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जमुआ हादसे ने व्यवस्था पर खड़े किये सवाल

1 Sep, 2016 12:00 am
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जमुआ हादसे ने व्यवस्था पर खड़े किये सवाल

गिरिडीह. जमुआ के चोरपोको में सोमवार (29 अगस्त) सुबह 9.30 बजे विद्या सागर उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं को लेकर जा रहा टेंपो दुम्मा मुख्य मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है. घटना में 20 बच्चे घायल हो जाते हैं. खबर सुनकर अभिभावक व स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचते हैं, बच्चों प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराते […]

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गिरिडीह. जमुआ के चोरपोको में सोमवार (29 अगस्त) सुबह 9.30 बजे विद्या सागर उच्च विद्यालय के छात्र-छात्राओं को लेकर जा रहा टेंपो दुम्मा मुख्य मार्ग पर दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है. घटना में 20 बच्चे घायल हो जाते हैं. खबर सुनकर अभिभावक व स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचते हैं, बच्चों प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराते हैं. छात्रा सोनी कुमारी की स्थिति चिंताजनक देख रेफर कर दिया जाता है. गिरिडीह ले जाने के क्रम में ही सोनी कुमारी की मौत रास्ते में ही हो जाती है. इसके बाद सोनी की लाश को बिना पोस्टमार्टम कराये ही दफना दिया जाता है.

लगभग दो घंटे तक चले इस पूरे घटनाक्रम में सबसे आश्चर्य की बात यह है कि पुलिस को इस घटना की भनक तक नहीं मिलती. रात लगभग आठ बजे घटना की पुष्टि के लिए प्रभात खबर ने वरीय अधिकारियों से बात की तो प्रशासन हरकत में आया और कार्रवाई शुरू की. बॉक्स- मामले को हुआ दबाने का प्रयास इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास कई स्तर पर किया गया. इस मामले में कोई प्राथमिकी थाने में दर्ज न हो, इसकी योजना बनाकर सबकुछ सुनियोजित तरीके से किया गया. मामले को रफा-दफा करने के लिए परिजनों को प्रलोभन भी दिये गये. छोटी-छोटी बातों पर सड़क जाम करने वाले लोगों ने थाने में शिकायत करना तो दूर सूचना देना भी उचित नहीं समझा. यहां तक कि घायलों का इलाज बगल के सरकारी अस्पताल में कराने के बजाय दो किमी दूर स्थित एक प्राइवेट नर्सिंग होम में कराया गया. इतना ही नहीं, नर्सिंग होमों ने भी पुलिस को घटना की जानकारी नहीं दी. बॉक्स- स्कूल ड्रेस में ही कर दफना दिया शव कोसाक्ष्य छिपाने की हड़बड़ी में आनन-फानन में सोनी की लाश को दफना दिया गया. जब लाश को दंडाधिकारी की उपस्थिति में निकाला गया तो लोग यह देखकर अचंभित हो गये कि स्कूल ड्रेस में ही दफना दिया गया था. जमुआ के अंचलाधिकारी सह दंडाधिकारी आलोक वरन केशरी ने बताया कि जब सोनी की लाश निकाली गयी तो देखा गया कि वह स्कूल ड्रेस पहने हुए है.

जबकि, हिंदू रीति रिवाज के अनुसार किसी भी लाश का अंतिम संस्कार नये कपड़े में ही किया जाता है. पंडित हेमंत कहते हैं कि अंतिम संस्कार में पवित्रता बनी रहे, इसके लिए लाश का अंतिम संस्कार नये कपड़ों में ही किया जाता है.बॉक्स- उपायुक्त के आदेश पर सक्रिय हुआ प्रशासन जब घटना की जानकारी जब उपायुक्त उमाशंकर सिंह को दी गयी तो उन्होंने एसडीओ को निर्देश दिया कि 24 घंटे के भीतर स्कूल संचालक और टेंपो चालक के विरूद्ध कार्रवाई करें. इसके बाद अधिकारी सक्रिय हुए और दो घंटे के विद्यासागर उच्च विद्यालय के संचालक राजकुमार वर्मा व उनके भाई सह टेंपो चालक संजय कुमार वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया. दिन दंडाधिकारी की उपस्थिति में सोनी की दफन लाश को निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया. मृतक सोनी के पिता अजीत कुमार साव की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. बॉक्स- संदेह के घेरे में जमुआ पुलिस की भूमिका घटना की सूचना न मिलने के पुलिस के दावे पर यकीन करें तो सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस का सूचना तंत्र इस कदर फेल हो चुका है कि दुर्घटना की खबर जमुआ से लेकर गिरिडीह तक फैल जाने के बाद भी जमुआ पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं मिली. जबकि दुर्घटना थाना के पीछे मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर घटी थी और घायलों को थाना के बगल स्थित थाना रोड से होते हुए नर्सिंग होम तक पहुंचाया गया था. दुर्घटना के बाद विद्यासागर उच्च विद्यालय ने भी छात्रा की मौत पर छुट्टी दे दी और जमुआ में इस घटना की खबर दिन में ही सरेआम हो गयी.

इन सबके बावजूद जमुआ पुलिस को रात आठ बजे तक घटना की जानकारी नहीं थी. जमुआ थाना के प्रभारी केदारनाथ प्रसाद कहते हैं कि उन्हें लगभग रात आठ बजे घटना की जानकारी मिली है. थाने में न ही किसी ने आवेदन दिया था और न ही कोई सूचना दी गयी थी. जमानतीय धारा के तहत प्राथमिकीआश्चर्य की बात है कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर स्कूल के संचालक राजकुमार वर्मा और टेंपो के चालक संजय कुमार वर्मा की गिरफ्तारी तो कर ली जाती है, लेकिन प्राथमिकी में भादवि की धारा 304 ए और 201 के तहत ही मामला दर्ज किया जाता है जो जमानतीय धाराएं हैं. जबकि अधिवक्ता प्रकाश सहाय कहते हैं कि यह दुर्घटना एक गंभीर मामला था. पांच यात्री की क्षमता वाले टेंपो में 32 बच्चे बैठाये गये थे. इससे यह स्पष्ट है कि चालक ने जानते हुए घटना को आमंत्रित किया है. ऐसे में भादवि की धारा 304 का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था जो गैर जमानतीय है. इधर जानकारी मिली है कि जमानतीय धारा रहने की वजह से स्कूल के संचालक राजकुमार वर्मा के साथ-साथ टेंपो चालक संजय कुमार वर्मा को भी जमानत मिल गयी है.

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