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बाहा पर्व के मौके पर पारसनाथ पर्वत में उमड़ा आदिवासी समाज, दिशोम मांझीथान में जुटे कई राज्यों के आदिवासी

Updated at : 13 Mar 2024 9:44 PM (IST)
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बाहा पर्व के मौके पर पारसनाथ पर्वत में उमड़ा आदिवासी समाज, दिशोम मांझीथान में जुटे कई राज्यों के आदिवासी

मरांगबुरु बोंगा बुरु समिति ने बुधवार को पारसनाथ में धूमधाम के साथ बाहा पर्व मनाया. मरांगबुरु पारसनाथ की तलहटी में स्थित दिशोम मांझीथान में इस पर्व के प्रति जनजातीय अनुराग देखते ही बना.

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मरांगबुरु बोंगा बुरु समिति ने बुधवार को पारसनाथ में धूमधाम के साथ बाहा पर्व मनाया. मरांगबुरु पारसनाथ की तलहटी में स्थित दिशोम मांझीथान में इस पर्व के प्रति जनजातीय अनुराग देखते ही बना. सभ्यता के आदिम नागरिकों का प्रकृति के प्रति अनुराग से उनका जीवन भरा हुआ है. पारसनाथ में जनजातीय समाज का समागम इसका प्रमाण बनकर सामने आया.

मांझी थान में परंपरा के अनुसार हुई पूजा-अर्चना

मंगलवार की रात ही मांझीथान से जग जाहेर थान के लिए निकले लोग प्रति वर्ष बाहा पर्व के मौके पर झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावे विभिन्न राज्यों से भी आदिवासी समुदाय के लोग आते हैं. मंगलवार की देर रात ही आदिवासी समुदाय के काफी लोग मांझी थान से जुग जाहेरथान के लिए निकल गये.

पूजा-अर्चना के बाद मांझीथान लौट गए सभी

जुगजाहेर थान में पूजा-अर्चना के बाद सभी मांझीथान लौट गये. बुधवार को दिशोम मांझी थान में आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गयी. इस दौरान लोगों ने मांझी थान जाकर आशीर्वाद लिया. बाद में मांझीथान से जुलूस की शक्ल में लोगों ने मधुबन बाज़ार का भ्रमण किया. इस मौके पर पारसनाथ पहाड़ की तलहटी स्थित मांझी थान में आदिवासी समुदाय के लोगों ने कुछ स्टॉल भी लगाये थे.

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क्या है बहा पर्व-बाहा पर्व

बाहा आदिवासियों के लिए प्रकृति का पर्व माना जाता है. बाहा का अर्थ फूल होता है. परंपरा के अनुसार आदिवासी समुदाय के लोग मरांग बुरु को देवता के रूप में पूजते हैं. पतझड़ के बाद हरे-भरे नये-नये पत्ते, कोंपलों से आदिवासियों का दिल खिल जाता है. वे झूम उठते हैं. पूजा-आराधना कर पर्वत व जंगलों की हरियाली का स्वागत करते हैं.

बाहा पर्व पर धर्म गुरु के दिशा-निर्देश पर होती है पूजा-अर्चना

बाहा पर्व यानी प्रकृति की पूजा के अवसर पर मरांग बुरु पारसनाथ में जुग जाहेर थान तथा मांझी थान में धर्म गुरु के दिशा निर्देश पर पूजा-अर्चना की जाती है. हजारों की संख्या में क्षेत्र के आदिवासी ढोल-मांदर के साथ मरांगबुरु पहाड़ स्थित जुग जाहेर थान के लिए कूच करते हैं. जुग जाहेर थान में पूजा-अर्चना के बाद वापस मंझिथान में धार्मिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना की जाती है. मांझीथान में धर्मसभा तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है.

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झारखंड ही नहीं, दूसरे प्रदेशों से भी आते हैं लोग

यूं तो मरांगबुरु पारसनाथ की धरती पर आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं, पर इस पर्व के अवसर पर झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावे बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों से भी आदिवासी समुदाय के लोग मधुबन आते हैं. कार्यक्रम को सफल बनाने में मरांगबुरु सावंता सुसार बैसी के तरफ से नूनका टुडू, बुधन हेंब्रम, सिकंदर हेंब्रम, अर्जुन हेंब्रम, फागू मरांडी, जबकि मरांगबुरु संस्था की तरफ से रामलाल मुर्मू, महावीर मुर्मू, सोमरा हेंब्रम, सुरेश हेंब्रम, राजेश किस्कू एवं नायके चांदोलाल टुडू आदि की सराहनीय भूमिका रही.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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