Giridih News :प्रतिबंधित मांस ले जा रहे बाइक सवार को ग्रामीणों ने पुलिस को सौंपा
Author Prabhat khabar news desk
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Giridih News :गावां प्रखंड क्षेत्र स्थित ढिलुआ जंगल से प्रतिबंधित मांस ले जा रहे एक बाइक सवार को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया.
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ढिलुआ जंगल से मांस लेकर तिसरी जा रहा था युवक, ग्रामीणों ने पीछा कर पकड़ा
गावां प्रखंड क्षेत्र स्थित ढिलुआ जंगल से प्रतिबंधित मांस ले जा रहे एक बाइक सवार को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया. पकड़ा गया युवक तिसरी के महादेवटांड़ का रमेश हांसदा पिता सोमर हांसदा है. वह अपनी बाइक पर ढिलुआ जंगल से रविवार की रात एक बोरा में लगभग 15 किलो मांस लेकर तिलैया-बंगालीबारा होते हुए तिसरी जा रहा था. जैसे ही वह बाइक लेकर मेन रोड पर पहुंची, तो इसकी भनक कुछ स्थानीय ग्रामीणों को लग गयी. ग्रामीण चार पहिया वाहन से उसका पीछा करने लगे. पीछा होते देख युवक ने घबराकर चलती बाइक से मांस को चिहुटिया के पास सड़क किनारे फेंककर भाग गया. बाद में चार पहिया वाहन सवारों ने अमतरो पुल से पहले युवक को पकड़कर कड़ाई से पूछताछ करने लगे. इसी बीच वहां से गुजर रही पेट्रोलिंग पुलिस ने बाइक के साथ मांस को जब्त कर लिया. बाद में इसकी सूचना वन विभाग को दी गयी. सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कागजी प्रक्रिया के बाद मांस को अपने कब्जे में कर लिया. साथ ही पकड़े गये व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. वनपाल राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वन अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार रमेश हांसदा को जेल भेज दिया गया है.वन विभाग व पुलिस की कार्रवाई पर पूर्व विधायक ने उठाये सवाल
पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने प्रेसवार्ता कर वन विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाये हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यकों के बाद अब आदिवासी समुदाय को टारगेट किया जा रहा है. कहा कि जिस युवक को प्रतिबंधित मांस बरामद के आरोप में पकड़ा गया है, वन विभाग उसे बिना जांच के ही जेल भेज दिया है. कहा कि असामाजिक तत्वों ने पहले उसे पकड़ा और पुलिस की मौजूदगी में मारपीट की. यह मॉब लिंचिंग का प्रयास है. कहा कि मामला बिगड़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया है. कहा कि अबुआ सरकार में आदिवासियों के समरसता और परंपरा को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है. इनकी जल-जंगल और जमीन छीनी जा रही है. लेकिन इस ओर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है. सुदूरवर्ती क्षेत्र में दिन में माइका और बैरल पत्थर का अवैध खनन हो रहा है. लेकिन वन विभाग और पुलिस इस पर कार्रवाई की जगह आदिवासियों को टारगेट कर रहे हैं. यह उचित नहीं है. मांस पकड़े जाने के आरोप में जेल गये रमेश हांसदा कहीं से दोषी नहीं है. वह पैसा देकर मांस खरीदा है. वन विभाग व पुलिस को जंगली जानवरों की हत्या कर उसे बेचने वालों को पकड़ना चाहिए. कहा कि 17 जनवरी के बाद आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले इसके खिलाफ जनांदोलन को तेज किया जायेगा. उन्होंने 16 जनवरी को बगोदर में आयोजित महेंद्र सिंह के शहादत दिवस को सफल बनाने की अपील की.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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