पाने का अधिकार छीन रही है. इसके खिलाफ कांग्रेस मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत आंदोलन करेगी. उक्त बातें उन्होंने शनिवार को परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में कही. कहा कि मनरेगा कानून के मूल स्वरूप को बदलने के विरोध में रविवार 11 जनवरी को जिला मुख्यालय में उपवास व प्रतीकात्मक विरोध किया जायेगा. मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना गलत है. उन्होंने भाजपा की केंद्र सरकार से सवाल किया कि आखिर मनरेगा कानून के मूल स्वरूप को बदलने व महात्मा गांधी के नाम को हटाने का औचित्य क्या है. मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी. किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी परिवार द्वारा काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था. मोदी सरकार ने इसमें जो बदलाव किया है उसके तहत काम का अधिकार नहीं रहेगा. बल्कि केंद्र सरकार की मर्जी से बांटी जाने वाली एक रेवड़ी बन जायेगी. अब मोदी सरकार चुनेगी कि किस पंचायतों को काम मिलेगा और किसे नहीं.
केंद्र सरकार करेगी योजनाओं का चयन
श्री केडिया ने कहा कि पहले ग्राम सभा योजनाओं का चयन करती थी, अब योजनाओं का चयन केंद्र सरकार करेगी. कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है. 12 से लेकर 29 जनवरी तक कांग्रेस कार्यकर्ता पंचायत स्तर पर आंदोलन करेंगे. पूर्व जिलाध्यक्ष धनंजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ नाम बदलने पर विश्वास कर रही है, इस सरकार को काम से सरोकार नहीं है. कहा कि मोदी सरकार देश को गुमराह कर रही है. प्रेस वार्ता में अशोक विश्वकर्मा, महमूद अली खान, सरफराज अंसारी, यश सिन्हा, दिनेश विश्वकर्मा आदि मौजूद थे.
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